Home Blog Page 2

मंत्रि-परिषद की बैठक में विकास, तकनीकी नवाचार और किसान कल्याण के लिए 13 हजार 800 करोड़ रूपये की स्वीकृति

0

मंत्रि-परिषद की बैठक में विकास, तकनीकी नवाचार और किसान कल्याण के लिए 13 हजार 800 करोड़ रूपये की स्वीकृति
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में हुई। मंत्रि-परिषद की बैठक में मध्यप्रदेश के बुनियादी ढांचे, तकनीकी विकास और किसान कल्याण से जुड़े कार्यों के लिए लगभग 13 हजार 800 करोड़ रूपये की स्वीकृति के साथ कई बड़े एवं महत्वपूर्ण निर्णयों पर मुहर लगाई गई है। बैठक में भोपाल मेट्रो रेल परियोजना की संशोधित कुल लागत और अतिरिक्त वित्त पोषण को मिलाकर 13,565.84 करोड़ रूपये की पुनरीक्षित राशि की स्वीकृति दी गई। अब भोपाल शहर के यातायात नेटवर्क को बड़ा विस्तार मिलेगा। इसके साथ ही राज्य में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को सुदृढ़ करने के लिए आगामी 5 वर्षों 2026-2031 के लिए आई.टी. संवर्ग परामर्श सेवाओं और कार्य योजना के लिए 235 करोड़ 63 लाख रूपये स्वीकृत किए गए है।

कृषि और व्यापार जगत को गति देने के लिए मंत्रि-परिषद ने कपास पर मंडी फीस की दर को 1% से घटाकर 0.5% करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है, जिससे स्थानीय जिनिंग मिलों को मजबूती मिलेगी और रोजगार बढ़ेगा। किसान हित में सामान्य मंडी शुल्क को एक रूपये से बढ़ाकर एक रूपये 50 पैसे किया गया है। शुल्क के रूप में प्राप्त होने वाली 500 करोड़ रूपये की अनुमानित अतिरिक्त आय का उपयोग सीधे किसान सड़क निधि और कृषि अनुसंधान के विकास में किया जाएगा। आगामी रबी और खरीफ विपणन सत्रों में फसलों के सुचारू उपार्जन को सुनिश्चित करने के लिए MPSCSC और मार्कफेड को 8,600 करोड़ रूपये की निःशुल्क शासकीय प्रत्याभूति देने की भी बड़ी मंजूरी दी गई है। यह फैसले प्रदेश की आर्थिक और सामाजिक उन्नति की दिशा में सशक्त कदम साबित होंगे।

भोपाल मेट्रो की पुनरीक्षित लागत और अतिरिक्त वित्त पोषण के लिए 13,565.84 करोड़ रूपये की स्वीकृति
मंत्रि-परिषद ने भोपाल मेट्रो रेल परियोजना की मूल लागत 6,941.40 करोड़ में 3,092.22 करोड़ रूपये की अतिरिक्त लागत जोड़कर संशोधित कुल लागत 10,033.62 करोड़ रूपये के प्रस्ताव पर स्वीकृति प्रदान की है। मंत्रि-परिषद ने इसके अतिरिक्त उद्योग के स्वीकृत मानदंडों के अनुसार परियोजना के लिए अतिरिक्त वित्त पोषण के लिए 3,532 करोड़ 22 लाख रूपये की भी स्वीकृति प्रदान की है। इसमें भारत शासन और राज्य शासन द्वारा 995 करोड़ 9 लाख रूपये की अतिरिक्त इक्विटी और केन्द्रीय करों के लिए 84 करोड़ 54 लाख रूपये का अतिरिक्त अधीनस्थ ऋण, वित्तपोषण एजेंसी बैंकों से ऋण निधि के विरुद्ध 1,620 करोड़ 64 लाख रूपये का अतिरिक्त PTA/आंतरिक ऋण, मध्यप्रदेश शासन से भूमि की लागत और पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन के लिए 138 करोड़ 38 लाख रूपये का अतिरिक्त अधीनस्थ ऋण तथा मध्यप्रदेश शासन से राज्य करों के लिए 446 करोड़ 35 लाख रूपये एवं IDC की लागत के लिए 246 करोड़ 41 लाख रूपये का अतिरिक्त अनुदान शामिल है।

आई.टी. संवर्ग परामर्श सेवाओं और कार्य के लिए 235 करोड़ 63 लाख रूपये की स्वीकृति
मंत्रि-परिषद ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग अंतर्गत राज्य आई.टी. संवर्ग परामर्श सेवाओं के लिए अनुदान और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी कार्य योजना 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की अवधि तक निरंतर संचालन के लिए 235 करोड़ 63 लाख रूपये की स्वीकृति दी है।

