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38 साल बाद भी नहीं हो सका भोपाल गैस पीड़ितों के हितों का फैसला

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भोपाल। विश्व की बड़ी औद्योगिक दुर्घटनाओं में शामिल भोपाल गैस त्रासदी हो या फिर दतिया जिले की सिंध नदी के पुल पर भगदड़ और झाबुआ के पेटलावद में विस्फोट से 90 से ज्यादा लोगों की मौत। आयोग गठित हुए, जांच हुई, रिपोर्ट विधानसभा पटल पर रखी और सरकार कार्रवाई करना भूल गई। ऐसे एक दर्जन से ज्यादा मामले हैं। जिनमें पीड़ितों को अब भी न्याय का इंतजार है और विभिन्न् आयोग की फाइलें अलमारियों में कैद होकर रह गई हैं।

भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से 38 साल पहले जहरीली गैस रिसी थी, जिससे हजारों लोगों की मौत हुई थी। मामले की जांच के लिए अगस्त 2010 में न्यायमूर्ति एसएल कोचर की अध्यक्षता में आयोग गठित हुआ। जांच शुरू हुई। फरवरी 2015 को आयोग ने यह रिपोर्ट शासन को सौंप दी।

तब से अब तक गैस राहत विभाग इस रिपोर्ट पर मंथन कर रहा है। मामले में आयोग की रिपोर्ट तक पूरी तरह से सामने नहीं आई। यह इकलौता मामला नहीं है। एक दर्जन से ज्यादा गंभीर घटनाओं में सरकार की कार्रवाई ऐसी ही चल रही है। इन सभी मामलों में संबंधित आयोग अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप चुके हैं। कई मामलों की रिपोर्ट विधानसभा पटल पर रखी जा चुकी है पर कार्रवाई का इंतजार अब भी है।

मामले उछलते और ठंडे पड़ जाते हैं

इनमें से कुछ मामले राजनीतिक जरूरत का विषय हैं। इसलिए मौके-मौके पर उठते रहते हैं। विपक्ष जब मामला उठाता है, कुछ दिन चर्चा चलती हैं। अलमारी खुलती है, कैद फाइलों को रोशनी देखने को मिलती है और चंद दिनों में मामला ठंडा पड़ जाता है। आखिर फाइलें आमतौर पर जहां रहती हैं, वहीं पहुंच जाती हैं।

जांच और प्रतिवेदन तक पहुंचे मामले

– वर्ष 2006 में दतिया जिले के रतनगढ़ देवी मंदिर जाते हुए सिंध नदी के पुल पर भगदड़ से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी। जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुशील पाण्डेय की अध्यक्षता में अक्टूबर 2006 में आयोग गठित हुआ। जिसने मार्च 2007 में रिपोर्ट सौंप दी। दूसरी घटना अक्टूबर 2013 में हुई थी। इसकी अलग जांच कराई। जुलाई और दिसंबर 2014 में दोनों जांच प्रतिवेदन विधानसभा पटल पर रखे गए।

– सामाजिक सुरक्षा पेंशन, राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन में अनियमित्ताओं की जांच के लिए फरवरी 2008 में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति एनके जैन की अध्यक्षता में आयोग गठित हुआ। आयोग ने सितंबर 2012 को रिपोर्ट सौंप दी। सामाजिक न्याय विभाग इस पर अब भी मंथन कर रहा है।

– झाबुआ जिले के पेटलावद में सितंबर 2015 में चाय की गुमठी में गैस सिलेंडर फटने से 90 लोगों की मौत हुई थी। घटना के तीन दिन बाद सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति आर्येन्द्र कुमार सक्सेना को जांच सौंपी गई। उन्होंने दिसंबर 2015 में रिपोर्ट सौंप दी, जो अप्रैल 2016 से गृह विभाग में है।

– भोपाल केंद्रीय जेल से आठ कैदियों के भागने की जांच नवंबर 2016 में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति एसके पाण्डे को सौंपी गई। उन्होंने अगस्त 2017 में रिपोर्ट सौंप दी। जून 2018 में प्रतिवेदन विधानसभा पटल पर रखा जा चुका है।

