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नितीश सरकार का फैसला शराबबंदी का फैसला वापस नहीं लिया जायेगा,तेजस्वी ने साधा निशाना

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पिछले एक महीने में शराब से करीब 50 लोगों की मौत के बाद CM Nitish Kumar आज शराबबंदी की समीक्षा बैठक ली है लेकिन बैठक के पहले ही मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि शराबबंदी का फैसला वापस नहीं होने वाला है .  .

बीते कुछ दिनों से बिहार में नकली शराब को लेकर हाहाकार मचा हुआ है. बिहार में 2 सीटों पर हुए उपचुनाव के बाद से ही बिहार में नकली शराब की सप्लाई की जा रही है जिसके चलते राज्यभर में तक़रीबन 65 से ज्यादा लोग अपनी जान गवा चुके है और कई लोग अस्पताल में है. इसे लेकर बिहार में विपक्ष नितीश सरकार पर हमलावर हो गया गया है और नकली शराब बेचने वालो की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग कर रहा है .

तेजस्वी ने साधा निशाना

पूर्व उपमुख्यमंती और नेता प्रतिपक्ष ने इसे लेकर सीएम नितीश कुमार पर जमकर निशाना साधा है और यह भी कहा है के यह सब सत्ता के संरक्षण में हो रहा है और बिहार में ‘गैंग्स ऑफ़ नितीश कुमार’ चल रही है. इतना ही नहीं इस पुरे मुद्दे को लेकर तेजस्वी ने नितीश सरकार को भ्रष्ट और नाकाम बताया और सीएम नितीश कुमार से इस्तीफे की मांग भी की .

जेडीयू ने कू कर दी जानकारी 

सीएम की इस बैठक को लेकर जनता दल यूनाइटेड ने सोशल मीडिया साइट कू पर तस्वीरें साझा करते हुए सीएम के साथ कैबिनेट की बैठक की जानकारी दी.    सीएम सचिवालय में माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी, माननीय मंत्रीगण और शीर्ष अधिकारियों के साथ शराबबंदी को लेकर समीक्षा बैठक करते हुए। तय की जाएगी जवाबदारी

बताया जा रहा है की इस मीटिंग में नितीश कुमार अधिकारियों से बात करेंगे और उनसे जवाबदेही मांगेंगे. बैठक में इस बात पर भी चर्चा की जाएगी के राज्य में शराब अवैध तरीके से न आये इसके लिए क्या उचित कदम उठाये जाये.

बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) सुरेश भारद्वाज ने बैठक के पहले कई सुझाव देते हुए कहा कि बिहार की सीमा दो देशों और दो राज्यों से लगी हुई है तो यह तो संभव नहीं है कि प्रदेश में शराब को पूरी तरह से आने से रोका जा सके. लेकिन इसके लिए उत्पाद विभाग और पुलिस की जवाबदेही और कड़ाई से तय करनी होगी. साथ ही एक सबसे बड़ा कदम उठाना होगा वो यह कि लोगों को ज्यादा से ज्यादा जागरूक करना होगा, बिना इसके इस अभियान को सफल नहीं बनाया जा सकता है.

अतीक और मुख्तार के बहाने भाजपा का सपा पर हमला, कहा- ये तुष्टिकरण की राजनीति

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है वैसे ही नेताओं की जुबानी जंग भी तेज हो रही है। यूपी में इस बार मुख्य मुकाबला इस भाजपा और सपा के बीच माना जा रहा है। राज्य में समाजवादी पार्टी एक और भाजपा को घेरने में लगी है तो भाजपा भी सपा के शासनकाल की याद दिलाकर जोरदार हमला कर रही है।  भारत में तेजी से उभरता माइक्रोब्लॉगिंग साइट कू पर भाजपा के प्रवक्ता गौरव भाटिया ने लगातार कई पोस्ट कर समाजवादी पार्टी और अखिलेश पर निशाना साधा है। ।

भाजपा नेता गौरव भाटिया ने कहा आजमगढ़ में मुसलमान जो आरोपित थे आतंकवादी थे, उनके पकड़े जाने पर समाजवादी पार्टी का घोषणापत्र कहता है कि अगर मुसलमान आतंकवादी है तो उसके मुकदमे वापस ले लिए जाएंगे, यह इनकी तुष्टिकरण की राजनीति है। उन्होंने कहा आज सभी जानते हैं कि सपा सरकार में कैसे गुंडाराज था, अतीक अहमद मुख्यमंत्री की कार में बैठते थे, मुजफ्फरनगर दंगों के आरोपी मौलाना नजीर अखिलेश यादव से मिलने खुद जाते थे, आज भाजपा के सरकार में गुंडे जेल की सलाखों के पीछे हैं चाहे अतीक अहमद हो या मुख्तार अंसारी हो।  ”आज सभी जानते हैं कि सपा सरकार में कैसे गुंडाराज था, अतीक अहमद मुख्यमंत्री की कार में बैठते थे, मुजफ्फरनगर दंगों के आरोपी मौलाना नजीर अखिलेश यादव से मिलने खुद जाते थे, आज @BJP4India के सरकार में गुंडे जेल की सलाखों के पीछे हैं चाहे अतीक अहमद हो या मुख्तार अंसारी हो।”

गौरव भाटिया 

राष्ट्रीय प्रवक्ता भाजपा  अखिलेश के दावे पर किया तंज

भाजपा प्रवक्ता ने पूर्व सीएम अखिलेश यादव के दावे पर तंज कसते हुए कहा कि  मुलायम सिंह यादव  और शिवपाल यादव खुद बताएंगे कि गिरगिट से ज्यादा कौन रंग बदलता है। अखिलेश यादव कहते हैं कि 400 से ज्यादा सीटें आएंगी और वहीं जनता कह रही है, कि इस बार 400 में दो जीरो घट के आएंगे।

