माता वैष्णो देवी भवन में भगदड़ में मारे गए सभी 12 श्रद्धालुओं की पहचान कर ली गई है। इसी बीच प्रदेश के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने हादसे में मारे जाने वाले श्रद्धालुओं के परिजनों को 10 लाख रुपये और घायलों को दो लाख रुपये देने का ऐलान किया है। भवन में भगदड़ में मारे गए 12 श्रद्धालुओं की पहचान कर ली गई है। इस बीच, उपराज्यपाल ने हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच के आदेश दे दिए हैं। इसके साथ ही मृतकों के स्वजन को 10-10 लाख रुपये व घायलों को दो-दो लाख रुपये देने की घोषणा की है। मृतकों व घायलों में अधिकतर श्रद्धालु दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के थे। घायल श्रद्धालुओं को कटड़ा के नारायण अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। हादसा भवन के गेट नंबर तीन के पास हुआ। उस समय भवन माता के श्रद्धालुओं से खचाखच भरा हुआ था। पुलिस चौकी से कुछ ही दूर क्लाक रूम के बाहर से श्रद्धालु आ-जा रहे थे। जिस जगह यह हादसा हुआ वहां रास्ता काफी तंग है। वहां पर भीड़ इतनी थी कि श्रद्धालु आगे नहीं बढ़ पा रहे थे।
महाराष्ट्र के कोल्हापुर से 18 मजदूरों को वापस लेकर आई सिवनी पुलिस
सिवनी। जबलपुर के बरगी व जिले के लखनादौन, धूमा क्षेत्र से करीब एक हजार किलोमीटर दूर महाराष्ट्र के कोल्हापुर में मजदूरी करने गए 18 मजदूरों को जिले की लखनादौन पुलिस वापस लेकर आई है। सभी मजदूरों का शनिवार को मेडिकल परीक्षण कराने के बाद कोरोना रैपिड टैस्ट कराया, जिसमें रिपोर्ट निगेटिव आने पर गांव वापस लाकर अपने परिवार से मिला दिया गया है।
गन्ना कटाई कराने ले गया था : दरअसल बरगी, लखनादौन व धूमा क्षेत्र के करीब 18 मजदूरों को गांव का परिचित एक व्यक्ति एडवांस मजदूरी राशि देकर सिवनी से महाराष्ट्र के कोल्हापुर गन्ना कटाई कराने ले गया था, लेकिन वहां जाने के बाद मजदूरों से गन्ना कटाई कराने की बजाए ईट बनवाई जा रही थी।इसकी जानकारी मिलने पर मजदूरों के स्वजनों ने शिकायत जबलपुर पुलिस से की थी। जबलपुर पुलिस ने सिवनी पुलिस को मामले की जानकारी दी। इसके बाद एसपी कुमार प्रतीक ने लखनादौन पुलिस को थाना स्तर पर टीम गठित कर मजदूरों को वापस लाने कोल्हापुर जाने के निर्देश दिए थे। लखनादौन से कोल्हापुर पहुंची पुलिस टीम शुक्रवार देर शाम अलग-अलग गांव के सभी 18 मजदूरों को वापस लखनादौन लेकर आई। शनिवार को सभी मजदूरों का मेडिकल परीक्षण कराने के साथ ही कोरोना का रैपिड टेस्ट कराया गया।
जांच के बाद होगी कार्रवाई : पुलिस अधिकारियाें का कहना है कि एडवांस राशि देकर मजदूरों को कोल्हापुर ले जाया गया था। फिलहाल इस मामले में किसी के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। मजदूरों के बयान लेकर जांच को आगे बढ़ाया जाएगा, यदि कोई गड़बड़ी सामने आती है, तो प्रकरण दर्ज कर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
छिंदवाड़ा में ओमिक्रोन, नीदरलैंड से आई युवती कोरोना पाजिटिव