– मंदसौर के पिपल्यामंडी में किसान आंदोलन के दौरान जून 2017 में पुलिस की गोली से पांच किसानों की मौत के मामले की जांच सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति जेके जैन को सौंपी थी। उन्होंने जून 2018 में रिपोर्ट सौंप दी। जिसे तुरंत कार्रवाई के लिए गृह विभाग को भेज दी गई। तब से वहीं पड़ी है।

मानव निर्मित ऑब्जेक्ट ने पहली बार सूर्य के वायुमंडल में किया प्रवेश

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दिसंबर 1903 में जब पहली बार राइट बंधुओं ने हवाई जहाज उड़ाया था, तब शायद किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि हवाई जहाज की उड़ान भरते के लगभग 100 साल बाद ही मानव निर्मित को ऑब्जेक्ट सूर्य को भी छू लेगा। लेकिन इंसान की जिज्ञासा ने इसे सच साबित कर दिया है। नासा के महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट का हिस्सा रहे Parker Solar Probe ने सूर्य के ऊपरी वायुमंडल को छूकर इतिहास रच दिया है।

सूर्य के कोरोना में घुसा Parker Solar Probe

खगोल वैज्ञानिकों के मुताबिक सूर्य की सबसे बाहरी परत को कोरोना कहा जाता है और नासा द्वारा भेजे गए अंतरिक्ष यान Parker Solar Probe ने कोरोना में सफलतापूर्वक प्रवेश कर लिया है।
सूर्य के अध्ययन के लिए मिलेगी अहम जानकारी
Parker Solar Probe ने कोरोना में स्थित कणों और चुंबकीय क्षेत्र के सैंपल इकट्ठा करना शुरू कर दिया है। साथ ही इन सैंपल को धरती पर भेजना भी शुरू कर दिया है। अब वैज्ञानिकों को प्राप्त इस डेटा से सूर्य के अध्ययन में काफी सहायता मिलेगी। नासा के विज्ञान मिशन निदेशालय के सहयोगी प्रशासक थॉमस ज़ुर्बुचेन ने कहा कि पार्कर सोलर प्रोब ‘टचिंग द सन’ सौर विज्ञान के लिए एक महत्वपूर्ण पल है और अंतरिक्ष विज्ञान के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है।
साल 2018 में लॉन्च किया गया था Parker Solar Probe
नासा ने Parker Solar Probe को साल 2018 में लॉन्च किया था, जिसका काम सूर्य की बाहरी परतों का अध्ययन करना था। Parker Solar Probe का नाम अमेरिकी सौर खगोल वैज्ञानिक यूजीन पार्कर के नाम पर रखा गया। यह अंतरिक्ष यान हमारे सूर्य के रहस्यों को जानने के लिए काम कर रहा है। Parker Solar Probe किसी भी अन्य अंतरिक्ष यान की तुलना में 7 गुना अधिक गति से उड़ान भरता है।
Parker Solar Probe पर लगी है 4.5 मोटी कार्बन परत
नासा ने जानकारी दी है कि Parker Solar Probe को सूर्य की भयावह गर्मी से बचाने के लिए 4.5 इंच मोटी कार्बन के परत से कवर किया गया है। Parker Solar Probe अंतरिक्ष यान करीब 1,377 डिग्री सेल्सियस तक के बाहरी तापमान को सहन कर सकता है

सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी को खारिज किया

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ग्वालियर। सुप्रीम कोर्ट से राज्य शासन को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उस एसएलपी (स्पेशल लीव पिटीशन) को खारिज कर दिया, जिसमेे नगर निमग के महापौर व नगर पालिका, नगर पंचायत के अध्यक्ष पद के आरक्षण पर हाई कोर्ट के स्टे को चुनौती दी थी। इस एसएलपी के खारिज होने के बाद अब मामला फिर से हाई कोर्ट में सुना जाएगा।

हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में नगर निगम के महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष व नगर पंचायत अध्यक्षों के आरक्षण को चुनौती देने के लिए अलग-अलग नौ जनहित याचिकाएं दायर की गई थी। युगलपीठ में सभी जनहित याचिकाओं को एक साथ सुना जा रहा है। कोर्ट ने 12 मार्च 2021 को अंतरिम आदेश पारित करते हुए दो नगर निगम, 79 नगर पालिका, नगर परिषद के आरक्षण की प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने राज्य शासन से जवाब मांगा था। राज्य शासन ने अपने जवाब में आरक्षण की प्रक्रिया को सही बताया था। लेकिन ये याचिकाएं जबलपुर की प्रिसिंपल बैंच में स्थानांतरित हो गई हैं। राज्य शासन ने हाई कोर्ट के समक्ष तर्क दिया था कि सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर दी है। कोर्ट ने रोक बरकरार रखते हुए याचिकाओं की तारीख बढ़ा दी और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को राज्य शासन की एसएलपी पर सुनवाई हुई। एसएलपी को खारिज कर दिया। इस एसएलपी के खारिज होने से अब हाई कोर्ट अंतिम फैसला होगा है। हाई कोर्ट में सुनवाई होने से नगरीय निकाय के आरक्षण पर भी जल्द फैसला हो सकता है। क्योंकि कोर्ट के स्टे के कारण नगरीय निकाय के चुनाव नहीं हो पा रहे हैं।

फैक्ट फाइल

– 79 नगर पालिका व नगर परिषद के आरक्षण पर रोक ली है।

– 2 नगर निगम के महापौर के आरक्षण पर रोक लगी है।

– हाई कोर्ट ने 10 दिसंबर 2020 की अधिसूचना पर रोक लगाई है।

रोटेशन की प्रक्रिया का होना था पालन

– याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट में तर्क दिए थे कि महापौर व नगर पालिका, नगर परिषद के अध्यक्ष पद के आरक्षण में रोटेशन प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। जो नगर निगम व नगर पालिका के अध्यक्ष पद लंबे समय से आरक्षित हैं। इस कारण दूसरे लोगों को चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिल पा रहा है। आरक्षण के रोस्टर का पालन करना चाहिए।

– रवि शंकर बंसल ने डबरा नगर पालिका के अध्यक्ष पद के आरक्षण को चुनौती दी थी। इस याचिका में स्टे आदेश आने के बाद 8 याचिकाएं और आ गईं। मनवर्धन सिंह की जनहित याचिका में 2 निगम व 79 नगर पालिका व नगर परिषद के आरक्षण पर रोक लगा दी। राज्य शासन ने इन दोनों याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

पंचायत चुनाव में आरक्षण का फैसला अब हाईकोर्ट करेगा

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भोपाल। मध्य प्रदेश के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के आरक्षण पर अब निर्णय हाईकोर्ट, जबलपुर करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट में अपील करने का निर्देश दिया है। इस पर सुनवाई गुरुवार को होगी। इसके लिए नए सिरे से अपील दायर करनी होगी।

कांग्रेस के सैयद जाफर और जया ठाकुर ने त्रिस्तरीय पंचायत (जिला, जनपद और ग्राम पंचायत) का चुनाव 2014 के आरक्षण से कराने के विरुद्ध दायर याचिका की थी। याचिकाकर्ता जाफर ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले को सुना और कहा कि एक विषय को दो न्यायालय द्वारा नहीं सुना जा सकता है।

इसे हाईकोर्ट ने देख लिया है, इसलिए आप मप्र पंचायतराज एवं ग्राम स्वराज संशोधन अध्यादेश 2021 को हाईकोर्ट में चुनौती दीजिए। इस मामले में तत्काल सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था के बाद हाईकोर्ट में अपील करने की तैयारी कर ली गई है। बीस दिसंबर तक नामांकन पत्र स्वीकार किए जाएंगे। इस याचिका में राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए अध्यादेश को चुनौती दी गई थी।

याचिकाकर्ता सैयद जाफर ने अध्यादेश को चुनौती देते हुए कहा कि यह संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। संविधान में हर पांच साल के बाद आरक्षण नए सिरे से किए जाने का प्रविधान है। जबकि अध्यादेश के माध्यम से 2014 के आरक्षण को आधार मानकर राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव की अधिसूचना जारी की गई है।

रोहित शर्मा की कप्तानी में नहीं खेलना चाहते विराट कोहली? साउथ अफ्रीका सीरीज से नाम लिया वापस

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हाल ही में बीसीसीआई (BCCI) ने विराट कोहली (Virat Kohli) की जगह रोहित शर्मा (Rohit Sharma) को वनडे का कप्तान बना दिया है। जिसके बाद से टीम में विवाद की खबरें सामने आ रही हैं। खबर है कि कोहली क्रिकेट बोर्ड के फैसले से नाराज हैं। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में होने वाली वनडे सीरीज से अपना नाम वापस ले लिया है। एक अंग्रेजी अखबार के अनुसार विराट ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ श्रृंखला से नाम वापस ले लिया है। उन्होंने खुद को अनुपलब्ध बताया है।