वहीं उत्तर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने एक बयान जारी कर कहा कि अखिलेश को यह भी बताना चाहिए कि वह इतने ही काबिल और कर्मठ थे तो 2014 में जनता ने उनको क्यों “दूध की मक्खी” की तरह से निकाल कर बाहर फेंक दिया। उसके बाद से देश की सबसे बड़ी पंचायत संसद के चुनाव से लेकर पंचायत के चुनावों तक क्यों खारिज करती आ रही है। सिद्धार्थनाथ ने कहा कि अखिलेश अब ये भी बता दें कि उन्होंने अपने कार्यकाल में किया क्या? उन्हें जवाब। देने में भले हिचक हो लेकिन जनता को तो सबकुछ पता है। अखिलेश के कार्यकाल में सत्ता पोषित तुष्टीकरण की राष्ट्रघाती राजनीति हुई। 2005 में वाराणसी में बम आतंकियों ने बम धमाके के किए जिसमें 25 निर्दोष लोगों की जान गई थी। वलीउल्लाह और शमीम इसके आरोपी थे। इनके मुकदमे वापस लेने के लिए सपा सरकार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उस समय माननीय जजों ने याचिका खारिज करते हुए बेहद तल्ख टिप्पणी की थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि, आज आप उनके खिलाफ मुकदमें वापस ले रहे हैं। कल क्या उनको पद्मविभूषण से भी नवाजेंगे?

भोपाल के जंबूरी मैदान में बिरसा मुंडा जयंती पर ऐतिहासिक आयोजन

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भोपाल: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भोपाल प्रवास के दौरान प्रदेश के दो करोड़ लोगों ने उनका जम्बूरी मैदान और रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के शुभारंभ कार्यक्रम को लाइव देखा। पीएम मोदी ने जम्बूरी मैदान पर भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर आयोजित जनजातीय गौरव दिवस समारोह में शामिल होने के बाद इन आयोजनों से जुड़े और राज्य सरकार की योजनाओं की शुरुआत की। प्रदेश के जनजातीय बहुल 89 विकासखंडों के अलावा सभी जिलों से आए दो लाख से अधिक लोग कार्यक्रम के साक्षी बने। जनजातीय गौरव दिवस प्रदेश की हर पंचायत में मनाया जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी 20 नवनियुक्त पर्टिकुलरली वल्नरेवल ट्रायबल ग्रुप (पीवीटीजी) शिक्षकों में से तीन शिक्षकों को नियुक्ति पत्र प्रदान कर रहे हैं। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी द्वारा भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित 50 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों का वर्चुअल भूमि-पूजन भी किया जा रहा है। साथ ही प्रदेश में टीकाकरण उपलब्धि और शत-प्रतिशत कोविड टीकाकरण की उपलब्धि हासिल करने वाले झाबुआ जिले के जनजातीय बहुल गाँव नरसिंहरूंडा पर आधारित एक फिल्म प्रदर्शित की जा रही है।

जम्बूरी मैदान पहुंचने पर जनजातीय समाज के स्व-सहायता समूहों और उनके उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन कर जनजातीय समुदाय के स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों एवं जननायकों की चित्र प्रदर्शनी भी देख रहे हैं। आजादी के अमृत महोत्सव को देखते हुए योद्धाओं की कर्मभूमि और बलिदान भूमि से लाई गई 75 स्थानों की मिट्टी के कलश भी पीएम को सौंपने का कार्यक्रम हो रहा है।

पीएम मोदी द्वारा आदिवासियों को बीमारी से राहत देने के लिए राज्य सरकार द्वारा गुजरात सरकार की तर्ज पर शुरू किए गए सिकल सेल मिशन का शुभारंभ कर रहे हैं। इस योजना में हीमोग्लोबिनोपैथी के जरिये उपचार किया जाएगा। प्रधानमंत्री इस मिशन के अंतर्गत दो व्यक्तियों की जेनेटिक काउंसलिंग कार्ड प्रदान कर मध्यप्रदेश सिकल सेल (हीमोग्लोबिनोपैथी) मिशन का शुभारंभ कर रहे हैं। मध्यप्रदेश सिकल सेल उन्मूलन मिशन पर लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी भोपाल प्रवास के दौरान आदिवासियों के लिए शुरू की गई राशन आपके ग्राम योजना का शुभारंभ कर रहे हैं। इस योजना के माध्यम से आदिवासियों को उनके घर तक राशन पहुंचाने का काम किया जाएगा। यह राशन पहुंचाने का काम भी आदिवासी परिवारों के लोग ही गांव के भीतर करेंगे। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा राशन बाांटने वाले युवाओं को बैंक गारंटी देकर वाहन दिलाया जाएगा ताकि उन्हें रोजगार भी मिल सके और आदिवासी परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने का भी काम हो सके। पीएम मोदी यहां कुछ युवाओं को वाहनों की चाबी सौंप रहे हैं। इस योजना पर एक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया जा रहा है।

रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के शुभारम्भ पर पी एम मोदी बोले -जो सुविधाएं कभी एयरपोर्ट में मिला करती थीं, वो आज रेलवे स्टेशन में मिल रहीं