स्वीकृति अनुसार राज्य आई.टी. संवर्ग परामर्श सेवाओं के लिए अनुदान योजना के लिए 180 करोड़ 20 लाख रूपये स्वीकृत किए गए हैं। योजना के अंतर्गत शासन के विभिन्न विभागों, निगमों, प्राधिकरणों एवं परियोजनाओं को तकनीकी परामर्श सेवाएँ प्रदान करने के लिए राज्य स्तरीय आई.टी. संवर्ग का गठन किया गया है। योजना से प्राप्त अनुदान का उपयोग विशेषज्ञों की नियुक्ति, प्रशिक्षण, क्षमता-विकास एवं विभागीय आवश्यकताओं के अनुरूप परामर्श सेवाओं के लिए किया जाता है। यह योजना वर्तमान में शासन की डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्रक्रिया की आधारभूत आवश्यकता है तथा भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमता (एआई), बिग डाटा एनालिटिक्स, ब्लॉक चेन तकनीक एवं सायबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में राज्य की तैयारियों को सुदृढ़ करने के लिए भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।

मंत्रि-परिषद द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी कार्य योजना के लिए 55 करोड़ 43 लाख रूपये स्वीकृत किए गए है। योजना से VBTC प्रशिक्षण केंद्र द्वारा अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आईटी, ई-गवर्नेस, सायबर सुरक्षा तथा डेटा प्रबंधन विषयों पर नियमित प्रशिक्षण प्रदान कर उनकी तकनीकी दक्षता और प्रशासनिक कार्य कुशलता में वृद्धि की जायेगी। एमपीएसईडीसी जैसी नोडल एजेंसियों को सहायक अनुदान उपलब्ध कराकर विभिन्न आईटी एवं ई-गवर्नेस परियोजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। राज्य, संभाग और जिला स्तर पर आयोजित कार्य शालाओं एवं सेमिनारों के माध्यम से विभागीय क्षमता संवर्धन तथा आईटी जागरुकता को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही ‘ई-गवर्नेस उत्कृष्टता पुरस्कार” के माध्यम से विभागों एवं अधिकारियों के नवाचारों को प्रोत्साहित किया जाएगा। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से मध्यप्रदेश को ई-गवर्नेस के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने में सहायता मिलेगी।

कपास पर मंडी फीस की दर 1% से घटाकर 0.5% करने का अनुमोदन
मंत्रि-परिषद ने कपास जिनिंग मिलों की आवश्यकता को देखते हुए कपास पर मंडी फीस की दर 1% से घटाकर 0.5% करने का अनुमोदन दिया है। प्रदेश में लगभग 158 कपास जिनिंग मिलें है, जिनकी प्रसंस्करण क्षमता लगभग 13 लाख मीट्रिक टन है। प्रदेश में कपास पर मंडी फीस की दर में कमी किए जाने से जिनिंग मिलों के द्वारा अन्य पड़ोसी राज्यों में पलायन की अपेक्षा प्रदेश में ही व्यवसाय करने को प्राथमिकता दी जाएगी जिससे रोजगार में तथा जी.एस.टी संग्रहण में वृद्धि होगी। जिनिंग मिलों की इनपुट लागत में कमी आएगी और उनकी आर्थिक व्यवहारिता में वृद्धि होगी। वे प्रतिस्पर्धात्मक बाजार में अपनी स्थिति सुदृढ़ बनाए रखने में सक्षम होगी।

एम.पी. स्टेट सिविल सप्लाईज कारपोरेशन और मार्कफेड को 8,600 करोड़ रूपये की निःशुल्क शासकीय प्रत्याभूति उपलब्ध कराए जाने की स्वीकृति
मंत्रि-परिषद द्वारा निर्णय लिया गया कि आगामी रबी विपणन वर्ष 2026 में गेहूँ उपार्जन और इसके बाद खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान एवं मोटे अनाजों के उपार्जन के दृष्टिगत विभिन्न बैंकों (शेडयूल्ड/राष्ट्रीयकृत/जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक), नाबार्ड, एवं सार्वजनिक वित्तीय संस्थाओं से धनराशि उधार लेने के लिए वर्तमान जारी वित्त व्यवस्थाओं की निरंतरता के लिए और आर.बी.आई अपेक्षा के अनुक्रम में ज्यादा ब्याज दर वाली खाद्यान्न साख सीमा के पुनर्भुगतान आदि परिदृश्यों को ध्यान में रखते हुए एम.पी. स्टेट सिविल सप्लाई कारपोरेशन लि. एवं मार्कफेड को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की द्वय खाद्यान्न साख सीमा के पुनर्भुगतान के लिए 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च मार्च 2027 तक के लिए 8,600 करोड़ रूपये की निःशुल्क शासकीय प्रत्याभूति उपलब्ध कराए जाने की स्वीकृति दी है। निःशुल्क शासकीय प्रत्याभूति में से समय समय पर MPSCSC और मार्कफेड के मध्य पुर्नआवंटन का अधिकार खादय विभाग म.प्र. शासन को प्रदान किये गए है।