रोहित की कप्तानी में नहीं खेलना चाहते विराट

इससे यह साफ है कि रोहित शर्मा की कप्तानी में विराट कोहली खेलते हुए नजर नहीं आएंगे। टीम इंडिया का दक्षिण अफ्रीका दौरा 26 दिसंबर से शुरू होगा। जहां उसे तीन टेस्ट मैच और इतने ही वनडे खेलने हैं। 19 जनवरी को भारत और अफ्रीका के बीच पहला वनडे मुकाबला होगा। रिपोर्ट के मुताबिक विराट अपनी बेटी वामिका का पहला बर्थडे मनाने के लिए वक्त निकाल रहे हैं।

वनडे सीरीज से नाम वापस

वामिका जन्म साल 11 जनवरी 2021 को हुआ था। दरअसल कोहली टेस्ट सीरीज खत्म होने के बाद परिवार के साथ हॉलिडे मनाने की प्लानिंग कर रहे हैं। साउथ अफ्रीका के खिलाफ आखिरी टेस्ट मैच 11 जनवरी से शुरू होगा। वनडे टीम की घोषणा नहीं हुई है। भारत और अफ्रीका के बीच टी20 मैच भी होने वाले थे, लेकिन ओमिक्रोन के कारण रद्द कर दिया गया।

रोहित शर्मा को लगी चोट

वहीं टीम इंडिया के लिए एक बुरी खबर सामने है। कप्तान रोहित शर्मा ट्रेनिंग सेशन के दौरान चोटिल हो गए हैं। उनकी चोट काफी गंभीर है। रोहित साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज से बाहर हो गए हैं। उनकी जगह प्रियांक पंचाल को टीम में शामिल किया गया है।

मध्‍य प्रदेश को मिलेंगे 29 आइएएस-आइपीएस अधिकारी, बीस दिसंबर को होगी डीपीसी

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भोपाल।। प्रदेश को इस साल 29 आइएएस-आइपीएस अधिकारी मिल जाएंगे। इसके लिए बीस दिसंबर को राज्य प्रशासनिक सेवा से आइएएस और राज्य पुलिस सेवा से आइपीएस संवर्ग आवंटन के लिए विभागीय पदोन्न्ति समिति (डीपीसी) की बैठक होगी। इसकी अध्यक्षता संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष प्रदीप जोशी करेंगे। बैठक भोपाल में प्रस्तावित की गई है। इसमें 18 राज्य प्रशासनिक सेवा और 11 राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को आइएएस और आइपीएस संवर्ग आवंटन होगा।

सामान्य प्रशासन और गृह विभाग ने विभागीय पदोन्नति समिति के लिए संघ लोक सेवा आयोग को करीब दो माह पहले प्रस्ताव भेजा था। आयोग ने बीस दिसंबर को भोपाल में बैठक प्रस्तावित की है। इस वर्ष राज्य प्रशासनिक सेवा से आइएएस संवर्ग आवंटन के लिए 18 पद उपलब्ध हैं। इसके लिए 54 अधिकारियों के नाम का प्रस्ताव आयोग को भेजा गया था। वरिष्ठता और सेवा अभिलेख के आधार पर 1998 और 1999 बैच के राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के नाम पर विचार करके अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

1994 बैच के विनय निगम, विवेक सिंह और 1995 बैच के पंकज शर्मा के नाम भी विचार के लिए बैठक में रखे जाएंगे। दोनों को पिछले साल जांच चलने के कारण मौका नहीं मिल पाया था। वरिष्ठता के अनुसार सुधीर कोचर, रानी बाटड, चंद्रशेखर शुक्ला, त्रिभुवन नारायण सिंह, नारायण प्रसाद नामदेव, दिलीप कुमार कापसे, बुद्धेश कुमार वैद्य, जयेंद्र कुमार विजयवत, डा.अभय अरविंद बेडेकर, अजय देव, नियाज अहमद खान, मनोज मालवीय, नीतू माथुर, अंजू पवन भदौरिया और जमना भिडे को आइएएस संवर्ग मिलना तय माना जा रहा है।