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भोपाल । प्रधानमंत्री ने सोमवार को रानी कमलापति रेलवे स्‍टेशन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने अपने उद्धोधन में कहा कि भोपाल के इस ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन का सिर्फ कायाकल्प ही नहीं हुआ है, बल्कि गिन्नौरगढ़ की रानी, कमलापति जी का इससे नाम जुड़ने से इसका महत्व भी और बढ़ गया है। गोंडवाना के गौरव से आज भारतीय रेल का गौरव भी जुड़ गया है। लोगों ने स्थितियों के बदलने की उम्मीदें तक छोड़ दी थीं। लेकिन जब देश ईमानदारी से संकल्पों की सिद्धि के लिए जुटता है, तो सुधार आता है, परिवर्तन होता है, ये हम बीते सालों से निरंतर देख रहे हैं।
उन्होंने कहा कि 6-7 साल पहले तक जिसका भी पाला भारतीय रेल से पड़ता था, तो वो भारतीय रेल को ही कोसते हुए ज्यादा नजर आता था। स्टेशन पर भीड़-भाड़, गंदगी, ट्रेन के इंतज़ार में घंटों की टेंशन, स्टेशन पर बैठने-खाने-पीने की असुविधा, ट्रेन के भीतर गंदगी, सुरक्षा की चिंता, दुर्घटना का डर, ये सबकुछ एक साथ दिमाग में चलता रहता था। भारत कैसे बदल रहा है, सपने कैसे सच हो सकते हैं, ये देखना हो तो आज इसका एक उत्तम उदाहरण भारतीय रेलवे भी बन रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के रूप में देश का पहला आइएसओ सर्टिफाइड, देश का पहला पीपीपी मॉडल आधारित रेलवे स्टेशन देश को समर्पित किया गया है। जो सुविधाएं कभी एयरपोर्ट में मिला करती थीं, वो आज रेलवे स्टेशन में मिल रही हैं। आज का भारत, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिए रिकार्ड इनवेस्टमेंट तो कर ही रहा है, ये भी सुनिश्चित कर रहा है कि प्रोजेक्ट्स में देरी ना हो, किसी तरह की बाधा ना आए। हाल में शुरू हुआ, पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान, इसी संकल्प की सिद्धि में देश की मदद करेगा।

जंबूरी मैदान में बोले पीएम मोदी, जनजातीय महापुरुषों का बलिदान देश भूल नहीं सकता

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भोपाल। राजधानी के जम्‍बूरी मैदान पर बिरसामुंडा की जन्‍मतिथि पर आयोजित किए गए जनजातीय महासम्‍मेलन औपचारिक रूप से शुरु हुआ। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने मंच पर पहुंचकर वीर आदिवासी बिरसा मुंडा को पुष्‍प अर्पित किए। इस दौरान उनके साथ राज्‍यपाल मंगूभाई पटेल, मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी हैं। प्रधानमंत्री ने पूरे मंच पर घूम कर उपस्थित आदिवासी जनसमुदाय का अभिवादन किया। वहीं जनसमुदाय से मोदी मोदी गुंजायमान हो रहा है। मंच पर राज्‍यपाल मंगूभाई पटेल, मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया, प्रहलाद पटेल समेत सांसद, विधायक मौजूद हैं। प्रधानमंत्री का बैगा माला और शाल से अभिनंदन किया गया। मंच पर स्‍वागत कार्यक्रम शुरू हुआ। आदिवासी नेता ओमप्रकाश धुर्वे, बिसाहूलाल साहू आदि ने अ‍भिनंदन किया। मुख्‍यमंत्री ने प्रधानमंत्री को तीर और धनुष देकर अभिनंदन किया।

 

 