इसके अलावा एम.पी. स्टेट सिविल सप्लाई कारपोरेशन लि. को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 (एक वर्ष) तक की अवधि के लिए 29,500 करोड़ रूपये की निःशुल्क शासकीय प्रत्याभूति उपलब्ध कराई गई है। शासकीय प्रत्याभूति से उपलब्ध राशि के अलावा बाकी राशि की वित्त व्यवस्था ज्यादा ब्याज दर वाली आर.बी.आई. द्वारा राज्य शासन को प्रदत्त खाद्यान्न साख सीमा से की जाएगी।

कृषक कल्याण के लिए मंडी शुल्क एक रुपये से 1.50 रुपये किए जाने का निर्णय — अब जिलों में कोल्डस्टोरेज, वेयर हाउस, प्रसंस्करण इकाईयों एवं लॉजिस्टिक सुविधाओं को मिलेगा प्रोत्साहन

मंत्रि-परिषद द्वारा मंडी शुल्क को एक रुपये के स्थान पर वृद्धि कर 1.50 रुपये किए जाने का निर्णय लिया है। इस राशि से जिलों में कोल्डस्टोरेज,वेयरहाउस प्रसंस्करण इकाईयों एवं लॉजिस्टिक सुविधाओं को प्रोत्साहन मिलेगा। इस शुल्क राशि में से 50 पैसे विपणन विकास निधि के अंश के रूप में किसानों के कल्याण में उपयोग किया जायेगा। निराश्रित शुल्क को यथावत् 20 पैसे रखा जायेगा। इस वृद्धि से इस वर्ष में लगभग 500 करोड़ रूपये की अतिरिक्त आय होना संभावित है। इस आय का उपयोग किसान सड़क निधि एवं कृषि अनुसंधान तथा अधोसंरचना विकास में किया जाएगा। किसान सड़क निधि ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण का अंश 20 पैसे, किसान सड़क निधि-मंडियो की मूलभूत संरचनाओं के लिए 10 पैसे, गौ-संवर्धन एवं संरक्षण निधि में 12 पैसे, मुख्यमंत्री कृषक जीवन कल्याण योजना के लिए 2 पैसे, प्रचार-प्रसार एवं कृषक सम्मेलन के लिए 1.75 पैसे और कृषि अनुसंधान एवं कृषि अधोसंरचना विकास निधि के लिए 4.25 पैसे का उपयोग किया जायेगा।

जयपुर पटाखा फैक्ट्री में आग से 8 लोगों की मौत

0

जयपुर पटाखा फैक्ट्री में आग से 8 लोगों की मौत
राजधानी जयपुर के खोह नागोरियान इलाके में मंगलवार (9 जून 2026) की सुबह अवैध रूप से संचालित हो रही पटाखा फैक्ट्री में आग लग गई. आग इतनी भीषण थी कि अंदर मौजूद लोगों को संभालने का मौका ही नहीं मिला और इस भीषण हादसे में 2 सगे भाइयों सहित आठ लोगों की मौत हो गई. इस अग्निकांड में कई लोग घायल भी हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. वहीं, हादसे में घायल दो लोगों की अब तक पहचान नहीं हो सकी है.

जानकारी के मुताबिक, यह भीषण हादसा खोह नागोरियान इलाके में मंगलवार की सुबह हुआ है, इस भीषण हादसे में मरने वालों में दो सगे भाई अजीम और बिलाल भी शामिल थे. अजीम इस अवैध पटाखा फैक्ट्री में काम करता था, वहीं बिलाल आज सुबह भाई की फैक्ट्री में काम देखने आया था, इसी दौरान यह हादसा हो गया.