छिंदवाड़ा। जिले में फिर से कोरोना ने दस्तक दे दी है। कोरोना के ओमिक्रोन वैरिएंट का मरीज छिंदवाड़ा में मिला है। 22 वर्षीय युवती जो कि परासिया मार्ग स्थित त्रिमूर्ति अपार्टमेंट में रह रही थी, उसकी रिपोर्ट दिल्ली में कोरोना पाजीटिव आई है। युवती पांच दिन पहले ही नीदरलैंड से भारत आई थी, जिसकी जांच दिल्ली एयरपोर्ट पर हुई थी। युवती में ओमिक्रोन वेरिएंट के लक्षण मिले हैं। पुष्टि होने के बाद जिला प्रशासन के अधिकारी त्रिमूर्ति अपार्टमेंट पहुंचे तथा युवती को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
जिला प्रशासन के अनुसार 22 वर्षीय युवती 26 दिसंबर को नीदरलैंड से भारत आई थी। इस दौरान युवती की जांच दिल्ली एयरपोर्ट पर की गई थी। यह युवती 27 दिसंबर को दिल्ली से छिंदवाड़ा आई। कोरोना गाइडलाइन के अनुसार युवती को होम आइसोलेशन में रखा गया था। 30 दिसंबर को दिल्ली में युवती की जांच रिपोर्ट आई, जिसमें कोरोना के ओमिक्रोन वेरियंट के लक्षण मिले। इसके बाद दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग द्वारा युवती से मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उसका नंबर बंद था। तब छिंदवाड़ा के जिला प्रशासन से संपर्क किया गया। सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन अलर्ट हुआ तथा युवती को खोजकर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। युवती को स्वास्थ्य को लेकर कोई समस्या नहीं है, युवती को जिला अस्पताल में भर्ती कराने के बाद जिला प्रशासन ने उसके संपर्क में आए सभी सदस्यों को होम क्वारेंटाइन कर दिया है। युवती के संपर्क में आए अन्य लोगों की भी जानकारी जिला प्रशासन जुटा रहा है।
10 जनवरी से बुजुर्गों और हेल्थ वर्कर्स को लगेगी कोरोना वैक्सीन की प्रिकॉशन डोज
देश में 10 जनवरी से हेल्थ वर्कर्स और 60 साल के ऊपर के वरिष्ठ नागरिकों को कोविड वैक्सीन की प्रिकॉशन डोज लगना शुरू होगी। ऐसे समय में जब दुनिया कोविड महामारी के नए ओमिक्रोन वैरिएंट से लड़ रही है। भारत सरकार नए दिशा-निर्देशों को लागू कर स्थिति काबू करने में जुटी है। कोरोना वायरस के नए वैरिएंट के खिलाफ लड़ने के लिए बूस्टर डोज का विचार पहले की आ चुका है। कई देशों में नागरिकों को लगने भी लगा है। हालांकि भारत में इसे बूस्टर डोज नहीं बता रहा हैं। 25 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैक्सीन को लेकर बड़ी घोषणा की थीं। उन्होंने इसे एहतियाती खुराक बताया था। वहीं 3 जनवरी से 15 से 18 साल के बच्चों को भी कोवैक्सीन लगना शुरू होगी। सरकार ने कोविड वैक्सीन की तीसरी डोज के लिए गाइडलाइन भी जारी की है। आइए जानते हैं कोरोना वैक्सीन की प्रिकॉशन डोज से जुड़ी हर बात।
किन लोगों को लगेगी प्रिकॉशन डोज?
हेल्थकेयर वर्कर्स, फ्रंटलाइन वर्कर्स और 60 साल से ऊपर के बुजुर्ग प्रिकॉशन डोज लगवा सकते हैं। ये डोज दूसरी खुराक के 9 महीने बाद दी जाएगी। तीसरी डोज के लिए पात्र लाभार्थियों को एक मैसेज भी आएगा। जिससे पता चल सके कि उन्हें तीसरी वैक्सीन कब लगवानी है।
इन डॉक्यूमेंट्स की जरूरत होगी?
60 साल और उससे अधिक आयु के नागरिकों को प्रिकॉशन डोज के लिए डॉक्टर से कई सर्टिफिकेट प्रस्तुत करने की जरूरत नहीं है। हालांकि ऐसे व्यक्तियों को तीसरी खुराक लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेने को कहा गया है।
कैसे करें बुकिंग?
कोविन प्लेटफॉर्म पर वैक्सीनेशन स्लॉट बुक कर सकेंगे। गाइलाइन्स के अनुसार वैक्सीन सेंटर में जाकर भी स्लॉट बुक कर सकते हैं।
क्या प्रिकॉशन डोज का सर्टिफिकेट मिलेगा?