कार्यक्रम में अपने उद्बोधन की शुरूआत करते हुए प्रधानमंत्री ने जनसमुदाय से कहा राम-राम, हू तम्‍हारो स्‍वागत करो छू, आप सबानूजन दिल सी राम-राम। मप्र के राज्‍यपाल मंगूभाई पटेल, जो जीवनभर समर्पित आदिवासी सेवक रहे। मप्र के पहले आदिवासी राज्‍यपाल का सम्‍मान भी राज्‍यपाल मंगूभाई पटेल का जाता है। मप्र के कोने-कोने से आए आदिवासी भाई-बहन का आभार। आज भारत अपना पहला जनजातीय गौरव दिवस मना रहा है। आजादी के अमृत महोत्‍सव में इस पूरे आयोजन के लिए मैं पूरे देश का आभार व्‍यक्‍त करता हूं। सेवाभाव से ही आज आदिवासी समाज के लिए मप्र सरकार ने कई बड़ी योजनाओं का शुभारंभ किया है। आज जब कार्यक्रम में गीतों के माध्‍यम से आदिवासी भाई बहन अपनी भावनाएं प्रकट कर रहे थे तो में समझने की कोशिश कर रहा था, मेरे जीवन का बड़ा समय आदिवासी क्षेत्रों में बीता है और मैंने देखा है कि आपके गीतों में कोई न कोई तत्‍व होता है। आज के आपके गीत में आपने जो कहा कि जीवन चार दिनों का है, सबकुछ मिटटी में मिल जाएगा, जीवन मौज मस्‍ती में उड़ा दिया अब जब अंत समय आया तो मन में पछताना व्‍यर्थ है। धरती, खेत-खलिहान किसी के नहीं हैं, अपने मन में गुमान करना व्‍यर्थ है। ये धन-दौलत किसी काम की नहीं है। इसे यहीं छोड़कर जाना है, आप देखिए इस गीत में जो शब्‍द कहे गए हैं वे आदिवासी भाई बहनों ने जीवन के तत्‍व ज्ञान को आत्‍मसात करने के बाद कहे हैं।प्रधानमंत्री ने इस संदर्भ में शिवराज सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि इसी भावना से मप्र सरकार ने भी आदिवासी समाज के लिए कई बड़ी योजनाओं की शुरूआत की है। राशन आपके द्वार और सिकल सेल मिशन, दोनों योजनाएं आदिवासियों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए बड़े प्रयास हैं। आयुष्‍मान योजना के तहत भी अनेक बीमारियों का इलाज आदिवासी और गरीब परिवारों को मिल रहा है। टीकाकरण के लिए भी आदिवासी समाज भी जागरूक रहते हुए अपनी भागीदारी निभा रहा है। सबसे बड़ी महामारी से निपटने के लिए जनजातीय समाज का आगे आना शहर के लोगों के लिए सीखने जैसा है। जनजातीय महापुरुषों के बलिदान को देश भूल नहीं सकता, जिन्‍होंने कंधे से कंधा मिलाकर अपना बलिदान दिया। हम सभी इस ऋण को चुका नहीं सकते लेकिन इस विरासत को संजोकर सम्‍मान दे सकते हैं।प्रधानमंत्री ने कहा कि पद्म-विभूषण बाबा साहब पुरंदरे ने आज नहीं रहे। उन्‍होंने महाराण प्रताप के आदर्शों को देश के सामने रखा1 ये आदर्श हमें प्रेरणा देते रहेंगे। आज जब हम राष्‍ट्रीय मंच से राष्‍ट्र निर्माण में जनजातीय योगदान की बात करते हैं तो कुछ लोगों को हैरानी होती है। ऐसे लोगों को विश्‍वास ही नहीं होता कि जानजातीय समाज ने कोई योगदान दिया है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि जनजातीय योगदान के बारे में कभी बताया ही नहीं गया, देश की आबादी में बड़ा हिस्‍सा होने के बाद भी उनकी उपेक्षा की गई। जनजातीय समाज के योगदान के बिना क्‍या प्रभु राम की सफलता की कल्‍पना की जा सकती है, कभी नहीं। प्रभु श्रीराम ने वनवास के दौरान वनवासी समाज से ही प्रेरणा ली थी। वनवासी समाज की उपेक्षा का पहले की सरकारों ने जो अपराध किया है उस पर लगातार बोला जाना जरूरी है। पहले की सरकारों ने आदिवासियों को हमेश सुख सुविधाओं से वंचित रखा, लेकिन बार-बार उनके वोट से ही सत्‍ता हासिल की। मैंने गुजरात में मुख्‍यमंत्री रहते हुए बहुत सारी योजनाएं शुरू कीं और 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद भी मेरी प्राथमिकता में जनजातीय वर्ग शामिल रहा।प्रधानमंत्री ने अपने उद्बोधन में आगे कहा कि आदिवासी क्षेत्र के किसानों को भी देश के अन्‍य किसानों के जैसे ही तमाम योजनाओं को लाभ दिया जा रहा है। चाहे आवास हो, स्‍वास्‍थ्‍य हो या फि‍र पेयजल हो, सारी सुविधाएं दी जा रही हैं। मप्र के 30 लाख ग्रामीण परिवारों को सीधे घर में पेयजल उपलब्‍ध करवाया जा रहा है, इसमें बड़ा हिस्‍सा जनजातीय ग्रामीण इलाकों का है। मेरा मानना है कि कोई भी समाज विकास में पीछे नहीं रहना चाहिए, आकांक्षी जिलों में 150 से अधिक मेडिकल कालेज खोले जा रहे हैं, प्राकृतिक संपदा से मिलने वाले राजस्‍व का एक हिस्‍सा उसी क्षेत्र के विकास में लगाया जा रहा है, 50 हजार करोड़ रुपये अब तक इस हिस्‍से की राशि दी जा चुकी है। यह आजादी का अमृत काल है आत्‍निर्भरता का काल है। जनजातीय समाज के बगैर आत्‍मनिर्भरता मुमकिन नहीं है। जनजातीय समाज में प्रतिभा की कमी नहीं रही है, लेकिन दुर्भाग्‍य से पहले की सरकारों में जनजातीय समाज को अवसर देने की इच्‍छाशक्ति ही नहीं थी। सृजन आदिवासी समाज की ताकत है, परंपरा का हिस्‍सा है लेकिन आदिवासी परंपरा को बाजार से नहीं जोड़ा गया बल्कि कानून की बेडि़यों में जकड़कर रखा गया। हमने वन कानून में फेरबदल कर इन बेडि़यों को हटा दिया अब आत्‍मनिर्भर बनाकर आदिवासी समाज को बाजार उपलब्‍ध करवाया जा रहा है। ऑनलाइन प्‍लेटफार्म उपलब्‍ध करवाया जा रहा है। हम वनोपज पर एमएसपी दे रहे हैं पहले की सरकारें आठ नौ वनोपजों पर एमएसपी देती थी आज हमने इसमें 90 वनोपजों को शामिल किया। राज्‍यों हमने 20 लाख जमीन के पट्टे् देकर लाखों आदिवासी परिवारों को भूमि अधिकार दिया है। देश में हमने 750 एकलव्‍य आदिवासी आवासीय स्‍कूल खोलने का लक्ष्‍य रखा है, कई राज्‍यों को स्‍कूल शुरू किए जा चुक हैं, ता‍कि जानजातीय वर्ग के बच्‍चे सीधे शिक्षा से जुड़ सकें। नई राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति में स्‍थानीय भाषा को भी प्रमुखता दी गई है। कई राज्‍यों को स्‍कूल शुरू किए जा चुक हैं, ता‍कि जानजातीय वर्ग के बच्‍चे सीधे शिक्षा से जुड़ सकें। नई राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति में स्‍थानीय भाषा को भी प्रमुखता दी गई है, इसका लाभ भी जानजातीय वर्ग को मिलेगा। जनजातीय गौरव दिवस, जैसे हम गांधी, सरदार पटेल की जयंती मनाते हैं वैसे ही भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पूरे भारत में मनाई जाएगी।।इससे पहले मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्‍वागत भाषण देते हुए कहा कि पूरा प्रदेश भगवान बिरसा मुंडा की जन्‍मतिथि पर आदिवासी रंग में रंग गया है। मैं भगवान बिरसा मुंडा को प्रणाम करता हूं साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी का धन्‍यवाद देता हूं कि उन्‍होंने बिरसा मुंडा के सम्‍मान में उनकी जन्‍मतिथि राष्‍ट्रीय गौरव दिवस की घोषणा की है। उन्‍होंने देश की आजादी में आदिवासियों के योगदान का वास्‍तव में सम्‍मान किया है। मैं मध्‍यप्रदेश की साढ़े आठ करोड़ जनता की ओर से प्रधानमंत्री का स्‍वागत करता हूं। भोपाल या प्रदेश में सिर्फ मुगलों का राज नहीं था बल्कि उनसे पहले आदिवासी राजाओं का राज था और उन्‍होंने राज की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्‍यौछावर किए। रानी कमलापति भी भोपाल का गौरव थी। उन्‍होंने अपनी अस्मिता के लिए मुगलों के सामने झुकने के बजाय प्राण न्‍यौछावर करने का कदम उठाया। प्रधानमंत्री ने रानी कमलापति के बलिदान का सम्‍मान करते हुए विश्‍व स्‍तरीय रेलवे स्‍टेशन को रानी कमलापति नाम दिया। इसके लिए में प्रधानमंत्री को धन्‍यवाद देता हूं।