अवैध रूप से संचालित हो रही थी पटाखा फैक्ट्री
भाजपा के लोगों ने बताया कि जिस मकान में अवैध पटाखा फैक्ट्री चल रही है, वह मोहम्मद याकूब नाम के व्यक्ति की है. साथ ही बिजली के बिल भी याकूब के नाम पर बताए जा रहे हैं, याकूब ने यह मकान दिल्ली के रहने वाले फिरोज को दे रखा है. बीजेपी नेताओं की तरफ से दावा किया गया है कि फिरोज और उसका दोस्त वसीम यहां अवैध पटाखा फैक्ट्री चलाते हैं, पटाके यहां तैयार होने के बाद दिल्ली भेजे जाते हैं.

पुलिस और प्रशासन पर खड़े हुए सवाल
इस घटना के बाद पुलिस और जिला प्रशासन पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं. लापरवाही के चलते यह बड़ी घटना हुई, जिसमें अब तक आठ लोगों की मौत हो चुकी है. अमूमन रिहायशी इलाकों में इस तरह पटाखा फैक्ट्री नहीं चलायी जा सकती तो आखिर यह किसकी शह पर चल रही थी. आस पास के लोगों ने बताया कि कई बार यहां पुलिस भी आती है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती.

विधायक ने अमीन कागजी ने की मुआवजा दिए जाने की मांग
वहीं, घटना के बाद किशनपोल विधायक अमीन कागजी ने जिला प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि मरने वाले परिवारों को मुआवजा मिलना चाहिए, साथ ही जो जिम्मेदार लोग हैं उन पर कार्रवाई हो.

परम एकादशी पर ऐसे करें शालिग्राम जी का अभिषेक,धन-धान्य से भर जाएगा घर

0

परम एकादशी पर ऐसे करें शालिग्राम जी का अभिषेक,धन-धान्य से भर जाएगा घर
वैदिक पंचांग के अनुसार, 11 जून को परम एकादशी व्रत किया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को विधिपूर्वक करने से साधक को जीवन में सभी सुख मिलते हैं और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। इस दिन भगवान शालिग्राम का अभिषेक करने का विधान है।

ऐसा माना जाता है कि भगवान शालिग्राम की साधना करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
अभिषेक के लिए आवश्यक सामग्री
गाय का कच्चा दूध, शहद, शक्कर, शुद्ध घी, दही, गंगाजल, शुद्ध जल, गोपी चंदन, तुलसी दल, फूलमाला, घी का दीपक, अभिषेक के लिए तांबे या पीतल की थाली, फल और मिठाई।

शालिग्राम जी के पंचामृत अभिषेक की विधि
एकाशी के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें।
सच्चे मन से एकादशी व्रत और भगवान विष्णु की पूजा का संकल्प लें।
मंदिर की सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव कर शुद्ध करें।
इसके बाद एक बर्तन में दूध, दही, घी, शहद और शक्कर मिला लें।
पंचामृत में तुलसी के पत्ते जरूर शामिल करें।
एक थाली में भगवान शालिग्राम को विराजमान करें।
सबसे पहले शुद्ध जल अर्पित करें।
इस दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप करें।
अब पंचामृत से भगवान शालिग्राम का अभिषेक करें।
साफ जल से स्नान कराएं।
उन्हें पीले वस्त्र अर्पित करें।
गोपी चंदन का तिलक लगाएं और फूलमाला अर्पित करें।
देसी घी का दीपक जलाएं और आरती करें।
जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए प्रभु से प्रार्थना करें।
फल और मिठाई का भोग लगाएं।
आखिरी में लोगों में प्रसाद का वितरण करें और स्वयं भी ग्रहण करें।
इन बातों का रखें ध्यान
शालिग्राम जी की पूजा में अक्षत को शामिल नहीं करना चाहिए।
पूजा में तुलसी के पत्ते जरूर शामिल करें।
काले रंग के कपड़े धारण न करें।
पूजा के दौरान किसी के बारे में गलत न सोचें और किसी से वाद-विवाद न करें।
कब से शुरू होगी एकादशी तिथि?
वैदिक पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि की शुरुआत 11 जून को रात 12 बजकर 57 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन 11 जून को रात 10 बजकर 36 मिनट पर होगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एवं शिकायत प्रबंधन प्रणाली का अवलोकन

0

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एवं शिकायत प्रबंधन प्रणाली का अवलोकन
मुख्यमंत्री ने हेल्पलाइन सेंटर में पहुंचकर शिकायतों के पंजीयन, उनकी निगरानी एवं समाधान की प्रक्रिया का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से चर्चा करते हुए शिकायतों के त्वरित निराकरण, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की प्राथमिकता प्रत्येक नागरिक की समस्या का समयबद्ध और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है।

