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भारतीय टीम ने बनाया टी20 वर्ल्ड कप का सबसे बड़ा स्कोर

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भारतीय टीम ने बनाया टी20 वर्ल्ड कप का सबसे बड़ा स्कोर
महिला टी20 विश्व कप के 10वें मुकाबले में भारतीय टीम ने नीदरलैंड के सामने जीत के लिए 210 रनों का लक्ष्य रखा है. पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया ने 209 रन बनाए. टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम को ओपनर्स स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा ने शानदार शुरुआत दिलाई, दोनों ने पहले विकेट के लिए शतकीय साझेदारी की. इसके बाद ऋचा घोष, दीप्ति शर्मा ने अंत में छोटी लेकिन महत्वपूर्ण पारी खेलकर भारत के स्कोर को 200 के पार पहुंचाया.

नीदरलैंड ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया था. भारतीय ओपनर्स शेफाली वर्मा और स्मृति मंधाना ने शानदार शुरुआत दिलाई, दोनों ने पॉवरप्ले में बिना विकेट गंवाए 59 रन बनाए. 11वें ओवर में शेफाली ने अपना अर्धशतक पूरा किया.

11वें ओवर में ही भारत के 100 रन भी पूरे हुए, अगले ओवर में शेफाली वर्मा के रूप में भारत का पहला विकेट गिरा. ये सफलता हेदर सीजर्स को मिली, उनकी गेंद पर शेफाली ने हवाई फायर किया लेकिन बॉउंड्री पर कैच आउट हो गईं. उन्होंने मंधाना के साथ मिलकर पहले विकेट के लिए 115 रनों की साझेदारी की.

स्मृति मंधाना की लगातार दूसरी फिफ्टी
दूसरे विकेट के लिए स्मृति मंधाना और जेमिमा रोड्रिग्स के बीच 47 रनों की साझेदारी हुई. मंधाना ने अपना अर्धशतक पूरा किया, जो टी20 वर्ल्ड कप 2026 में उनका लगातार दूसरा अर्धशतक है. उन्होंने 47 गेंदों में 74 रनों की पारी खेली, जिसमें 1 छक्का और 11 चौके लगाए. वह 16वें ओवर की आखिरी गेंद पर कैच आउट हुई, उनका विकेट कैरोलीन लैंग को मिला.

अगली ही गेंद पर जेमिमा रोड्रिगेज की पारी भी समाप्त हुई, वह मर्थे वैन की गेंद पर कैच आउट हुईं. जेमिमा ने 13 गेंदों में 19 रन बनाए.
कैरोलीन लैंग ने 18वें ओवर की पहली गेंद पर यास्तिका भाटिया का भी विकेट चटकाया. इस गेंद पर भाटिया आगे बढ़कर शॉट मारना चाहती थी, लेकिन धीमी गति की इस गेंद पर पूरी तरह बीट हुईं और स्टंप आउट. यास्तिका ने 4 गेंदों में 3 रन बनाए.

टी20 वर्ल्ड कप का सबसे बड़ा टोटल
अंत में ऋचा घोष ने 8 गेंदों में 2 छक्के और 1 चौके की मदद से 20 रन बनाए. कप्तान हरमनप्रीत कौर ने 9 गेंदों में 12 और दीप्ति शर्मा ने 2 गेंदों में 10 रन बनाकर भारत के स्कोर को 200 पार पहुंचाने में अहम रोल निभाया. महिला टी20 वर्ल्ड कप में पहली बार है जब भारत ने 200 से अधिक रन बनाए हैं. ये इस वर्ल्ड कप का दूसरा सबसे बड़ा टोटल भी है.

मध्यप्रदेश में एक साथ हुआ 29 आईएएस अफसरों का तबादला

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मध्यप्रदेश में एक साथ हुआ 29 आईएएस अफसरों का तबादला
मध्यप्रदेश सामान्य प्रशासन विभाग में एक बार फिर बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार ने 29 आईएएस अधिकारियों का तबादला (IAS Transfer MP) किया गया है। युवा कल्याण विभाग और नगरीय विकास एवं आवास विभाग के सचिव बदले गए हैं। श्रम विभाग और सहकारिता विभाग में नए उप सचिव की नियुक्ति की गई है। सोनिया मीना समेत कई अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वहीं कुछ को अतिरिक्त प्रभार से मुक्त भी किया गया है। तबादले और नियुक्ति से संबंधित आदेश राज्यपाल के नाम से सरकार के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने 17 जून को जारी किया है।