इसी तरह राज्य पुलिस सेवा से आइपीएस संवर्ग में पदोन्नति के लिए 11 पद उपलब्ध हैं। गृह विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सेवा अभिलेखों के आधार पर 1995-96 बैच के अधिकारी प्रकाश चंद्र परिहार, निश्चल झारिया, रसना ठाकुर, संतोष कोरी, जगदीश डाबर, मनोहर सिंह मंडलोई, रामजी श्रीवास्तव, जितेंद्र सिंह पवार, सुनील तिवारी, संजीव कुमार सिन्हा और संजीव कुमार कंचन को आइपीएस संवर्ग आवंटित हो सकता है।

आइएएस के लिए पहले होगी बैठक

प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार आइएएस संवर्ग में पदोन्न्ति के लिए सुबह 11 बजे से बैठक होगी। इसमें मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस, सामान्य प्रशासन विभाग की प्रमुख सचिव कार्मिक दीप्ति गौड़ मुखर्जी सहित अन्य अधिकारी शामिल रहेंगे। वहीं, तीन बजे से आइपीएस संवर्ग में पदोन्न्ति के लिए बैठक होगी। इसमें मुख्य सचिव के साथ पुलिस महानिदेशक विवेक जौहरी, अपर मुख्य सचिव गृह डा.राजेश राजौरा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहेंगे।

मध्‍य प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को फरवरी तक मिलेंगे सरकारी मोबाइल

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भोपाल। प्रदेश की 76 हजार 263 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता (महिला) को 18 फरवरी 2022 तक सरकारी मोबाइल मिल जाएंगे। महिला एवं बाल विकास विभाग ने मोबाइल खरीदने की कार्ययोजना जारी कर दी है। जिसके हिसाब से सभी जिला कार्यक्रम अधिकारी तय समय पर निविदा खोलेंगे, तकनीकी मूल्यांकन करेंगे और आदेश देने के 45 दिन में कार्यकर्ताओं को मोबाइल उपलब्ध कराएंगे। मोबाइल खरीदने के लिए कार्यकर्ताओं को नकद भुगतान करने पर केंद्र सरकार की रोक के बाद विभाग ने मोबाइल खरीदने की प्रक्रिया विकेंद्रीकृत कर दी है। अब जिला स्तर पर मोबाइल खरीदे जा रहे हैं।

प्रदेश में कुपोषण, एनीमिया, पोषण आहार सहित तमाम योजनाओं की मानीटरिंग आनलाइन की जा रही है। यहां तक कि कार्यकर्ताओं की उपस्थिति भी मोबाइल के माध्यम से ही ली जा रही है। इसलिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मोबाइल दिए जाने हैं।

इसके लिए केंद्र सरकार ने 10 हजार रुपये प्रति मोबाइल की दर से राज्य सरकार को चार साल पहले राशि दी है पर इन सालों में पांच बार मोबाइल खरीद प्रक्रिया स्थगित करना पड़ी है। हर बार खरीददारी की शर्तों को लेकर हंगामा खड़ा हुआ है। महिला एवं बाल विकास संचालनालय के कुछ अधिकारियों पर चंद कंपनियों को फायदा पहुंचाने के आरोप लगते रहे हैं।

इस स्थिति को देखते हुए पिछले साल मोबाइल खरीद प्रक्रिया निरस्त करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्र सरकार ने मार्गदर्शन मांगा था। यह विकल्प भी रखा था कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को नकद राशि दे दें, पर केंद्र सरकार सहमत नहीं हुई, तो आरोप-प्रत्यारोप से बचने के लिए विभाग ने खरीद प्रक्रिया का विकेंद्रीकरण कर दिया।

कार्ययोजना इसलिए ताकि अब देर न हो

विभाग ने मोबाइल फोन खरीदने के लिए कार्ययोजना (टाइम लाइन) तय कर दी है। इसके तहत पहले चरण में मोबाइल खरीद चुके 16 जिलों को छोड़कर शेष जिले 30 नवंबर को निविदा जारी कर चुके हैं। इन जिलों को 21 दिसंबर को निविदा खोलना है और चार जनवरी 2022 को मोबाइल खरीदने का आदेश जारी करना है। आदेश जारी होने के 45 दिन (यानी 18 फरवरी) तक मोबाइल कार्यकर्ता के हाथों में पहुंचाना है।