मुख्यमंत्री ने सीएम हेल्पलाइन पर कॉलर पूनाराम ठाकरे से की बात
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज सीएम हेल्पलाइन सेंटर के शुभारंभ के अवसर पर सीएम हेल्पलाइन की कार्यप्रणाली अवलोकन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने हेल्पलाइन पर कॉल करने वाले कॉलर पूना राम ठाकरे से खुद बात की और उनका नाम, निवास तथा समस्या की जानकारी ली । मुख्यमंत्री को ठाकरे ने बताया कि वे रायपुर के रहने वाले हैं और उन्होंने आय प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था जिसके संबंध में शिकायत दर्ज कराने उन्होंने हेल्पलाइन में कॉल किया है। मुख्यमंत्री ने कॉल पर ठाकरे को आश्वस्त किया कि जल्द ही उनकी समस्या का निराकरण हो जाएगा।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री साय एवं अन्य मंत्रियों ने हेल्पलाइन के माध्यम से जुड़े हितग्राहियों से बातचीत भी की। उन्होंने नागरिकों की समस्याओं और सुझावों को सुना तथा संबंधित मामलों के त्वरित निराकरण का आश्वासन दिया। हितग्राहियों ने भी अपनी समस्याओं को सीधे शासन तक पहुंचाने के लिए इस व्यवस्था की सराहना की।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एवं शिकायत प्रबंधन प्रणाली राज्य के सभी विभागों को एकीकृत रूप से जोड़ने वाली व्यवस्था है। इसमें 1,200 से अधिक शिकायत श्रेणियां तथा लगभग 8,000 अधिकारियों को चार प्रशासनिक स्तरों पर मैप किया गया है। ब्लॉक स्तर से लेकर राज्य स्तर तक बहु-स्तरीय एस्केलेशन प्रणाली के माध्यम से शिकायतों के समाधान की सतत निगरानी की जाती है।

मुख्यमंत्री ने हेल्पलाइन संचालन में कार्यरत युवाओं से भी संवाद किया और उनके कार्यों की जानकारी प्राप्त की। इस दौरान बताया गया कि इस व्यवस्था के संचालन में स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे सेवा गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिला है।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को प्रणाली के अंतर्गत उपलब्ध एमआईएस डैशबोर्ड, शिकायत विश्लेषण प्रणाली तथा विभिन्न विभागों के प्रदर्शन मूल्यांकन संबंधी व्यवस्थाओं की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया को सुशासन का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए शिकायतों के विश्लेषण के आधार पर व्यवस्थागत सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह व्यवस्था केवल शिकायत निवारण तक सीमित नहीं है, बल्कि शासन और जनता के बीच संवाद को मजबूत बनाने का एक प्रभावी माध्यम है। इसके माध्यम से नागरिकों की समस्याओं को प्राथमिकता के साथ सुनकर उनका समाधान सुनिश्चित किया जा सकेगा तथा प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सीएम हेल्पलाइन 1076 का शुभारंभ किया

0

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सीएम हेल्पलाइन 1076 का शुभारंभ किया
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में राज्य की बहुप्रतीक्षित सीएम हेल्पलाइन 1076 का बटन दबाकर शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने सीएम हेल्पलाइन प्रणाली के आधिकारिक लोगो का भी विमोचन किया। कार्यक्रम में मंत्रिपरिषद के सदस्यगण तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारीगण उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक की समस्या सुनी जाए, उसका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए तथा शासन-प्रशासन को और अधिक जवाबदेह बनाया जाए। उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार के दौरान प्रदेशभर से प्राप्त शिकायतों, सुझावों और जनप्रतिसाद ने एक प्रभावी, सशक्त एवं स्थायी जनसंपर्क तंत्र की आवश्यकता को रेखांकित किया। इसी सोच के साथ सीएम हेल्पलाइन प्रणाली विकसित की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब प्रदेशवासी टोल फ्री नंबर 1076 पर अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे, सुझाव दे सकेंगे तथा शासन की योजनाओं और सेवाओं के संबंध में फीडबैक भी साझा कर सकेंगे। यह प्रणाली सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को नई मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ जनता और शासन के बीच विश्वास के रिश्ते को और सशक्त बनाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि डिजिटल युग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए हेल्पलाइन को व्हाट्सएप प्लेटफॉर्म से भी जोड़ा गया है, जिससे नागरिक मोबाइल के माध्यम से आसानी से अपनी बात सरकार तक पहुंचा सकेंगे। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली अपने व्यापक दायरे के कारण विशेष महत्व रखती है। इसमें राज्य शासन के 42 विभागों के लगभग 8 हजार अधिकारी जुड़े हुए हैं तथा 1195 श्रेणियों में निर्धारित समय-सीमा के भीतर शिकायतों के निराकरण की व्यवस्था की गई है।