लाभार्थियों को प्रिकॉशन डोज लगने के बाद सर्टिफिकेट दिए जाएगा। वहीं तीसरी खुराक सरकारी सेंटर्स पर फ्री में लगेगा। प्राइवेट अस्पताल पर इसके लिए पैसे देने पड़ेंगे।
भेल की जमीन पर एक लाख लोगों को रोजगार देने का सरकार ने बनाया प्लान
भोपाल : मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कारखाना स्थापना के बाद से अब तक भारत हेवी इलेक्ट्रीकल्स लिमिटेड धीरे-धीरे अपना कारोबार समेट चुका है। कर्मचारियों से लेकर प्रॉडक्शन तक 25 फीसदी से भी कम रह गया है। ऐसे में यदि भेल प्रबंधन अपनी अनुपयोगी जमीन राज्य सरकार को वापस कर दे तो उद्योग विभाग यहां एक लाख लोगों को रोजगार देने की महती योजना को अंजाम दे सकता है।
राजस्व विभाग के आदेश पर पिछले वर्ष भोपाल कलेक्टर भेल को दी गई छह हजार एकड़ जमीन में से अनुपयोगी पड़ी 1161 एकड़ जमीन वापस राजस्व विभाग के नाम से दर्ज कर चुके है लेकिन भेल प्रबंधन इस पर हाईकोर्ट से स्टे ले चुका है। भेल भोपाल की जमीन वापस नहीं देना चाहता है। इसके चलते राजधानी भोपाल का औद्योगिक विकास अटक गया है।
भेल यदि राज्य सरकार को जमीन वापस करे तो यहां एक लाख लोगों को रोजगार देने के लिए नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने का प्लान तैयार है। औद्योगिक नीति निवेश एवं प्रोत्साहन विभाग के प्रमुख सचिव संजय शुक्ला का कहना है कि गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र से लगी हुई भेल की जमीन है। यदि यह जमीन मध्यप्रदेश को वापस मिल जाए तो यहां सूचना र्प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाओं, तकनीकी सेवाओं, स्टार्ट अप, एप आधारित सेवाएं, एजूकेशन, बॉयोटेक्नालॉजी आधारित उद्योग, नालेज आधारित सेवाएं जिनमें बिल्डिंग में बैठकर काम करना होता है। इन्हें शुरु करने का प्लान तैयार है। इसमें एक से डेढ़ लाख युवाओं को रोजगार मिल सकता है। जमीन मिल जाए तो डिटेल प्लान भी हम तैयार करेंगे।
प्रमुख सचिव राजस्व के निर्देश पर भेल की रिक्त पड़ी 1161 एकड़ जमीन राजस्व विभाग के नाम पर कलेक्टर ने दर्ज कर दी थी लेकिन भेल ने इस पर हाई कोर्ट से स्टे ले लिया हे। कोर्ट में भेल को स्टे इस आधार पर मिला है कि जमीन दिए जाने के लिए केन्द्र सरकार और भेल के बीच अनुबंध हुआ था ऐसे में राज्य सरकार केन्द्र की अनुमति के बिना यह जमीन वापस नहीं ले सकती है। इधर राजस्व विभाग और जिला प्रशासन कोर्ट में यह जवाब पेश कर चुका है कि कंपनी को जमीन नि:शुल्क दी गई थी। उसका प्रीमियम और भू भाटक भी राज्य शासन ने ही भरा था। केन्द्र और राज्य के बीच इस जमीन को लेकर कोई अनुबंध नहीं हुआ था। भेल प्रबंधन भी वर्ष 2002 में राज्य शासन को लिखकर दे चुका है कि खाली पड़ी तीन हजार एकड़ जमीन शासन वापस लेकर उसकी राशि वापस कर दे।
कांग्रेस की कैलाशनाथ काटजू सरकार के कार्यकाल में वर्ष 1959 से 1962 के बीच भेल को 6045 एकड़ जमीन नि:शुल्क आबंटित की गई थी। इसमें से चार हजार एकड़ जमीन पर कारखाना और आवासीय परिसर बनाया गया था। दो हजार एकड़ जमीन शुरु से ही खाली पड़ी है। इसमें से 764.5 एकड़ से अधिक जमीन पर अतिक्रमण हो चुका है।
भोपाल के एसडीएम हुजूर आकाश श्रीवास्तव का कहना है कि भेल की जो अनुपयोगी जमीन राजस्व विभाग के नाम पर दर्ज की गई है उस पर भेल ने हाईकोर्ट से स्टे ले लिया है। स्टे वेकेट कराने और अर्ली हियरिंग के लिए प्रशासन का प्रस्ताव कोर्ट में लगा हुआ है।
मध्यप्रदेश में बने सात जांच आयोग, आधे के अब तक नहीं आयी फाइनल रिपोर्ट
भोपाल : मध्यप्रदेश में पिछले आठ सालों में राज्य सरकार ने विभिन्न घटनाओं को लेकर सात जांच आयोग गठित किए लेकिन अभी तक चार आयोगों की रिपोर्ट पर विभागीय कार्यवाही ही पूरी नहीं हो पाई है। फाइनल रिपोर्ट अब तक विधानसभा में पटल पर नही रखी गई है।