पीएम मोदी के भोपाल दौरे के बीच सीएम शिवराज का कांग्रेस पर वार, कहा- ‘आजादी की लड़ाई को एक परिवार का इतिहास बना दिया’

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नेशनल देशभर में 15 नवम्बर यानि आज के दिन को स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा की जयंती जयंती के रूप में मनाया जाता हैं। इस अवसर पर उन्हें याद करने और श्रद्धांजलि देने के लिए देशभर में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे है जिसके तहत पीएम नरेंद्र मोदी भी भोपाल में जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश सरकार द्वारा आयोजित किये आ रहे कार्यक्रम में शामिल होने आ रहे हैं .इस मौके मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि कांग्रेस और अंग्रेजों ने देश को गलत इतिहास पढ़ाया है।

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा के- ‘मैं भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने के निर्णय के लिए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देता हूं। ये हमारे आदिवासी योद्धाओं की वीरता को प्रदर्शित करने के लिए सही चीज है। अंग्रेजों और कांग्रेस ने हमेशा इतिहास को गलत ढंग से पढ़ाया। स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को एक परिवार की पीढ़ी का इतिहास बना दिया।’

मध्यप्रदेश में हमने जनजातीय भाई-बहनों के कल्याण के लिए जो कई योजनाएं बनाई हैं,प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी उनका आज शुभारंभ करेंगे।

हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम उन्होंने रानी कमलापति के नाम पर रखा है। यह रानी कमलापति के साथ भोपाल व म.प्र. का भी सम्मान है।

नहीं छोड़ते शिवराज कोई भी मौका

दरअसल कुछ समय से सीएम शिवराज सिंह चौहान कांग्रेस पार्टी और विशेषकर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ पर निशाना साधने में कोई कसर नहीं छोड़ते और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भी उनपर आरोप लगाने में देर नहीं लगाते. आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला इन दो नेताओ के बीच बहुत समय से देखने मिल रहा है. अब यह देखना दिलचस्प होगा के मप्र कांग्रेस मुख्यमंत्री शिवराज के इस आरोप का क्या जवाब देती है .

हबीबगंज नहीं अब रानी कमलापति रेलवे स्टेशन कहिए, जानिए- कौन थीं रानी कमलापति

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भोपाल। देश का पहला वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन हबीबगंज अब रानी कमलापति के नाम से जाना जाएगा। मध्यप्रदेश सरकार के नोटिफिकेशन जारी होते ही स्टेशन का नाम बदल दिया गया है।  हबीबगंज स्टेशन का नाम रानी कमलापति किए जाने के बाद रेलवे ने नया कोड भी जारी कर दिया है। पश्चिम-मध्य रेलवे ने आदेश जारी कर नया अल्फा कोड RKMP दिया है। अभी तक हबीबगंज का कोड HBJ था। फिलहाल हबीबगंज स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 के आउटर और प्लेटफॉर्म नंबर एक पर ही यह नाम बदला गया है। अन्य प्लेटफार्म और सेकंड एंट्री पर अभी कोई बदलाव नहीं हुआ है। बाहर भी रानी कमलापति रेलवे स्टेशन नाम का बैनर लगा दिया है। साथ ही, हबीबगंज नाम को कपड़े से ढंक दिया गया है। मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म Koo पर पोस्ट कर कहा कि  ये गर्व, आनंद व उत्साह का क्षण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त रेलवे स्टेशन तैयार करवाया और अब इसका नाम हबीबगंज से बदलकर अंतिम हिंदू रानी गोंड वंश की रानी कमलापति जी के नाम किया। हम सभी प्रधानमंत्री जी का हृदय से धन्यवाद करते हैं।   ये गर्व, आनंद व उत्साह का क्षण है कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त रेलवे स्टेशन तैयार करवाया और अब इसका नाम हबीबगंज से बदलकर अंतिम हिंदू रानी गोंड वंश की रानी कमलापति जी के नाम किया। हम सभी प्रधानमंत्री जी का हृदय से धन्यवाद करते हैं।  जानें- कौन हैं रानी कमलापति…

इतिहास पर गौर करें, तो रानी कमलापति भोपाल की अंतिम गोंड आदिवासी और हिंदू रानी थीं। अपनी आबरू की रक्षा के लिए उन्होंने जल समाधि ले ली थी। भोपाल में आर्च ब्रिज और कमला पार्क उन्हीं के नाम पर है। गोंड समुदाय का राजवंश गिन्नौरगढ़ से बाड़ी तक फैला था। राजा रायसिंह का वर्ष 1362 से 1419 तक 57 वर्ष का कार्यकाल रहा। रायसिंह ने रायसेन किला बनवाया था। 14वीं ईस्वी में जगदीशपुर (इस्लाम नगर) में गोंड राजाओं का आधिपत्य रहा। इस महल को भी गोंड राजाओं द्वारा बनवाया गया था।

 

बचपन से ही बुद्धिमान और साहसी थीं कमलापति

बता दें कि16वीं ईस्वी में चैन सिंह बाड़ी जिला रायसेन के अंतिम शासक रहे। 16वीं सदी में सीहोर जिले की सलकनपुर रियासत के राजा कृपाल सिंह सरौतिया थे।  उनके यहां एक कन्या का जन्म हुआ। उसकी सुंदरता को देखते हुए उसका नाम कमलापति रखा गया। वह बचपन से ही बुद्धिमान और साहसी थीं। शिक्षा, घुड़सवारी, मलयुद्ध और तीर कमान चलाने में उन्हें महारत हासिल थी। अनेक कलाओं से पारंगत राजकुमारी सेनापति भी रहीं। वह पिता के सैन्य बल और महिला साथी दल के साथ युद्ध में शत्रुओं से लोहा लेती थीं। पड़ोसी राज्य अकसर खेत, खलिहान, धन संपत्ति लूटने के लिए आक्रमण किया करते थे। सलकनपुर रियासत की देखरेख करने की जिम्मेदारी राजा कृपाल सिंह सरौतिया और उनकी बेटी राजकुमारी कमलापति पर थी।