उन्होंने बताया कि प्रत्येक शिकायत को एक यूनिक आईडी प्रदान की जाएगी, जिससे आवेदक अपने आवेदन की स्थिति को ऑनलाइन ट्रैक कर सकेगा। यदि किसी शिकायतकर्ता को प्राप्त समाधान से संतोष नहीं होगा, तो संबंधित शिकायत स्वतः उच्च अधिकारियों के पास पुनः परीक्षण एवं जांच के लिए अग्रेषित हो जाएगी। इससे शिकायतों के सतही निराकरण की संभावना समाप्त होगी और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन प्रणाली 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन संचालित रहेगी। इसके संचालन के लिए तीन शिफ्टों में कर्मचारियों की तैनाती की गई है। सचिव स्तर के अधिकारी डैशबोर्ड के माध्यम से इसकी नियमित निगरानी करेंगे, वहीं मुख्यमंत्री सचिवालय भी इसकी सतत मॉनिटरिंग करेगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन केवल शिकायत निवारण का माध्यम नहीं है, बल्कि जनभागीदारी को सशक्त बनाने का एक प्रभावी मंच भी है। प्रदेशवासी राज्य के विकास से जुड़े अपने सुझाव भी इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से साझा कर सकेंगे, जिससे नीति निर्माण और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में सहायता मिलेगी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “नागरिक देवो भव” के मंत्र को आत्मसात करते हुए राज्य सरकार डिजिटल गवर्नेंस को लगातार मजबूत बना रही है। सीएम हेल्पलाइन शासन और जनता के बीच संवाद को और अधिक प्रभावी बनाएगी तथा समस्याओं के त्वरित समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के सचिव एवं सचिव, सुशासन एवं अभिसरण विभाग राहुल भगत ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से सीएम हेल्पलाइन प्रणाली की कार्यप्रणाली, उद्देश्यों और विशेषताओं की विस्तार से जानकारी दी।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव एवं विजय शर्मा, मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यगण, मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल सहित वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

टीवी के बाद ओटीटी पर राज करेंगी Ekta Kapoor

0

टीवी के बाद ओटीटी पर राज करेंगी Ekta Kapoor
4 साल पहले छोटे पर्दे की मशहूर निर्माता एकता कपूर का रियलिटी शो लॉक अप आया था, जिसे अभिनेत्री कंगना रनौत ने होस्ट किया था। कुछ महीने पहले ये खबर सामने आई थी कि मेकर्स लॉक अप सीजन 2 (Lock UPP 2) की तैयारी में लगे हुए हैं और अब इसका कन्फर्मेशन भी आ गया है।

लॉक अप 2 का आधिकार एलान हो गया है और शो की रिलीज डेट भी सामने आ गई है। ऐसे में आइए जानते हैं कि एकता कपूर का ये रियलिटी शो नए सीजन के साथ कब और कहां ऑनलाइन स्ट्रीम होने जा रहा है।

कब और कहां आएगा लॉक अप 2
लॉक अप सीजन 2 की ऑफिशियल अनाउंसमेंट के साथ ही फैंस की एक्साइटमेंट सातवें आसमान पर पहुंच गई है और वे इसकी रिलीज का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। गौर करें लॉक अप 2 की ओटीटी रिलीज की तरफ तो मंगलवार को मशहूर ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स इंडिया की तरफ से एकता कपूर लॉक अप 2 की आधिकारिक घोषणा गई है।

इसके साथ ही नेटफ्लिक्स के एक्स हैंडल पर लॉक अप 2 का पहला प्रोमो वीडियो भी सामने आया है, जिसमें दिल्ली, मुंबई और लखनऊ जैसे फेमस शहरों की सड़कों पर कुछ लोग हाथों में हथकड़ी, शरीर पर लाल कपड़े और चेहरे पर लाल मास्क पहने हुए घूमते हुए नजर आ रहे हैं। उनके साथ कुछ सिक्योरिटी गार्ड्स भी दिख रहे हैं, जो बॉकी टॉकी और लॉक प्रिटेंट जैकेट को पहने हुए हैं।

दुनिया के दो स्‍टेडियम की पिचों से नाखुश हुआ ICC

0

दुनिया के दो स्‍टेडियम की पिचों से नाखुश हुआ ICC
इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच हुए लॉर्ड्स टेस्ट की पिच से आईसीसी नाखुश है। उन्होंने लंदन में हुए इस टेस्ट की पिच को असंतोषजनक बताते हुए एक डीमेरिट पाइंट भी दिया है।