ओरिएंटल विश्वविद्यालय में मोबाइल पर बात करने को लेकर सीनियर्स-जूनियर विद्यार्थियों के बीच विवाद

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इंदौर। मोबाइल पर बात करने को लेकर जूनियर-सीनियर छात्रों के बीच विवाद हो गया। दोनों पक्षों में तीखी बहस होने के बाद शिक्षकों ने बीच-बचाव किया। विद्यार्थियों में समझौता करवा दिया। मगर निजी विश्वविद्यालय परिसर के बाहर सीनियर्स ने एक जूनियर छात्र की पिटाई कर दी।मामला बाणगंगा थाने तक पहुंच गया है। जूनियर छात्र रैंगिंग को लेकर सीनियर्स छात्रों पर आरोप लगा रहा है। जबकि विवि प्रबंधन ने रैंगिंग की घटना से इनकार किया है। उनके मुताबिक विद्यार्थियों का आपसी झागड़ा बताया जा रहा है।

मामला सांवेर रोड स्थित ओरिएंटल निजी विश्वविद्यालय से जुड़ा है। बीफार्मा सेकंड ईयर के छात्र शुभम का फाइनल ईयर में पढ़ने वाले विद्यार्थियों से विवाद हुआ। शुभम के मुताबिक सोमवार शाम को मित्र से मोबाइल पर बात कर रहा था। विवि परिसर में कुछ सीनियर्स छात्रों ने मुझे टोका। मैंने तुरंत मोबाइल बंद कर दिया।

इस बीच थोड़ी बहस हुई। ये देखकर विवि के शिक्षक और डीन भी वहां आ गए। उन्होंने दोनों पक्षों में समझौता कराया। थोड़ी देर बाद शुभम अपने दो मित्रों के साथ घर जा रहा था। उस दौरान फिर सीनियर छात्रों ने रोका। फिर विवाद हुआ और मुझे डंडे से मारने लगे। हाथ-पैर में चोट आई।

निजी विवि के संचालक गौरव ठकराल ने कहा कि विवाद को लेकर शिक्षकों से जानकारी मिली है। उन्होंने विद्यार्थियों के बीच आपसी विवाद होना बताया है। बुधवार को विवि पहुंचकर दोनों पक्षों से बातचीत की जाएगी। वैसे अभी रैंगिंग से जुड़ा मामला नहीं है। वे बताते है कि अगर रैंगिंग होना साबित होता है तो विवि प्रशासन निश्चित तौर पर कार्रवाई करेंगा।

मप्र में पेंशनरों की पांच प्रतिशत बढ़ाई महंगाई राहत, न्यूनतम साढ़े तीन सौ रुपये का होगा लाभ

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भोपाल।, प्रदेश के साढ़े चार लाख पेंशनर को अब 17 प्रतिशत महंगाई राहत मिलेगी। सरकार ने पांच प्रतिशत की राहत में वृद्धि के आदेश मंगलवार को जारी कर दिए। महंगाई राहत में वृद्धि का लाभ अक्टूबर से मिलेगा। इससे पेंशनर को न्यूनतम साढ़े तीन सौ रुपये प्रतिमाह का लाभ होगा। हालांकि, अब कर्मचारियों के महंगाई भत्ते और पेंशनर की महंगाई राहत में तीन प्रतिशत का अंतर आ गया है। कर्मचारियों को बीस प्रतिशत महंगाई भत्ता दिया जा रहा है।

प्रदेश में पेंशनर द्वारा महंगाई राहत बढ़ाने की मांग काफी समय से की जा रही थी। सरकार ने कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 12 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत किया था और इसका लाभ अक्टूबर से दिया लेकिन पेंशनर काम मामला अटका हुआ था। दरअसल, छत्तीसगढ़ सरकार ने जुलाई 2021 से महंगाई राहत में पांच प्रतिशत की वृद्धि करते हुए मध्य प्रदेश सरकार को सहमति पत्र भेजा था। जबकि, मध्य प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में अक्टूबर 2021 से आठ प्रतिशत की वृद्धि की थी।

पेंशनर की महंगाई राहत में वृद्धि के लिए दोनों राज्यों के बीच में सहमति होना जरूरी होता है क्योंकि वर्ष 2000 के पहले सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों की महंगाई राहत का 74 प्रतिशत वित्तीय भार मध्यप्रदेश और 24 प्रतिशत छत्तीसगढ़ सरकार वहन करती है।