राजा निजाम शाह से हुआ था विवाह

भोपाल से 55 किमी दूर 750 गांवों को मिलाकार गिन्नौरगढ़ राज्य बनाया गया जो देहलावाड़ी के पास आता है। इसके राजा सूराज सिंह शाह (सलाम) थे। इनके पुत्र निजाम शाह थे। निजाम शाह बहादुर, निडर और हर कार्यक्षेत्र में निपुण थे। उन्हीं से रानी कमलापति का विवाह हुआ था। राजा निजाम शाह ने रानी कमलापति को प्रेम स्वरूप 1700 ईस्वी में भोपाल में सात मंजिला महल का निर्माण करवाया, जो लखौरी ईंट और मिट्टी से बनवाया गया था। यह महल अपनी भव्यता, सुंदरता और खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध था। रानी कमलापति का वैवाहिक जीवन काफी खुशहाल व्यतीत हो रहा था। उन्हें एक पुत्र की प्राप्ति हुई, जिसका नाम नवल शाह था।   रानी कमलापति की बुद्धिमत्ता,साहस और अद्वितीय शासकीय गुणों से हम सभी परिचित हैं। उन्होंने जल समाधि लेकर नारी सम्मान के साथ-साथ धर्म और संस्कृति की भी रक्षा की।

भोपाल रियासत का गौरव ’गोंड रानी कमलापतिःभोपाल की अन्तिम हिन्दू रानी’ के विषय में मेरे विचार…रिश्तेदार ने जहर देकर निजाम शाह को मार दिया था

सलकनपुर राज्य में बाड़ी किले के जमींदार का लड़का चैन सिंह राजकुमारी कमलापति की शादी होने के बाद भी उनसे विवाह करने की इच्छा रखता था। उसने कई बार राजा निजाम शाह को मारने की कोशिश की, जिसमें वह असफल रहा। एक दिन प्रेम पूर्वक उसने राजा निजाम शाह को भोजन पर आमंत्रित किया और भोजन में जहर देकर हत्या कर दी। राजा निजाम शाह की मौत की खबर ने पूरे गिन्नौरगढ़ में खलबली पैदा कर दी। इसके बाद रानी कमलापति को अकेले जानकर उन्हें पाने की नीयत से गिन्नौरगढ़ के किले पर उसने हमला कर दिया। रानी कमलापति ने उस समय अपने कुछ वफादारों और 12 वर्षीय बेटे नवल शाह के साथ भोपाल में बने इस महल में छिप जाने का निर्णय लिया। यह उस समय सुरक्षा की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण महल था।

बदला लेने के लिए रानी ने ली थी अफगानियों की मदद

कुछ दिन भोपाल में समय बिताने के बाद रानी कमलापति को पता चला कि भोपाल की सीमा के पास कुछ अफगानी आकर रुके हुए हैं। इन्होंने जगदीशपुर (इस्लाम नगर) पर आक्रमण कर उसे अपने कब्जे में ले लिया था। इन अफगानों का सरदार दोस्त मोहम्मद खान था, जो पैसा लेकर युद्ध लड़ते थे। लोक मान्यता है कि रानी कमलापति ने दोस्त मोहम्मद को एक लाख मुहरें देकर चैन सिंह पर हमला करने को कहा था।

दोस्त मोहम्मद ने की थी चैन सिंह की हत्या

दोस्त मोहम्मद ने गिन्नौरगढ़ के किले पर हमला कर दिया था। जिसमें चैन सिंह मारा गया और किले को हड़प लिया। रानी कमलापति को अपने छोटे बेटे की परवरिश की चिंता थी। उन्होंने दोस्त मोहम्मद के इस कदम पर कोई आपत्ति नहीं जताई, लेकिन दोस्त मोहम्मद अब सम्पूर्ण भोपाल की रियासत पर कब्जा करना चाहता था। उसने रानी कमलापति को अपने हरम में शामिल होने और शादी करने का प्रस्ताव रखा

रानी के बेटे से मोहम्मद के बीच हुआ था युद्ध

दोस्त मोहम्मद खान के नापाक इरादे को देखते हुए रानी कमलापति का 14 वर्षीय बेटा नवल शाह अपने 100 लड़ाकों के साथ लालघाटी में युद्ध करने चला गया। इस घमासान युद्ध में मोहम्मद खान ने नवल शाह को मार दिया। इस स्थान पर इतना खून बहा कि यहां की जमीन लाल हो गई और इस कारण इसे लालघाटी कहा जाने लगा। इस युद्ध में 2 लड़के बच गए थे, जो किसी तरह अपनी जान बचाते हुए मनुआभान की पहाड़ी पर पहुंच गए। उन्होंने वहां काला धुआं कर रानी कमलापति को संकेत दिया कि वे युद्ध हार गए हैं और आपकी जान को खतरा है।

रानी कमलापति ने ली जल समाधि

रानी कमलापति ने विषम परिस्थति को देखते हुए अपनी इज्जत को बचाने के लिए बड़े तालाब बांध का संकरा रास्ता खुलवाया। इससे बड़े तालाब का पानी रिसकर दूसरी तरफ आने लगा। जिसे आज छोटा तालाब के रूप में जाना जाता है। रानी कमलापति ने महल की समस्त धन, दौलत, जेवरात, आभूषण आदि इसमें डालकर स्वयं जलसमाधि ले ली। दोस्त मोहम्मद खान जब अपनी सेना को साथ लेकर लालघाटी से इस किले तक पहुंचा, उतनी देर में सब कुछ खत्म हो गया था। मोहम्मद खान को न रानी कमलापति मिली और न ही धन दौलत। रानी कमलापति ने जीते जी भोपाल पर परधर्मी को नहीं बैठने दिया। स्रोतों के अनुसार रानी कमलापति ने वर्ष 1723 में अपनी जीवनलीला खत्म की थी। उनकी मृत्यु के बाद दोस्त मोहम्मद खान के साथ ही नवाबों का दौर शुरू हुआ

देश भर में लोग बना रहे बाल दिवस

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सोशल मीडिया पर #बेहतरकलबेहतर ज़िंदगी नाम से चल रही मुहिम

 

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत के सबसे बड़े नेताओ में माने जाते है और उनके जन्म दिन  को देश में बाल दिवस के रूप में बनाया जाता है. कहा जाता है की बच्चों को लेकर उनके मन के बहुत प्रेम था और वे उनमे भारत का भविष्य देखते थे. इसी कारण उनके जन्मदिन को पूरे देश में बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है और इस दिन मुख्य तौर पर बच्चों पर केन्द्रित जआयोजन किए जाते है, स्कूल के कार्यक्रमों के लेकर सरकारी आयोजनो तक आज के दिन आयोजित किए जाते है.