केसी गुप्ता अपर मुख्य सचिव मध्य प्रदेश शासन, कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग को उनके वर्तमान कर्तव्यों के साथ-साथ कृषि उत्पादन आयुक्त पद का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। अनिरुद्ध मुकर्जी को अपर मुख्य सचिव पर्यावरण विभाग और पर्यावरण आयुक्त के साथ महानिदेशक एप्को पद का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। गुलशन बामरा को प्रमुख सचिव अनुसूचित जाति कल्याण विभाग का एडिशनल चार्ज सौंपा गया है। सोनिया मीना को आयुक्त-सह-संचालक संस्थागत वित्त का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

मध्य प्रदेश शिक्षा मंडल इंदौर के संभागीय सचिव पद पर शैली कानश को नियुक्त किया गया है। अरविंद कुमार शाह को मुख्य कार्यपालन अधिकारी आयुष्मान भारत पद की जिम्मेदारी दी गई है। मंजूषा विक्रांत राय को पशु पालन एवं डेयरी विभाग का उप सचिव बनाया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग का अपर सचिव भारती जाटव ओगरे को बनाया गया है।

5 करोड़ में बनी मराठी फिल्म ने दिया 1425.6% प्रॉफिट

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5 करोड़ में बनी मराठी फिल्म ने दिया 1425.6% प्रॉफिट
इन दिनों थिएटर में मराठी फिल्मों का दबदबा बना हुआ है. आज हम आपको एक ऐसी मराठी फिल्म के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने 1400 परसेंट से ज्यादा का प्रॉफिट कमाया. इस फिल्म को केदार शिंदे ने डायरेक्ट किया था. इस फिल्म की कहानी ने फैंस को इंप्रेस किया और इसका रिजल्ट बॉक्स ऑफिस पर देखने को मिला. मेकर्स की झोली करोड़ों के कलेक्शन से भर गई. फिल्म का नाम है ‘बाईपण भारी देवा’.

‘बाईपण भारी देवा’ का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन
कोईमोई की रिपोर्ट के मुताबिक, ये फिल्म सिर्फ 5 करोड़ के बजट में बनी थी. इस फिल्म ने ग्रॉस 90.50 करोड़ का कलेक्शन किया था. वहीं नेट 76.28 करोड़ कमाए. फिल्म ने 1400 परसेंट से ज्यादा का प्रॉफिट दिया.

बजट- 5 करोड़
बॉक्स ऑफिस नेट कलेक्शन- 76.28
ग्रॉस कलेक्शन-90.50 करोड़
प्रॉफिट परसेंट- 1425.6%

फिल्म 50 दिनों तक थिएटर में लगी रही. फिल्म ने ओपनिंग सिर्फ 1.05 करोड़ से की थी. लेकिन पॉजिटिव वर्ड ऑफ माउथ और अच्छे रिव्यूज का फिल्म को फायदा मिला. आगे दिनों में फिल्म ने शानदार कलेक्शन किया. फिल्म ने नौवें और दसवें दिन तो 5.4 करोड़ और 6.05 करोड़ तक का कलेक्शन किया.

इस फिल्म में सुचित्रा बांदेकर, तुषार दलवी, वरद चव्हाण, रिया शर्मा, दीपा परब, रोहिणी हट्टंगडी, शिल्पा नवलकल, सुरुची अडारकर, सोहम बांदेकर, वंदना गुप्ते जैसे स्टार्स थे. फिल्म 30 जीन 2023 को रिलीज हुई थी. फिल्म को माधुरी भोसले ने प्रोड्यूस किया था. इसका रन टाइम 2 घंटे 17 मिनट था. फिल्म का स्क्रीनप्ले वैशाली नायक ने लिखा था.

फिल्म में 6 बहनों की कहानी दिखाई गई. इसमें दिखाया गया कि 6 बहनें हैं जिनका स्वभाव एक-दूसरे से काफी अलग है. वो लंबे समय से एक-दूसरे से दूर हैं और मंगळागौर कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेने के लिए एक साथ आती हैं. इसके बाद फिल्म में कई ट्विस्ट एंड टर्न आते हैं.

