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मुख्यमंत्री करेंगे विभागीय समीक्षा

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पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव के बाद अब शिवराज सरकार मिशन 2023 की तैयारियों में जुटेगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 15 अगस्त के बाद विभागीय समीक्षा की शुरुआत करेंगे। इसके लिए सभी विभागों से हितग्राहीमूलक योजनाओं की जानकारी मांगी गई है। साथ ही सितंबर 2023 तक पांच करोड़ रुपये या उससे अधिक राशि के शिलान्यास और लोकार्पण योग्य कामों की सूची भी मांगी गई है। समीक्षा में मंत्रियों के साथ विभागीय अधिकारी उपास्थित रहेंगे।

प्रदेश में नवंबर-दिसंबर 2023 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में आचार संहिता प्रभावित हो सकती है। इसे देखते हुए सरकार ने अपने स्तर पर विधानसभा चुनाव की तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं। इसके लिए मुख्यमंत्री 15 अगस्त के बाद विभागीय समीक्षा करेंगे।

इसमें आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश की कार्ययोजना की पूर्ति की स्थिति, हितग्राहीमूलक योजनाओं की प्रगति, लोक सेवा गारंटी कानून के अंतर्गत लाई जाने वाली सेवाओं में वृद्धि के प्रस्ताव, निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए किए जा रहे कार्य और अधोसंरचना विकास के कामों की समीक्षा की जाएगी। विभागों से सितंबर 2023 तक पांच करोड़ रुपये या उससे अधिक लागत के शिलान्यास और लोकार्पण योग्य कामों की सूची मांगी गई है ताकि कार्यक्रम तय किए जा सकें ।

मुख्यमंत्री जल्द ही रोजगार से जुड़े कार्यक्रमों की समीक्षा भी करेंगे। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के साथ शहरी और ग्रामीण पथ विक्रेता योजना के क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। शासकीय विभागों में रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया भी इसी वर्ष प्रारंभ हो जाएगी। इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों से स्वीकृत, भरे और रिक्त पदों की जानकारी मांगी है। इसके आधार पर भर्ती के कार्यक्रम तय किए जाएंगे।

हीरा कारोबारी नीरव मोदी पर हॉन्गकॉन्ग में ED ने जब्त की 253 करोड़ की संपत्ति

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बैंकों से धोखाधड़ी कर भागे हीरा कारोबारी नीरव मोदी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ा ऐक्शन लिया है। एजेंसी ने हॉन्गकॉन्ग में नीरव मोदी की 253.62 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। इस पंत्ति में हीरे, ज्वेलरी और बैंक में जमा रकम शामिल हैं। एजेंसी का कहना है कि अब तक नीरव मोदी की ओर से धोखाधड़ी के मामले में 2650.07 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। फिलहाल पंजाब नेशनल बैंक समेत कई वित्तीय संस्थाओं के साथ धोखाधड़ी करने वाला नीरव मोदी ब्रिटेन में रह रहा है। उसके प्रत्यर्पण के लिए भी सरकार की ओर से प्रयास किए गए हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिल सकी है।

जून के आखिरी सप्ताह में ही उनके प्रत्यर्पण के मामले में एक और आपत्ति दायर की है। इस मामले में अब अदालत ने अक्टूबर में सुनवाई का फैसला लिया है। इससे साफ है कि नीरव मोदी का प्रत्यर्पण का मामला और जटिल हो गया है। नीरव मोदी के वकील ने अदालत में कहा कि यदि उसका प्रत्यपर्पण किया जाता है तो वह आत्महत्या कर सकते हैं। ऐसे में उनका प्रत्यर्पण करना गलत होगा।