आईसीसी ने यही फैसला गद्दाफी स्टेडियम की पिच पर भी सुनाया है। लाहौर के इस स्टेडियम में पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के बीच सीरीज का तीसरा वनडे मैच खेला गया था। इस पिच को भी असंतोषजनक बताते हुए इसे भी एक डीमेरिट पाइंट दिया गया।

रिपोर्ट में क्‍या बताया गया
लार्ड्स मामले में रिपोर्ट मैच रेफरी एंडी पायक्राफ्ट ने बनाई थी जबकि गद्दाफी स्टेडियम में ये काम ग्रेम ला ब्रूय ने किया। इन रिपोर्टों में मैच अधिकारियों और कप्तानों द्वारा जताई गई चिंता भी शामिल थी।

पायक्राफ्ट ने लिखा कि लार्ड्स की पिच में पूरे टेस्ट के दौरान बहुत ज्यादा सीम मूवमेंट देखने को मिला। कई बार गेंद बहुत ज्यादा नीची भी रही। पिच की वजह से बल्ले के मुकाबले गेंद का पलड़ा बहुत ज्‍यादा भारी हो गया था।

ममता सरकार के फैसले को बदलेंगे CM शुभेन्दु अधिकारी

0

ममता सरकार के फैसले को बदलेंगे CM शुभेन्दु अधिकारी
पश्चिम बंगाल की कमान संभालने के बाद शुभेन्दु अधिकारी एक के बाद एक बड़े फैसले ले रहे हैं। मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने हाल ही सीबीआई को जांच के लिए खुली छुट दी है। इसी कड़ी में उन्होंने एक और बड़ा फैसला लिया है। सीएम शुभेन्दु अब ममता बनर्जी की सरकार के फैसला बदलने जा रहे हैं। बता दें कि तत्कालीन बंगाल सरकार ने दीघा में जगन्नाथ मंदिर की स्थापना और उद्घाटन किया था। उसका नाम ‘जगन्नाथ धाम’ रखा गया था। अब बीजेपी सरकार इसका नाम बदलने जा रही है।

‘हम धाम शब्द हटाएंगे, पूजा-अर्चना जारी रहेगी’
पुरबा मेदिनीपुर में मीडिया से करते हुए शुभेन्दु ने कहा कि मैं इस पत्र को स्वीकार कर रहा हूं। मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि तत्कालीन सरकार ने इसे सांस्कृतिक केंद्र के रूप में मान्यता दी थी। हम ‘धाम’ शब्द हटा देंगे। सांस्कृतिक केंद्र परिसर बना रहेगा और पूजा-अर्चना जारी रहेगी। पूरा परिसर मंदिर के रूप में कार्य करेगा, लेकिन ‘धाम’ शब्द हटा दिया जाएगा। मुझे भी लगता है कि पिछली सरकार ने जनता की भावनाओं की अनदेखी की थी।

‘धाम’ नाम पर जताई गई थी आपत्ति
हावड़ा में भाजपा सांसद संबित पात्रा ने मामले में मीडिया से बात की। संबित पात्रा ने कहा कि सभी को पता है कि अप्रैल 2025 में तत्कालीन बंगाल सीएम ममता बनर्जी ने दीघा में जगन्नाथ मंदिर की स्थापना और उद्घाटन किया था। उसका नाम ‘जगन्नाथ धाम’ रखा गया था। उन्होंने आगे कहा कि हमें जगन्नाथ मंदिरों के प्रचार या विस्तार पर कोई आपत्ति नहीं है। उस समय भी हमारे मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी और हम सभी ने ‘धाम’ नाम के इस्तेमाल की आलोचना की थी।

जमीन से आसमान तक अभेद सुरक्षा, 12 परमाणु हथियार पहली बार तैनात

0

जमीन से आसमान तक अभेद सुरक्षा, 12 परमाणु हथियार पहली बार तैनात
न्यूक्लियर सबरमरीन पर तैयार रखा है. हाल ही में जारी SIPRI की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के पास करीबन 190 न्यूक्लियर हथियार हैं. पिछले कुछ सालों में इनमें इजाफा भी हुआ है.

यह बदलाव भारत के न्यूक्लियर ट्रायड यानी हवाई, जमीन और समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम है. भारत मिसाइलों को कैनिस्टर और समुद्री डिटरेंस पेट्रोलिंग जैसे फैसले भी ले रहा है. भारत का न्यू्क्लियर कार्यक्रम हमेशा से रक्षा करने का रहा है. हमला का नहीं रहा है.