अधिकमास समाप्त होने के बाद 19 जून से शुभ और मांगलिक कार्य फिर से शुरू

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अधिकमास समाप्त होने के बाद 19 जून से शुभ और मांगलिक कार्य फिर से शुरू
पिछले एक महीने से चल रहा अधिकमास आखिरकार खत्म हो चुका है। इसे मलमाल भी कहा जाता है, जो हर तीन साल में एक बार आता है और इस दौरान सभी शुभ कार्यों पर ब्रेक लग जाता है। ऐसे में मलमास खत्म होने के साथ ही एक बार फिर शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत होने को है।

शुभ कार्यों की शुरुआत
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिकमास या पुरुषोत्तम मास में शादी-ब्याह जैसे बड़े मांगलिक कार्यों को रोक दिया जाता है। ज्योतिषाचार्य की मानें, तो यह पूरा महीना भगवान विष्णु की भक्ति के लिए समर्पित होता है। इस समय पूजा-पाठ और दान-पुण्य करना तो बहुत शुभ होता है, लेकिन विवाह, गृह प्रवेश या मुंडन जैसे उत्सव नहीं किए जाते।

इस साल यह अधिकमास 15 जून को खत्म हो चुका है। इसके समाप्त होते ही सभी रुके हुए मांगलिक कार्य एक बार फिर से शुरू किए जाएंगे और चारों तरफ उत्सव का माहौल बन जाएगा।

19 जून से होंगी शादियां
अधिकमास खत्म होने के ठीक तीन दिन बाद, यानी 19 जून से शादियों का सीजन शुरू हो जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस बार विवाह के बंधन में बंधने के लिए परिवारों को बहुत ही सीमित समय मिल रहा है। 19 जून से शुरू होकर महीने के आखिर तक कुल 9 बहुत ही शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। यानी जिन परिवारों में शादी होनी है, उन्हें इसी कम समय में अपने सारे आयोजन निपटाने होंगे।

जून में शादी के लिए उत्तम तारीखें
जून 2026 में शादियों के लिए ये तारीखें बेहद उत्तम और शुभ मानी गई हैं: 19, 20, 23, 24, 25, 26, 27, 28 और 29 जून। इन पावन तिथियों में फेरे लेना दूल्हा-दुल्हन के वैवाहिक जीवन के लिए बहुत ही सुखद और मंगलकारी रहने वाला है।

फिर लगेगा चार महीने का लंबा ब्रेक
जून के बाद जुलाई में भी 12 तारीख तक ही शादी के मुहूर्त है और इस वेडिंग सीजन के तुरंत बाद, शुभ कार्यों पर एक बार फिर से चार महीने का लंबा ब्रेक लग जाएगा। 25 जुलाई से ‘चातुर्मास’ की शुरुआत हो रही है, जो 21 नवंबर तक चलेगा।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन चार महीनों में भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और पाताल लोक में विश्राम करते हैं। चूंकि सृष्टि के कर्ता-धर्ता इस समय विश्राम में होते हैं, इसलिए इस अवधि में शादी, मुंडन या नया घर खरीदना सही नहीं माना जाता।

बिहार-यूपी और झारखंड के यात्रियों की मौज

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बिहार-यूपी और झारखंड के यात्रियों की मौज
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव बुधवार को हडपसर रेलवे स्टेशन से पुणे-दानापुर अमृत भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाएंगे। यह महाराष्ट्र की आठवीं और पुणे डिवीजन की दूसरी अमृत भारत ट्रेन होगी, जो आम लोगों को किफायती यात्रा की सुविधा देगी।

यह ट्रेन महाराष्ट्र से झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए सीधी और किफायती कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। अधिकारियों ने बताया कि इससे प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले छात्रों, नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों और प्रवासी श्रमिकों को लाभ होगा।

11431 पुणे-दानापुर अमृत भारत एक्सप्रेस हर शनिवार को 15:30 बजे पुणे से रवाना होगी और सोमवार को 01:30 बजे बिहार के दानापुर पहुंचेगी। 11432 दानापुर-पुणे अमृत भारत एक्सप्रेस हर सोमवार को 03:30 बजे दानापुर से रवाना होगी और मंगलवार को 11:05 बजे पुणे पहुंचेगी।

इसका ठहराव अहिल्यानगर, बेलापुर, कोपरगांव, मनमाड, भुसावल, खंडवा, इटारसी, पिपरिया, नरसिंहपुर, जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, मानिकपुर, प्रयागराज छिवकी, पंडित दीन दयाल उपाध्याय, बक्सर और आरा सहित विभिन्न स्टेशनों पर होगा।