इस स्थिति को देखते हुए वित्त विभाग ने अक्टूबर से पांच प्रतिशत महंगाई राहत में वृद्धि करने का प्रस्ताव दिया था।मुख्यमंत्री की अनुमति मिलने के बाद मंगलवार को आदेश जारी कर दिए गए हैं। 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के पेंशनर को मिलने वाली अतिरिक्त पेंशन पर भी महंगाई राहत की वृद्धि दी जाएगी।

छठवां वेतनमान प्राप्त कर रहे पेंशनर की महंगाई राहत 10 प्रतिशत बढ़ाई गई है। अब इन्हें 164 प्रतिशत महंगाई राहत अक्टूबर 2021 से मिलेगी। दिसंबर में प्राप्त होने वाली पेंशन में बढ़ी हुई महंगाई राहत के हिसाब से मिलेगी। एक माह का एरियर पेंशनर को दिया जाएगा।

कैंसर के खतरे से बचना है तो पालीथिन से करनी होगी तौबा

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उमरिया। आश्चर्यपूर्ण ढंग से ऐसे लोग कैंसर जैसी घातक बीमारी का शिकार हो रहे हैं, जिन्होंने अपने जीवन में न तो कभी शराब को हाथ लगाया और न ही सिगरेट और तंबाकू को छुआ। ऐसे लोगों के जीवन में एक बड़ा सवाल है कि जब वे किसी व्यसन में नहीं फंसे तो फिर उन्हें कैंसर जैसा घातक रोग कैसे हो गया। न सिर्फ इस सवाल का जवाब देने बल्कि लोगों को यह जानकारी देने का अभियान जिले की युवा टीम ने शुरू किया है। यह टीम लोगों को बता रही है कि पालीथिन के कारण कैंसर जैसे घातक रोगों का शिकार आम लोग बनते हैं। इसलिए पालीथिन से तौबा कर लेनी चाहिए।

जिले में शुरू हुआ यह अभियान जिले के तीस गांव में एकसाथ चलाया जा रहा है। इस अभियान में जिले के अलग-अलग क्षेत्र के तीन सौ से ज्यादा युवा शामिल हैं। युवा टीम के लीडर हिमांशु तिवारी ने बताया कि तीन गांव में एक एक गांव में एक सप्ताह तक अभियान चलाया जा रहा है।

घरों में तैयार हो रहे थैले

लोगों को पालीथिन से मुक्ति का सिर्फ संदेश नहीं दिया जा रहा है बल्कि उन्हें कपड़े से बने थैले भी बांटे जा रहे हैं। हिमांशु तिवारी ने बताया कि कुछ रेडीमेड थैले जनसहयोग से एकत्र किए गए हैं। जबकि सभी सदस्यों के घरों पर पुराने कपड़ों से भी थैले तैयार कराए जा रहे हैं। थैला बनाने में युवा टीम के सदस्यों के घर की महिलाएं अपना सहयोग दे रहीं हैं। पिछले दो दिनों में एक हजार से ज्यादा लोगों को थैलों का वितरण किया जा चुका है।

खतरे से अनजान हैं लोग

हिमांशु तिवारी ने बताया कि पालीथिन के उपयोग से हो रहे दुष्प्रभावों से लोग अनभिज्ञ हैं। लोगों को बताया जा रहा है कि पालीथिन एक प्रकार का जहर है, जो पूरे पर्यावरण को नष्ट कर रहा है। पालीथिन के कारण पेड़-पौधे नहीं पनप पाते और इसे कचरे में फेंकने से मवेशियों पर भी इसका असर होता है। मूक मवेशी इसे खा लेते हैं और यह उनके पेट में एकत्र होती जाती है जिससे उनकी मौत भी हो जाती है।

ऐसे शुरू किया काम

कोरोना की पहली लहर के दौरान युवाओं ने परेशान लोगों को सहायता पहुंचने का काम शुरू किया था। यह अभियान अभी भी जारी है और इसकी के साथ इस टीम ने ग्रामीण क्षेत्र में अपना नेटवर्क तैयार किया था।

अच्छा प्रयास

युवा टीम पालीथिन उन्मूलन का अच्छा प्रयास कर रही है। लोगों को भी इसमें अपना सहयोग करना चाहिए।