यही नहीं नीरव मोदी का कहना है कि उसे भारत की जेलों में बेहद खराब स्थिति में रहना होगा। इस बीच ईडी की इस कार्रवाई ने नीरव मोदी पर थोड़ा शिकंजा जरूर कसा है। गौरतलब है कि शराब कारोबारी विजय माल्या, हीरा कोराबारी मेहुल चोकसी और नीरव मोदी के देश से धोखाधड़ी कर भागने के मामले में अकसर सरकार विपक्ष के हमलों का भी सामना करती रही है।

पश्चिम बंगाल में मंत्री पार्थ चटर्जी की करीबी अर्पिता चटर्जी के घर से ईडी की छापेमारी में मिला 20 करोड़ कैश

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पश्चिम बंगाल में कई जगहों पर ईडी की छापेमारी चल रही है। जानकारी के मुताबिक यह छापेमारी पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग और पश्चिम बंगाल प्राइमरी एजुकेशन बोर्ड भर्ती घोटाले के संबंध में की जा रही है। इस दौरान बंगाल सरकार मंत्री पार्थ चटर्जी के विभिन्न ठिकानों पर भी छापेमारी की जा रही है। बताया जा रहा है कि पार्थ चटर्जी की करीबी अर्पिता मुखर्जी अर्पिता मुखर्जी के घर से 20 करोड़ कैश बरामद किया गया है।

पैसे गिनने में लगे बैंक कर्मचारी
ईडी को यह रकम अर्पिता के आवासीय अहाते से मिली है। छापा मारने पहुंची टीम इस रकम को गिनने के लिए बैंक कर्मचारियों और काउंटिंग मशीन की मदद ले रही है। इसके अलावा अर्पिता के घर से 20 मोबाइल फोन भी बरामद हुए हैं। अधिकारी यह जानकारी निकालने में जुटे हैं कि आखिर इतने ज्यादा मोबाइल फोन का इस्तेमाल होता किसलिए था? फोटो में दिखाई दे रहा है कि बड़ी संख्या में 500 और 2000 के नोट कमरे में रखे हुए हैं।

इन पर भी छापेमारी
इसके अलावा ईडी के कर्मचारी इस मामले में शिक्षा राज्यमंत्री परेश अधिकारी के कूच बिहार जिला स्थित घर की भी तलाशी ले रहे हैं। पार्थ चटर्जी और परेश अधिकारी से सीबीआई एसएससी भर्ती घोटाले में पूछताछ कर चुकी है। बयान में कहा गया कि ईडी ने  विधायक माणिक भट्टाचार्य और अन्य के परिसरों पर भी छापा मारा है।

कहां गई वीराना की मिस्ट्री गर्ल जैस्मिन जो इस शर्त पर सारे कपड़े उतारने को तैयार थी…

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दो गज जमीन के नीचे, 20 साल बाद और वीराना ऐसी हॉरर फिल्में हैं जो 80-90 के दशक के सिनेमाप्रेमियों को अच्छी तरह याद होंगी। फिल्म के भूत जहां लोगों को डराते हैं वहीं रामसे ब्रदर्स की मूवी वीराना की हिरोइन जैस्मिन अपनी खूबसूरती के लिए चर्चा में थी। फिल्म में जैस्मिन की बोल्डनेस भी काफी सुर्खियों में रही। वीराना में जैस्मिन का रोल प्ले करने वाली ऐक्ट्रेस का असली नाम जैस्मिन धुन्ना था। फिल्म में जैस्मिन पर बुरी आत्मा का साया था जो खूबसूरत लड़की का रूप लेकर मर्दों को रिझाती थी। वीराना के बाद जैस्मिन रातोरात सुर्खियों में आ गईं लेकिन यह मूवी उनकी आखिरी हिट फिल्म बनकर रह गई। वह फिल्म इंडस्ट्री से इस तरह गायब हुईं कि एक रहस्य बन गईं। यहां जानते हैं उनसे जुड़ी कुछ बातें।