मध्यप्रदेश में वर्ष 2015 में भिंड जिले में हुए गोलीचालन की घटना के लिए जिला एवं सत्र न्यायाधीश अखिलेश कुमार श्रीवासतव अज्ञैर सेवानिवृत्त अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सीपी कुलश्रेष्ठ की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया था। इस आयोग को जिन बिन्दुओं पर जांच करनी थी उनमें ग्राम पड़कौली के देवेन्द्र सिंह भदौरिया को किस अपराध के अधीन गिरफ्तार किया गया था और उसका गिरफ्तारी वारंट किस न्यायालय द्वारा जारी किया गया था। ग्राम वासियों ने किन परिस्थितियों के अधीन गिरफ्तारी वारंट का निष्पादन कर रहे पुलिस बल पर हमला किया और बंदूक से गोली चालन किया गया।
रणसिंह भदौरिया की मौत कि न परिस्थितियों मे हुई और उसके क्या कारण रहे। भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकनरे के संबंध में सुझाव और घटना से जुड़े अनुषांकिगक विषयों पर आयोग को विचार करना था। छह साल बाद भी अभी आयोग की फाइनल रिपोर्ट विधानसभा में पेश नहीं की गर्ठ है। इस मामले में विभागीय कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।
इसी तरह तीन अगस्त 2015 को ग्वालियर जिले के गोसपुरा नंबर दो मानमंदिर के समीप पुलिस मुठभेड़ में धमेन्द्र सिंह कुशवाह की मौत के मामले में सेवानिवृत्त अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सीपी कुलश्रेष्ठ की अध्यक्षता में जांच आयोग गठित किया गया था। आयोग को यह जांच करना था कि धमेन्द्र कुशवाह को गोसपुरा नंबर दो मानमंदिर टाकीज के पास से गिरफ्तार किया गया था तो किस अपराध में, इसके अलावा कुशवाह की मौत किन परिस्थितियों में हुईथी। भविष्य में इस तरह की घटनाए ना हो उसके लिए सुझाव भी मांगे गए थे। इस पूरे मामले में अभी भी विभागीय कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।
बारह सितंबर 2015 को झाबुआ जिले के पेटलावद में हुए विस्फोट की घटना की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश आर्येन्द्र कुमार सक्सेना की अध्यक्षता में जांच आयोग गठित किया गया था। इसमें यह जांच की जाना था कि किन परिस्थितियों में घटना हुई और कौन इसके लिए उत्तरदायी है। भवन के स्वामी अथवा किरायेदार के पास विस्फोटक संग्रहण या उपयोग करने का लाइसेंस था। इसे किसने जारी किया था और नवीनीकरण करने स ेपूर्व पर्याप्त सावधानी बरतकर नियमानुसार जारी किया गया था। अवैध विस्फोटक संग्रहण के संबध्ां में शिकायत की गई थी। उस पर क्या कार्यवाही हुई। भविष्य में ऐसी घटना न हो उसके लिए सुझाव भी मांगे गए थे। लेकिन अभी तक इस मामले में विभागीय कार्यवाही जारी है।
मंदसौर में 2017 में हुए किसान आंदोलन के दौरान गोली चालन की घटना के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश जेके जैन की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया गया था। इसमें जिन बिन्दुओं पर जांच की जाना था उसमें घटना किन परिस्थितियों में घटी, पुलिस द्वारा जो बल प्रयोग किया गया क्या वह घटना स्थल की परिस्थितियों को देखते हुए उपयुक्त था। यदि नहीं तो इसके लिए दोषी कौन है। भविष्य में ऐसी घटनाए नहीं हो उसके लिए सुझाव भी मांगे गए थे। लेकिन इस जांच के बाद अभी भी विभागीय कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।
गलत तरीके से चीनी मोबाइल कंपनियों ने विदेश भेजी 5500 करोड़ से अधिक की रकम