 

इसी कडी में सोशल मीडिया भी अछूता नहीं है और सोशल मीडिया ऐप कू कर लोग #बेहतरकलबेहतर_ज़िंदगी नाम से हैश्टैग चला रहे है. इस हैश्टैग के ज़रिए लोग बाल जीवन की महत्वता समझा रहे है और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर कल की माँग कर रहे है. ****_#बेहतर_कल_बेहतर_ज़िंदगी अगर बच्चों और  देश  का भबिस्य तभी बन  सकता है सभी धर्म जातपात ऊंचनीच त्यागकर मानबता का पाठ सिक्षा क़े साथ पढ़ाना जरूरी है बरना धर्मो के ठेके दार  एक  दूसरे  नफरत पैदा करते रहेगे****_#बेहतर_कल_बेहतर_ज़िंदगी अपना बेहतर कल बनाने आओ सँवारे उनका आज ,खुशहाल जिंदगी का उनकी फिर होगा सुखी आगाज |इसी में ख़ुशी है ,इसी में उसकी बंदगी ,आओ आज बनायें हम बच्चों की जिंदगी |नवाब मलिक की बेटी ने भी किया समर्थन

 

महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और रंकपा नेता नवाब मलिक जो आजकल अपने बयानो को लेकर सुर्खियों में रहते है उनकी बेटी नीलोफर खान मलिक जो कि खुद एक सोशल वर्कर है उन्होंने भी इस हैश्टैग को अपना समर्थन दिया और सोशल मीडिया ऐप कू पर अपने विचार रखते हुए  कहा के-

 

प्रिय बच्चों, परिस्थितियाँ कठिन रही हैं, फिर भी आप दृढ़ रहे हैं। माता-पिता के रूप में, हम आशा करते हैं और हर रोज आपकी रक्षा करना चाहते हैं और आपको बाहरी दुनिया के खतरों से बचाना चाहते हैं। नेताओं ने भी किया  याद

 

पंडित जवाहरलाल नेहरू के जनमदिन के अवसर पर सभी राजनैतिक पार्टियों ने उन्हें  याद किया और देश को बाल दिवस की शुभकामनाए दी.

 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने Koo पर लिखा – देश के उज्ज्वल भविष्य और उन्नति के कर्णधार सभी बच्चों व प्रदेशवासियों को ’बाल दिवस’ की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं।

 

प्रत्येक बच्चे का उन्नयन @UPGovt की शीर्ष प्राथमिकता है।

 

आइए, आज हम सभी बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहभागी बनने का प्रण लेकर ’बाल दिवस’ को सार्थकता प्रदान करें। ****देश के उज्ज्वल भविष्य और उन्नति के कर्णधार सभी बच्चों व प्रदेशवासियों को ’बाल दिवस’ की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं।

 

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कू पर लिखा – सभी बच्चों को बाल दिवस की हार्दिक बधाई। बच्चों तुम देश के कर्णधार हो। शिक्षा व खेल समेत हर क्षेत्र में आगे बढ़ो। अपना लक्ष्य तय कर लो और उसे प्राप्त करने के पथ पर निकल पड़ो। एक सुंदर और सफल भविष्य तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा है।

 

मेरी शुभकामनाएं सदैव तुम्हारे साथ हैं: CM

 

सभी बच्चों को बाल दिवस की हार्दिक बधाई। बच्चों तुम देश के कर्णधार हो। शिक्षा व खेल समेत हर क्षेत्र में आगे बढ़ो। अपना लक्ष्य तय कर लो और उसे प्राप्त करने के पथ पर निकल पड़ो। एक सुंदर और सफल भविष्य तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा है। मेरी शुभकामनाएं सदैव तुम्हारे साथ हैं

108 वर्ष बाद कनाडा से लाई गई भारत, कौन हैं मां अन्नपूर्णा देवी, क्या है उनका काशी से नाता?

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नई दिल्ली। लगभग सौ साल पहले काशी से चोरी गई मां अन्नपूर्णा की मूर्ति कनाडा से काशी आई है, जिसकी आज पुनः प्राण प्रतिष्ठा की जा रही है। सीएम योगी आदित्यनाथ मां अन्नपूर्णा की मूर्ति को पुनर्स्थापित करेंगे। मां को बाबा विश्वनाथ के गर्भगृह के ठीक बगल में विराजमान किया जाएगा। विधिविधान से काशी विश्वनाथ मंदिर के ईशान कोण में प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा होगी।

हरिप्रबोधिनी एकादशी पर सोमवार को कनाडा से लाई गई अन्नपूर्णेश्वरी की मूर्ति समेत पांच विग्रह स्थापित किए जाएंगे।

पीएम मोदी ने दी थी जानकारी

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 नवंबर 2020 को मन की बात कार्यक्रम में देश के लोगों को मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा कनाडा में मिलने की जानकारी देते हुए कहा था कि हर एक भारतीय को यह जानकर गर्व होगा कि मां अन्नपूर्णा की सदियों पुरानी प्रतिमा कनाडा से भारत वापस लाई जा रही है। यह करीब 108 साल पहले वाराणसी के एक मंदिर से चोरी हुई थी। बनारस शैली में उकेरी गई 18वीं सदी की यह मूर्ति कनाडा की यूनिवर्सिटी आफ रेजिना में मैकेंजी आर्ट गैलरी की शोभा बढ़ा रही थी। इस आर्ट गैलरी को 1936 में वकील नार्मन मैकेंजी की वसीयत के अनुसार तैयार किया गया था।