पुणे और साईनगर शिरडी के बीच सीधी ट्रेन सेवा आज सेरेल मंत्री अश्विनी वैष्णव बुधवार को पुणे-साईनगर शिरडी डेली एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाएंगे। इससे पुणे और साईनगर शिरडी के बीच पहली सीधी ट्रेन सेवा शुरू होगी।

इससे इन दो महत्वपूर्ण शहरों के बीच सीधी ट्रेन सेवा की भक्तों और पर्यटकों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी होगी। ‘ऑक्सफोर्ड आफ द ईस्ट के नाम से मशहूर पुणे, महाराष्ट्र में शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी और आटोमोबाइल का एक प्रमुख केंद्र है।

मंत्रि-परिषद में बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाएं और जन-कल्याण के लिए 24 हजार 200 करोड़ रूपये के निर्णय लिए

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मंत्रि-परिषद में बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाएं और जन-कल्याण के लिए 24 हजार 200 करोड़ रूपये के निर्णय लिए
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रि-परिषद की बैठक मंत्रालय में हुई। बैठक में मध्यप्रदेश के बुनियादी ढांचे और जन-कल्याण को बड़ी रफ्तार देते हुए कुल 24,200 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के लिए अतिरिक्त वित्त पोषण सहित कुल 19,472 करोड़ 29 लाख रुपये का पुनरीक्षित बजट स्वीकृत किया गया। राज्य में विश्वस्तरीय सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ाने और परोपकारी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए ‘मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति 2026 लागू करने के प्रस्ताव पर मंत्रि-परिषद ने 5 सदस्यीय मंत्रि-मण्डल उप समिति का गठन किया है। समिति सभी संबंधित पहलुओं का अध्ययन कर रिपोर्ट देगी। मंत्रि-परिषद ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए रीवा, देवास और गुना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को आउटसोर्स मॉडल पर चलाने का पायलट प्रोजेक्ट भी मंजूर किया गया।

वन्य-प्राणी संरक्षण और संवेदनशील क्षेत्रों के 94 गांवों के विस्थापन व मुआवजे के लिए 16वें वित्त आयोग की अवधि 2026-2031 के तहत 2 हजार 381 करोड़ 15 लाख रुपये आवंटित किए हैं। सामाजिक और आर्थिक समावेशन को बढ़ावा देते हुए जनजातीय विद्यार्थियों की शैक्षणिक व आवासीय सुविधाओं के लिए 687 करोड़ रुपये और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने के उद्देश्य से रेशम उत्पादन की विभिन्न योजनाओं के लिए 639 करोड़ 25 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है।

मंत्रि-परिषद द्वारा श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन,औद्योगिक सुरक्षा और श्रमिक कल्याण योजनाओं के सुचारू संचालन के लिए 531 करोड़ 78 लाख रुपये तथा स्थानीय निकायों के वित्तीय प्रबंधन व ऑडिट व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए स्थानीय निधि संपरीक्षा के संचालन के लिए 492 करोड़ 45 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। यह सभी निर्णय आगामी पांच वर्षों में मध्यप्रदेश के समग्र, समावेशी और सतत विकास को सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ी पहल है।

कृषक कल्याण वर्ष में अन्नदाताओं के सम्मान और सुविधाएं बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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कृषक कल्याण वर्ष में अन्नदाताओं के सम्मान और सुविधाएं बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मंगलवार को किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने भेंट कर किसान कल्याण के निर्णयों के लिए सरकार का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष 2026 में कृषकों के कल्याण के कार्य निरंतर होंगे। अन्नदाता को सम्मान के साथ उन्हें अधिक से अधिक सुविधाएं देने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से प्रतिनिधि मंडल ने गेहूं खरीदी में मध्यप्रदेश की उपलब्धि के लिए हर्ष व्यक्त करते हुए किसानों के लिए की गई बेहतर व्यवस्था के लिए आभार व्यक्त किया। मध्यप्रदेश ने समर्थन मूल्य पर 13.42 लाख किसानों से 104.36 लाख मे.टन गेहूं का उपार्जन किया गया है। किसान संख्या की दृष्टि से मध्यप्रदेश भारत में प्रथम है। उपार्जन की दृष्टि से पंजाब के बाद मध्यप्रदेश दूसरे स्थान पर रहा है। प्रदेश में 9अप्रैल से 28 मई की अवधि में उपार्जन किया गया। समर्थन मूल्य 2585 रुपए प्रति क्विंटल के साथ ही 40रुपए बोनस राशि मिलाकर किसान को प्रति क्विंटल 2625 रुपए प्रति क्विंटल के भुगतान की व्यवस्था करवाई गई। किसानों को 27 हजार 196.48 करोड़ रुपए की राशि का भुगतान प्रदेश में किया जा चुका है।