वीराना की वो हसीन चुड़ैल

जिसे भी वीराना याद आती है सबसे पहले जेहन में सवाल आता है कि जैस्मिन अब कहां हैं। फिल्म में जैस्मिन ने काफी बोल्ड सीन दिए थे। वह इससे ज्यादा बोल्ड सीन्स देने के लिए तैयार थीं। उन्हें फिल्म के लिए कपड़े उतारने या किसिंग सीन से कोई परहेज नहीं था। 1987 में एक इंटरव्यू के दौरान जैस्मिन ने कहा था, अगर लीड हीरो मुझे एक्साइट कर लेता है तो कैमरे के सामने अंग प्रदर्शन में कोई गुरेज नहीं, मुझे किस करने में भी कोई दिक्कत नहीं है। अगर राज कपूर जैसा डायरेक्टर मिले तो मैं अपने कपड़े भी उतार सकती हूं।

13 साल में किया था डेब्यू

वीराना जैस्मिन की पहली फिल्म नहीं थी। 1979 में फिल्म सरकारी मेहमान से उन्होंने डेब्यू किया था। फिल्म में उनके हीरो विनोद खन्ना था। उस वक्त जैस्मिन की उम्र 13 साल थी। फिल्म फ्लॉप हो गई। इसके बाद जैस्मिन मॉडलिंग करने लगीं। इसके बाद 1988 में उन्होंने फिल्म वीराना से वापसी की और दर्शकों के दिलोदिमाग पर छा गईं।

एशिया कप 2022 को लेकर बड़ा ऐलान

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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई के अध्यक्ष सौरव गांगुली ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि एशिया कप 2022 का आयोजन कहां होगा। सौरव गांगुली ने उन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है, जिनमें भारत को भी मेजबान बताया जा रहा है। गांगुली ने बताया है कि एशिया कप का आयोजन अब संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई में होगा। बीसीसीआई बॉस ने इसका कारण भी बताया है।

गुरुवार 21 जुलाई को बीसीसीआई की एपेक्स काउंसिल की मीटिंग के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि टी20 प्रारूप में होने वाले एशिया कप 2022 का आयोजन यूएई में इस कारण से भी होगा, क्योंकि वहां अगस्त-सितंबर में बारिश नहीं होगी। उन्होंने कहा, “एशिया कप का आयोजन यूएई में किया जाएगा, क्योंकि इस मौसम में यही एक जगह है, जहां पर बारिश नहीं होगी।”

एशिया कप 2022 का आगाज 27 अगस्त से होना है। हालांकि, ये टूर्नामेंट श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड की मेजबानी में ही खेला जाएगा। श्रीलंका में चल रहे मौजूदा आर्थिक और राजनीतिक संकट के बीच श्रीलंका क्रिकेट ने खुद ही इस टूर्नामेंट को अपने यहां नहीं आयोजित करने की बात कही थी। टूर्नामेंट का आयोजन आस्ट्रेलिया में होने वाले आइसीसी टी20 विश्व कप को ध्यान में रखते हुए इसी फार्मेट में खेले जाने पर फैसला लिया गया है।

द्रौपदी मुर्मू के चुनाव जीतते ही बने ये पांच रिकॉर्ड

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15वें राष्ट्रपति के लिए हुए चुनाव में एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू ने बड़ी जीत हासिल की है। विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार यशवंत सिन्हा ने अपनी हार स्वीकर कर ली है और उन्होंने द्रौपदी मुर्मू को बधाई दी। उन्होंने कहा, उम्मीद है कि आप बिना किसी भय और पक्षपात के संविधान की संरक्षक बनकर कार्य करेंगी। वहीं द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च पद पर पहुंचने वाली सबसे युवा आदिवासी महिला बन गई हैं। इस जीत के साथ ही उन्होंने इतिहास रच दिया है।