जानें- कैसी है मां अन्नपूर्णा की मूर्ति

कनाडा से वापस आई इस प्रतिमा में मां अन्नपूर्णा के एक हाथ में खीर की कटोरी और दूसरे हाथ में चम्मच है। माना जा रहा है 18वीं शताब्दी की ये प्रतिमा 1913 में काशी के एक घाट से चुरा ली गई थी, और फिर इसे कनाडा ले जाया गया। प्राचीन प्रतिमा कनाडा कैसे पहुंची, यह राज आज भी बरकरार है। लोगों का कहना है कि दुर्लभ और ऐतिहासिक सामग्रियों की तस्करी करने वालों ने प्रतिमा को कनाडा ले जाकर बेच दिया था। वहां यह मैकेंजी आर्ट गैलरी में रेजिना विश्वविद्यालय के संग्रह का हिस्सा थी। इस मूर्ति की वसीयत 1936 में नॉर्मन मैकेंज़ी द्वारा करवाई गई थी और गैलरी के संग्रह में जोड़ा गया था। जी किशन रेड्डी के मुताबिक 2014 के बाद से अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में 42 दुर्लभ धरोहरों की देश वापसी हो चुकी है, जबकि 1976 से 2013 तक कुल 13 दुर्लभ धरोहर ही वापस लाई जा सकी थीं।  आज देवोत्थान एकादशी के पावन अवसर पर माँ अन्नपूर्णा की दुर्लभ प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा पुनः श्री काशी विश्वनाथ धाम में होगी।

यह बहुप्रतीक्षित ऐतिहासिक क्षण आदरणीय प्रधानमंत्री जी के प्रयासों का सुफल है।

माँ की कृपा सम्पूर्ण सृष्टि पर बनी रहे। 

जय माँ अन्नपूर्णा!     कौन है मां अन्नपूर्णा देवी? 

स्कंदपुराण के काशीखंड में मां अन्नपूर्णा के बारे में विस्तृत जानकारी मिलती है जिसमें मां के स्वरूप का वर्णन कुछ इस प्रकार से मिलता है- ‘मां अन्नपूर्णा’ का रूप काफी मनमोहक और सुंदर है। वे मां दुर्गा का ही एक रूप हैं, जो कि अपने भक्तों से बहुत प्रेम करती हैं। ‘मां अन्नपूर्णा’ अन्न की देवी हैं, इन्हीं के आशीष से पूरे विश्व में भोजन का संचालन होता है। उन्हें ‘मां शाकुम्भरी’ के नाम से भी जाना जाता है।

काशी से क्या है मां अन्नपूर्णा का नाता?

शास्त्रों के अनुसार मां अन्नपूर्णा ने मां पार्वती के रूप में भगवान शिव से विवाह किया था। शिवजी कैलाश पर्वत के वासी थे। लेकिन हिमालय की पुत्री पार्वती को कैलाश यानी कि अपने मायके में रहना पसंद नहीं आया इसलिए उन्होंने काशी, जो कि भोलेनाथ की नगरी कही जाती है, वहां रहने की इच्छा जाहिर की, जिसके बाद शिवजी उन्हें काशी ले आए। इसलिए काशी ही मां अन्नपूर्णा की नगरी कही जाती है। इसलिए कहा जाता है विश्वनाथ की नगरी में कोई भी भूखा नहीं रहता है। काशी में ही ‘मां अन्नपूर्णा’ का सुंदर मंदिर हैं, जो कि अन्नकूट के दिन खुलता है और यहां उस दिन 56 तरह के भोग लगते हैं।

यूजीसी अध्यक्ष के लिए किस्मत अजमाने में लगे वरिष्ठ शिक्षाविद

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इंदौर । विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) में नए अध्यक्ष को चुनने के लिए प्रक्रिया शुरू हो गई है। इंदौर-भोपाल और ग्वालियर से कई वरिष्ठ शिक्षाविदों व प्राध्यापक दिलचस्पी दिखा रहे हैं। उन्होंने अपना-अपना बायोडाटा भेजा है। वैसे शिक्षा मंत्रालय ने 30 नवंबर तक आवेदन मांगे है, जिसमें आवेदक की उम्र 60 साल से कम की उम्र सीमा रखी है। इसके चलते कुछ आवेदकों के बायोडाटा स्क्रटूनी में ही बाहर हो सकते हैं।

वहीं इन दिनों सर्च कमेटी के सदस्यों का गठन किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक उन आवेदकों पर विचार नहीं किया जाएगा, जिनके खिलाफ कोई विभागीय जांच या फिर कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज हो। हालांकि वर्तमान अध्यक्ष डा. डीपी सिंह का दिसंबर में कार्यकाल पूरा होने वाला है। डा. सिंह देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति भी रह चुके है। दिसंबर पहले सप्ताह में प्रो. सिंह 65वें साल में प्रवेश करेंगे। इस लिहाज से उनका कार्यकाल पूरा हो जाएगा। उनके पद छोड़ने से पहले शिक्षा मंत्रालय ने यूजीसी के नए अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

नियमानुसार कार्यकाल पांच वर्ष का रहेगा। इसके लिए आयु सीमा निर्धारित कर दी। 60 साल से कम उम्र वालों को आवेदन करने पर जोर दिया है, क्योंकि मंत्रालय ने पांच साल का कार्यकाल रखा है। ताकि 65 वर्ष की आयु तक कार्यकाल पूरा हो सके। मंत्रालय ने बायोडाटा की सॉफ्ट कापी ई-मेल से भेजने के लिए निर्देश दिए है। अध्यक्ष के लिए कुछ मानक तय कर रखे है, जिसमें नवचार, कुशल नेतृत्व, शिक्षा व शोध में उत्कृष्ठ कार्य, संस्थान निर्माण में गतिशील, विचार केंद्रीत नेतृत्व आदि शामिल है।