किसानों ने ऋण अदायगी के लिए 31 मार्च की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 31 मई किए जाने और विभिन्न परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण में 4 गुना मुआवजा देने का प्रावधान करने के लिए आभार व्यक्त किया। प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों ने कहा कि राज्य शासन द्वारा किसानों के हित में लिए गए निर्णय प्रशंसनीय हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट कर किसानों ने कृषक हित से संबंधित कुछ सुझाव भी दिए। इनमें मूंग खरीद व्यवस्था और मूंग-उड़द के लिए पंजीयन की प्रक्रिया पूर्ण करवाने, नहरों को तालाबों से जोड़ने के सुझाव शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल में कमल सिंह आंजना, चंद्रकांत गौर के साथ सर्वज्ञ दीवान, लक्ष्मी नारायण पटेल, प्रह्लाद पटेल आदि शामिल थे।

मुख्यमंत्री निवास में पंजाब के तीर्थयात्रियों का हुआ आत्मीय स्वागत

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मुख्यमंत्री निवास में पंजाब के तीर्थयात्रियों का हुआ आत्मीय स्वागत
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि समाज में समता के भाव का विशेष महत्व है। विभाजन की रेखाएं समाप्त करने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना है। डॉ. भीमराव अंबेडकर ने अपने जीवनकाल में यह महत्वपूर्ण कार्य किया। मध्यप्रदेश और पंजाब के रिश्ते प्रगाढ़ होंगे, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विभिन्न युक्तियों से समाजों, वर्गों और प्रदेशों को परस्पर जोड़ने के महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं। इस क्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने पंचतीर्थ के विकास की पहल की। इसके फलस्वरूप आज भारत के भिन्न-भिन्न राज्यों में डॉ. अंबेडकर के जीवन से जुड़े विभिन्न पावन स्थलों के समुचित विकास के लिए कार्य हो रहा है। श्रद्धालु नागरिक इन स्थानों की यात्रा के लिए उत्सुक हुए हैं। सामाजिक समरसता का नया अध्याय प्रारंभ हुआ है। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंभ प्रभार) गौतम टेटवाल, राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष कैलाश जाटव, सदस्य बारेलाल, रामलाल, विधायक ऊषा ठाकुर के अलावा, नेहा बग्गा उपस्थित थीं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव गत 14 मई से मोहाली (चंड़ीगढ़) से प्रारंभ पंचतीर्थ यात्रा के यात्रियों का मुख्यमंत्री निवास में स्वागत कर रहे थे। यह यात्रा आगामी 21 जून को दिल्ली में पूर्ण होगी। यात्रा के स्थानों में डॉ. अंबेडकर की जन्मस्थली डॉ. अंबडेकर नगर (महू), दीक्षा भूमि नागपुर, इंदु मिल मुंबई, निर्वाण स्थल दिल्ली शामिल हैं। यात्रा के संयोजक एस.आर. लद्धड़ और सह-संयोजक मनोज चंदल हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग की उन्नति आवश्यक है। सभी वर्गों का आपसी सद्भाव महत्वपूर्ण है। अनेक दल और व्यक्ति सिर्फ समाज को बांटने और महापुरूषों के अपमान का कार्य करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सामाजिक समानता के भाव को स्थापित किया जा रहा है। डॉ. अंबेडकर के योगदान का स्मरण ही नहीं किया जा रहा बल्कि उनके बताए मार्ग पर चलने का कार्य भी किया जा रहा है।

शिक्षा के साथ संस्कारों का समावेश हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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शिक्षा के साथ संस्कारों का समावेश हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में दक्षिण कौशल पीठाधीश्वर स्वामी राजीव लोचन दास जी महाराज, निर्वाणी अखाड़ा के महंत सुरेंद्र दास जी महाराज, शदाणी दरबार से उदय लाल जी तथा कबीर आश्रम सोनपैरी के देवकर साहब जी ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर संत-महात्माओं ने छत्तीसगढ़ के विद्यालयों में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों एवं नैतिक शिक्षा से जुड़े पारंपरिक श्लोकों और मंत्रों को पुनः शामिल किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