क्या बदल गई नीति?
अब सवाल उठ रहा है कि भारत की नीति बदल गई है, तो ऐसा नहीं है. भारत की न्यूक्लियर पॉलिसी नो फर्स्ट यूज पर आधारित है. ऐसे में भारत कभी भी न्यूक्लियर अटैक पहले नहीं करेगा. ये हमला सिर्फ जवाबी कार्रवाई होगी. यानी अगर कोई देश भारत पर न्यूक्लियर हमला करता है, तो उसपर यह हमला किया जाएगा. इसका मकसद सिर्फ दुश्मनों को रोकना है.

परमाणु हथियारों पर भारी खर्च कर रहे अमेरिका और चीन, भारत ने भी बढ़ाया
परमाणु हथियारों पर भारत भारी खर्च कर रहा है. इंटरनेशनल कैंपेन टू एबोलिश न्यूक्लियर वेपन्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2025 में एटमिक वेपन पर होने वाला वैश्विक खर्च अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. इस में दावा किया गया है कि भारत ने भी एटमिक वेपन्स पर अपना खर्च बढ़ाया है. खुल खर्च के मामले में चीन से काफी पीछे और अमेरिका से बहुत पीछे हैं. आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में दुनिया में परमाणु हथियारों पर कुल मिलाकर 119 अरब डॉलर खर्च हो चुका है.

मध्य प्रदेश सरकार ने हटाया दो बच्चों की सीमा वाला प्रस्ताव

0

मध्य प्रदेश सरकार ने हटाया दो बच्चों की सीमा वाला प्रस्ताव
मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी से जुड़े नियमों को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। दरअसल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दो बच्चों की अधिकतम सीमा से जुड़े प्रस्तावित नियम को निरस्त करने के निर्देश दिए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा तैयार किए गए प्रारूप में दो से अधिक जीवित संतान वाले उम्मीदवारों को शासकीय सेवा के लिए अपात्र मानने का प्रावधान रखा गया था। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद इस प्रारूप को तत्काल प्रभाव से पोर्टल से हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

दरअसल सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, अब नया संशोधित प्रारूप तैयार किया जाएगा। इसमें दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवारों को सरकारी नौकरी से अपात्र मानने वाला प्रावधान शामिल नहीं रहेगा। यह फैसला मुख्यमंत्री द्वारा मामले का संज्ञान लेने के बाद लिया गया है।

जानिए क्या था पुराना प्रावधान?
जानकारी दे दें कि मध्य प्रदेश में यह नियम पहली बार साल 2001 में लागू किया गया था। उस समय की सरकार ने फैसला लिया था कि 26 जनवरी 2001 या उसके बाद दो से अधिक जीवित संतान वाले उम्मीदवार सरकारी नौकरी के लिए पात्र नहीं माने जाएंगे। यह नियम मध्यप्रदेश सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्तें) नियम, 1961 के तहत लागू किया गया था।

इसके अलावा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 में भी दो से अधिक बच्चों को कदाचार की श्रेणी में रखा गया था। इसका असर सीधी भर्ती और कुछ विभागीय नियुक्तियों पर पड़ता था। हाल ही में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा प्रस्तावित नए प्रारूप में भी इस प्रावधान को शामिल किया गया था। दरअसल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मामले में निर्देश देते हुए कहा है कि प्रस्तावित प्रारूप को तत्काल निरस्त किया जाए। इसके साथ ही विभाग को आदेश दिए गए हैं कि वर्तमान ड्राफ्ट को पोर्टल से हटाकर नया प्रारूप विधिवत प्रकाशित किया जाए।

सरकार का नया आदेश
वहीं सामान्य प्रशासन विभाग को दिए गए निर्देशों में साफ कहा गया है कि दो से अधिक जीवित संतान होने के आधार पर सरकारी नौकरी से अपात्र घोषित करने वाले नियमों को नए प्रारूप से हटाया जाए। इसके बाद विभाग अब नए संशोधित नियम तैयार करेगा। दरअसल सरकार के फैसले के बाद अब पुराना प्रारूप पोर्टल से हटाया जा रहा है। नए ड्राफ्ट में भर्ती और सेवा नियमों से जुड़े संशोधित प्रावधान शामिल किए जाएंगे। फिलहाल सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि दो बच्चों की अधिकतम सीमा वाला प्रस्तावित नियम लागू नहीं किया जाएगा।