15वें राष्ट्रपति के लिए हुए चुनाव में एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू ने बड़ी जीत हासिल की है। विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार यशवंत सिन्हा ने अपनी हार स्वीकर कर ली है और उन्होंने द्रौपदी मुर्मू को बधाई दी। उन्होंने कहा, उम्मीद है कि आप बिना किसी भय और पक्षपात के संविधान की संरक्षक बनकर कार्य करेंगी। वहीं द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च पद पर पहुंचने वाली सबसे युवा आदिवासी महिला बन गई हैं। इस जीत के साथ ही उन्होंने इतिहास रच दिया है।

सबसे युवा राष्ट्रपति
द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को हुआ था। 25 जुलाई को उनकी उम्र 64 साल 1 महीना और 8 दिन होगी। द्रौपदी मुर्मू अब तक की सबसे युवा राष्ट्रपति होंगी। इससे पहले यह रिकॉर्ड नीलम संजीव रेड्डी के नाम था। जब वह राष्ट्रपति बने तो उनकी उम्र 64 साल दो महीने और 6 दिन थी। वह निर्विरोध राष्ट्रपति बने थे। वहीं सबसे ज्यादा उम्र में राष्ट्रपति बनने वाले में के आर नारायणन का नाम दर्ज है। वह 77 साल 5 महीने 21 दिन की उम्र में राष्ट्रपति बने थे।

ब्रिटिश पीएम रेस के फाइनल में पहुंचे ऋषि सुनक

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ब्रिटेन के नए पीएम बनने के लिए भारतीय मूल के ऋषि सुनक ने एक और कदम आगे बढ़ाया है। कंजर्वेटिव सांसदों की ओर से की गई पांचवें दौर के मतदान में ऋषि सुनक फिर अव्वल रहे। सुनक को 137 वोट मिले। अब उनका मुकाबला आखिरी चरण के लिए लिज ट्रस से होगा। पांच दौर के मतदान में अव्वल रहे ऋषि सुनक की राह जितनी आसान दिख रही है, उतनी है नहीं। विपक्षी पार्टी और खुद बोरिस जॉनसन के करीबी सुनक को अगले पीएम के पद पर नहीं देखना चाहते हैं। 

भारतीय मूल के सांसद ऋषि सुनक और विदेश सचिव लिज ट्रस यूके के नए पीएम पद के शीर्ष दो दावेदारों के रूप में सामने आए हैं। सुनक को अंतिम चरण के मतदान में 137 मत मिले। जबकि लिज ट्रस ने बोरिस जॉनसन को ब्रिटिश प्रधान मंत्री और कंजर्वेटिव पार्टी के नए नेता की दौड़ में 113 वोट हासिल किए। पूर्व विदेश मंत्री सुनक ने कंजर्वेटिव सांसदों के बीच सभी दौर के मतदान में अव्वल रहे लेकिन, दूसरी ओर लिज ट्रस ने भी गवर्निंग पार्टी के लगभग 200,000 सदस्यों का समर्थन हासिल किया है।

सुनक की राह में रोड़े
ऋषि सुनक हालांकि पीएम पद की रेस में चल रहे पांचों दौर के मतदान में सबसे आगे रहे। लेकिन, विपक्षी दल और बोरिस जॉनसन के करीबी सुनक को पसंद नहीं करते हैं। वरिष्ठ सांसद डेविड डेविस ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर सुनक के चुनाव प्रचार दल के अभियान की जांच की मांग की है। दूसरी ओर बोरिस जॉनसन के करीबियों का मानना है कि बोरिस सरकार गिराने के पीछे सुनक का हाथ है। सुनक के इस्तीफे के बाद बोरिस जॉनसन कमजोर पड़ गए और उन्हें मजबूरी में सत्ता से बाहर होना पड़ा।