संतों ने कहा कि पूर्व में विद्यालयों में विद्यार्थियों को गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वर जैसे मंत्रों एवं भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराया जाता था, जिससे बच्चों में संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का विकास होता था। समय के साथ ये परंपराएं शैक्षणिक वातावरण से धीरे-धीरे विलुप्त होती गईं, किंतु अब राज्य सरकार द्वारा इन्हें पुनः स्थापित करने की पहल अत्यंत स्वागतयोग्य है। संत समाज ने कहा कि विद्यालयों में शांतिपाठ, सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र तथा अन्य प्रेरणादायी वैदिक एवं सांस्कृतिक प्रार्थनाओं का समावेश बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे नई पीढ़ी भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जुड़ सकेगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार, चरित्र निर्माण और जीवन मूल्यों के विकास का आधार भी है। हमारी सरकार बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। विद्यालयों में शांतिपाठ, सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र एवं अन्य प्रेरणादायी प्रार्थनाओं के समावेश से विद्यार्थियों में अनुशासन, सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना का विकास होगा। यह पहल नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए एक संस्कारित, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। संत-महात्माओं ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को इस पहल के लिए साधुवाद देते हुए उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया तथा कहा कि यह निर्णय प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक विरासत को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

बिजली दरों में संशोधन से आम उपभोक्ताओं पर न्यूनतम असर

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बिजली दरों में संशोधन से आम उपभोक्ताओं पर न्यूनतम असर

41 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को राहत

14.5 लाख परिवारों को अब भी मिल रही मुफ्त बिजली

सिंचाई पम्प धारी कृषकों पर कोई अतिरिक्त भार नहीं

सब्सिडी, सौर ऊर्जा एवं राहत योजनाओं से अधिकांश उपभोक्ताओं को संरक्षण

रायपुर, 16 जून 2026/छत्तीसगढ़ में विद्युत टैरिफ के वार्षिक संशोधन के बावजूद छत्तीसगढ़ सरकार ने आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार को न्यूनतम रखने के लिए कई स्तरों पर राहत और संरक्षण की व्यवस्था की है। विद्युत नियामक आयोग द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए औसतन 6.23 प्रतिशत अर्थात लगभग 42 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि स्वीकृत की गई है, लेकिन राज्य में मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना, बिजली बिल समाधान योजना और पीएम सूर्यघर योजना जैसी पहलों के कारण अधिकांश उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव काफी सीमित रहेगा।

गौरतलब है कि विद्युत दरों का निर्धारण छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा किया जाता है, जो एक स्वतंत्र वैधानिक संस्था है। आयोग विद्युत कंपनियों की वार्षिक राजस्व आवश्यकता, उत्पादन लागत, कोयला, ट्रांसमिशन तथा वितरण व्यय सहित विभिन्न आर्थिक पहलुओं का अध्ययन कर दरों का निर्धारण करता है। नए टैरिफ में घरेलू उपभोक्ताओं की दरों में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक की वृद्धि की गई है। हालांकि मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना के कारण प्रदेश के अधिकांश परिवारों पर इसका अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा।

प्रदेश में लगभग 51 लाख घरेलू उपभोक्ता हैं। इनमें से 14.5 लाख बीपीएल परिवारों को 30 यूनिट तक बिजली निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है, जिसका पूरा खर्च राज्य सरकार वहन कर रही है। इसके अलावा 26.5 लाख ऐसे उपभोक्ता, जिनकी मासिक खपत 400 यूनिट तक है, उन्हें 200 यूनिट तक की खपत पर 50 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। इन राहतों के कारण लगभग 41 लाख घरेलू उपभोक्ताओं पर बिजली दर वृद्धि का प्रभाव शून्य से लेकर मात्र 3.65 प्रतिशत तक ही होगा।

किसानों पर अतिरिक्त व्यय भार नहीं

राज्य के 8.65 लाख कृषि उपभोक्ताओं के लिए ऊर्जा प्रभार में 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है, लेकिन इसकी प्रतिपूर्ति राज्य शासन द्वारा सब्सिडी के रूप में किए जाने के कारण किसानों पर इसका अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। कृषि पंपों के स्थायी प्रभार को भी यथावत रखा गया है।

सौर ऊर्जा से हजारों परिवारों का बिल हुआ शून्य

ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित पीएम सूर्यघर योजना का छत्तीसगढ़ राज्य में तेजी से क्रियान्वयन किया जा रहा है। अब तक लगभग 66 हजार उपभोक्ता इस योजना का लाभ प्राप्त कर चुके हैं, जिनमें से 16 हजार परिवारों का बिजली बिल शून्य हो गया है। वर्तमान में लगभग 89 हजार घरों में सौर संयंत्र स्थापित करने का कार्य प्रगति पर है। राज्य सरकार ने आगामी वर्षों में 5 लाख घरों में सोलर प्लांट लगाने का लक्ष्य रखा है, जिससे बिजली उपभोग की लागत में कमी आएगी।

बिजली बिल समाधान योजना से मिली बड़ी राहत

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार द्वारा 12 मार्च 2026 से मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत बीपीएल, घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिलों में विशेष राहत प्रदान की जा रही है।

बीपीएल उपभोक्ताओं को मूल बकाया राशि में 75 प्रतिशत तथा संपूर्ण सरचार्ज में छूट दी जा रही है। वहीं घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को मूल राशि में 50 प्रतिशत तथा पूरे सरचार्ज में छूट का लाभ मिल रहा है। इसके साथ ही शेष राशि को अधिकतम 60 किस्तों में जमा करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। योजना के तहत अब तक 6 लाख बीपीएल, 1.5 लाख घरेलू तथा 33 हजार कृषि उपभोक्ताओं ने आवेदन किया है। लगभग 1328 करोड़ रुपये के बकाया देयकों का समाधान किया जा चुका है, जिसमें 749 करोड़ रुपये की राहत उपभोक्ताओं को दी गई है।

उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने पर भी जोर

राज्य में औद्योगिक निवेश और रोजगार को प्रोत्साहित करने के लिए स्टील उद्योगों को लोड फैक्टर पर मिलने वाली 25 प्रतिशत छूट को पूर्ववत जारी रखा गया है। इससे राज्य के उद्योग अन्य राज्यों की तुलना में प्रतिस्पर्धात्मक बने रहेंगे और उत्पादन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

आदिवासी क्षेत्रों के छात्रावासों को विशेष राहत

बस्तर एवं सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में संचालित छात्रावासों को गैर-घरेलू श्रेणी से घरेलू श्रेणी में शामिल कर विशेष राहत प्रदान की गई है। इससे इन संस्थानों के संचालन व्यय में कमी आएगी।

कम बिजली खर्च करने का नया अवसर

10 किलोवाट से अधिक भार वाले घरेलू, गैर-घरेलू, औद्योगिक तथा सार्वजनिक उपयोगिता उपभोक्ताओं को ऑफ-पीक समय (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) बिजली उपयोग पर 5 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी। वहीं पीक आवर्स में 5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क निर्धारित किया गया है। इससे उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत का बेहतर प्रबंधन करने का अवसर मिलेगा।

ऊर्जा अधोसंरचना को मजबूत करने बड़ा निवेश

राज्य सरकार बिजली उत्पादन और वितरण व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है। वर्तमान में 2×660 मेगावाट क्षमता के सुपरक्रिटिकल ताप विद्युत संयंत्र का कार्य प्रारंभ किया जा चुका है, जिसकी पहली इकाई मार्च 2029 तक शुरू होने की संभावना है। इसके अलावा मड़वा में 800 मेगावाट क्षमता के नए विद्युत संयंत्र की योजना पर भी कार्य चल रहा है।

आगामी वर्षों में 400/132 केवी के 4, 220/132 केवी के 17 तथा 132/33 केवी के 34 नए उपकेंद्र स्थापित किए जाएंगे। वहीं वितरण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 106 नए 33/11 केवी उपकेंद्रों का निर्माण जारी है तथा लगभग 300 अतिरिक्त उपकेंद्र स्थापित करने की योजना बनाई गई है।

उपभोक्ता हित और व्यवस्था दोनों का संतुलन

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती उत्पादन एवं वितरण लागत, पूर्व वर्षों के वित्तीय दायित्वों तथा विद्युत अधोसंरचना विस्तार की आवश्यकताओं को देखते हुए किया गया यह संशोधन सीमित दायरे का है। राज्य सरकार ने सब्सिडी, राहत योजनाओं और सौर ऊर्जा कार्यक्रमों के माध्यम से आम उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव न्यूनतम रखने का प्रयास किया है।