सुनक के लिए नया खतरा
इससे पहले चौथे दौर के मतदान में सुनक को 118 सांसदों का समर्थन मिला था। लेकिन डेविस ने आरोप लगाया कि सुनक की टीम ने 19 जुलाई को नवीनतम दौर की वोटिंग में अपनी जीत को सुरक्षित करने के लिए विदेश सचिव और प्रतिद्वंद्वी लिज ट्रस के वोट को स्थानांतरित किया। यह आरोप इसलिए भी सुनक के विपरीत जाता है क्योंकि बुधवार को पांचवे दौर की वोटिंग में 27 सांसदों में से सिर्फ 19 ने सुनक के पक्ष में मतदान किया।

गुरुवार को ED कार्यालय में सोनिया गांधी से पूछताछ

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गुरुवार यानी 21 जुलाई को कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को प्रवर्तन निदेशालय ने पूछताछ के लिए बुलाया है। ED ने नेशनल हेराल्ड मामले में पहले भी सोनिया गांधी को समन भेजा था, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से सोनिया गांधी ने अतिरिक्त समय मांगा। अब उनसे 21 जुलाई को पूछताछ होनी है। उधर कांग्रेस ने इस मामले में देश भर में विरोध-प्रदर्शन का फैसला किया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ एकजुटता दिखाने के लिए कल AICC कार्यालय में एकत्र होंगे। इसमें पार्टी के सांसद भी शामिल होंगे और बाद में वे सभी ED कार्यालय तक जाएंगे। पार्टी ने अन्य विपक्षी दलों से भी एकजुटता दिखाने का अनुरोध किया है। सोमवार को विपक्षी नेताओं की एक बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे और जयराम रमेश ने अन्य दलों से 21 जुलाई को विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का अनुरोध किया।

संसद में भी उठेगा मामला

अभी संसद का मानसून सत्र चल रहा है। ऐसे में पूरी संभावना है कि संसद में भी ये मामला उठेगा और विपक्ष को सरकार के खिलाफ एक और मुद्दा मिल जाएगा। कांग्रेस ने शुरु से ही इस मामले को राजनीति से प्रेरित बताया है और उनका आरोप है कि बीजेपी सरकार ED का दुरुपयोग कर रही है। सोनिया गांधी से पहले राहुल गांधी भी ईडी की पूछताछ का सामना कर चुके हैं। राहुल गांधी से ईडी ने 30 घंटे से अधिक समय तक सवाल पूछे।

आवाम ने नफ़रत की राजनीति को नकारा-ओवैसी

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मध्य प्रदेश के निकाय चुनाव में पहली बार हिस्सा ले रही असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने प्रदेश में कदम जमाना शुरू कर दिया है। राज्य में अब ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के 7 पार्षद जीत चुके हैं। प्रदेश में मिली इस जीत को लेकर एआईएमआईएम के कार्यकर्त्ता जोश में हैं। वहीं इस जीत के बड़े मायने तलाशे जा रहे हैं। खंडवा, बुरहानपुर, जबलपुर  और खरगोन में मिली कामयाबी को लेकर ओवैसी भी बहुत खुश नजर आ रहे हैं। खासकर खरगोन में एआईएमआईएम की हिन्दू केंडिडेट की जीत एक बड़े राजनीतक दांव के रूप में देखी जा रही हैं।

अपने प्रत्याशी की जीत को लेकर खुद ओवैसी ने भी ट्वीट कर लिखा कि अरुणा जी का हम शुक्रिया अदा करते हैं। उनकी जीत ने सही मायनों में खरगोन में सेक्युलरिज़्म और हिन्दू-मुस्लिम इत्तेहाद की मिसाल क़ायम की है। बता दें कि राम नवमी पर निकाले जाने वाले जुलुस के दौरान खरगोन में हिंसा भड़क उठी थी। उसके बाद यहां माहौल में साम्प्रदायिकता का जहर घुलने लगा था। ऐसे में एआईएमआईएम की हिन्दू केंडिडेट की जीत को सेक्युलरिज़्म से जोड़कर देखा जा रहा है।

मध्य प्रदेश में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन को मिली कामयाबी के बाद प्रदेश की सियासत में नया अध्याय जुड़ गया है। प्रदेश में पहली बार चुनाव लड़ने वाली असदुद्दीन की पार्टी ने राजनीति के नए विकल्प की राह को खोल दिया हैं।  AIMIM  की जीत के बाद माना जा रहा था की मुसलमानों को प्रदेश में नया नेतृत्व मिल गया हैं।

शिवराज जीतकर भी क्यों टेंशन में, पिछड़कर भी कांग्रेस की खुशी का राज

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मध्य प्रदेश में शहरी निकाय चुनाव के नतीजे घोषित हो चुके हैं और अब राजनीतिक दल नफा-नुकसान के आकलन में जुट गए हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को जहां 9 शहरों नगर निगम में जीत हासिल हुई है तो कांग्रेस को 5 मेयर पद हासिल हुए हैं। वहीं आम आदमी पार्टी ने भी सिंगरौली में जीत हासिल करते हुए मजबूत दस्तक दी है। हालांकि, नगर पालिका और नगर परिषद में जरूर बीजेपी ने पहले से बेहतर प्रदर्शन किया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने भी कुछ वार्ड जीतकर अपनी मौजूदगी का अहसास कराया है।

9 शहरों में जीतकर भी क्यों टेंशन में बीजेपी
नतीजों के बाद भले ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा समेत अन्य नेता खुशी का इजहार कर रहे हैं और नगर पालिका-नगर परिषद का हवाला देते हुए इसे ऐतिहासिक जीत बता रहे हैं। लेकिन सच यह है कि पार्टी रणनीतिकारों के लिए चुनाव परिणाम ने कई मायनों में चिंता बढ़ा दी है। दरअसल, पिछले चुनाव में भाजपा ने सभी 16 नगर निगम में भगवा परचम लहराया था। इस लिहाज से पार्टी को 6 शहरों में मेयर का पद गंवाना पड़ा है। वहीं, कुछ सीटों पर मामूली अंतर से जीत मिली है। चिंता की बात यह भी है कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ ग्वालियर और केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के संसदीय क्षेत्र में भी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है।

क्या है कांग्रेस की खुशी का राज
कांग्रेस पार्टी ने ग्वालियर, जबलपुर, छिंदवाड़ा, रीवा और मुरैना में जीत हासिल की है। 5 शहरों में जीत हासिल करने के बाद कांग्रेस के नेता गदगद हैं। इसकी वजह सिर्फ यह नहीं है कि पिछली बार कांग्रेस एक भी निगम नहीं जीत पाई थी, बल्कि यह पहली बार है जब पार्टी ने 5 शहरों में मेयर का पद हासिल किया है। दरअसल, बीजेपी को शहरों की पार्टी समझा जाता है। पार्टी हमेशा से नगरीय इलाकों में मजबूत रही है और कांग्रेस पार्टी को ग्रामीण इलाकों में अधिक मजबूत माना जाता है। लेकिन इस बार बीजेपी को कई शहरों में झटका लगा है तो कांग्रेस ने उस क्षेत्रों में सेंधमारी की है, जिन्हें बीजेपी का गढ़ माना जाता है।

सिंधिया को गढ़ में पटखनी देने से खुश हैं कांग्रेस नेता
दो साल पहले कांग्रेस में बगावत करके मध्य प्रदेश में कमलनाथ की सरकार गिराने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ ग्वालियर में भी जीत मिलने से कांग्रेस बेहद उत्साहित है। पार्टी के कई नेता इसे सिंधिया से बदला बता रहे हैं। कांग्रेस से वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भी ट्विटर पर लिखा कि ग्वालियर में मिली जीत से ज्यादा खुशी उन्हें किसी चीज में नहीं हुई है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी इस हार के बाद सिंधिया पर जमकर निशाना साधा है। ग्वालियर में जहां कांग्रेस ने 57 साल बाद जीत हासिल की थी तो जबलपुर में करीब दो दशक बाद परचम लहराया है।