चीनी मोबाइल कंपनियां देश में ना सिर्फ सस्ते मोबाइल बेच रही हैं, बल्कि चोरी-छिपे इसके मुनाफे को वापस अपने देश भी भेज रही हैं। आयकर विभाग (CBDT) ने छापेमारी के बाद चीन की दो बड़ी मोबाइल कंपनियों के बारे में बताया कि इन्होंने विदेशों में स्थित अपने समूह की कंपनियों को रॉयल्टी के तौर पर 5500 करोड़ से ज्यादा की रकम भेजी है। सीबीडीटी ने ये भी कहा है कि इन दो विदेशी मोबाइल फोन निर्माता कंपनियों ने मोबाइल हैंडसेट में काम आने वाले कलपुर्जों की खरीद में गड़बड़ी की है। साथ ही इन दोनों कंपनियों ने आयकर अधिनियम, 1961 के तहत निर्धारित नियामक आदेश का अनुपालन नहीं किया है। जिसके लिए इन पर आयकर अधिनियम, 1961 के तहत 1000 करोड़ रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 21 दिसंबर को 11 राज्यों कर्नाटक, तमिलनाडु, असम, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार, राजस्थान, दिल्ली और एनसीआर में कंपनियों के दफ्तरों पर कार्रवाई की गई। इस बारे में टैक्स डिपार्टमेंट ने अपने एक बयान में कहा, “सर्च ऑपरेशन से पता चला है कि दो प्रमुख कंपनियों ने विदेश में स्थित अपनी ग्रुप कंपनियों को और उनकी ओर से रॉयल्टी के रूप में भेजा गया है, जो कुल मिलाकर 5500 करोड़ रुपये से अधिक है।”
CBDT की ओर से ये भी कहा गया है कि कुछ फिनटेक और सॉफ्टवेयर कंपनियों ऐसी भी हैं, जो सिर्फ खर्च बढ़ाने और फंड से बाहर निकालने के मकसद से बनाई गई हैं। इस फर्जीवाड़े के लिए ऐसी कंपनियों ने व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए भुगतान किया और तमिलनाडु स्थित एक गैर-मौजूद व्यावसायिक प्रतिष्ठान की ओर से जारी किए गए बिलों का भी उपयोग किया। करीब 50 करोड़ रुपए इस तरह से इसमें लगाए गए हैं। सीबीडीटी ने कहा है कि इस मामले में अभी आगे की जांच जारी है।
भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 113 रन से हराया
भारत ने सेंचुरियन में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपना पहला टेस्ट (India vs South Africa) मैच 113 रन से जीत लिया है. इसी के साथ टीम इंडिया ने तीन मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त का दावा कर दिया है. इस टेस्ट को जीतने के साथ ही विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप अंक तालिका 2021-2023 में भारत के कुल अंक 54 और प्रतिशत अंक 64.28 हो गए हैं. हालांकि भारत अभी भी विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप अंक तालिका में पाकिस्तान के बाद चौथे स्थान पर है, क्योंकि उसके पास अंकों का प्रतिशत कम है.
एशेज सीरीज (Ashes Series) के तीसरे टेस्ट मैच में इंग्लैंड को एक पारी से हराकर ऑस्ट्रेलिया ने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है. ऑस्ट्रेलियाई टीम एशेज सीरीज में इंग्लैंड पर 3-0 की अजेय बढ़त हासिल कर चुका है. ऑस्ट्रेलिया 36 अंकों के साथ आईसीसी विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप अंक तालिका में शीर्ष पर है. श्रीलंका 24 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि पाकिस्तान 36 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर है.
कालीचरण महाराज की गिरफ्तारी पर MP-CG सरकार में ठनी
भोपाल. महात्मा गांधी पर टिप्पणी को लेकर कालीचरण महाराज को गुरुवार सुबह रायपुर पुलिस ने खजुराहो से गिरफ्तार किया. मध्य प्रदेश से गिरफ्तारी पर इंटर स्टेट प्रोटोकॉल के उल्लंघन का हवाला देते हुए गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने आपत्ति दर्ज कराई है. मिश्रा का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार नोटिस लेकर भी बुला सकती थी. आने से पहले ना सही गिरफ्तारी करने पर मध्य प्रदेश पुलिस को जानकारी तो देती. मिश्रा ने मध्य प्रदेश डीजीपी को छत्तीसगढ़ डीजीपी से पूरे तरीके पर विरोध दर्ज कराने के साथ स्पष्टीकरण मांगने के निर्देश दिए हैं. इधर, छ्त्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सही ठहराते हुए नरोत्तम मिश्रा पर पलटवार किया है.
कालीचरण की गिरफ्तारी पर छत्तीसगढ़ पुलिस के तरीके को लेकर गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने आपत्ति जताई है. गृह मंत्री का कहना है कि छत्तीसगढ़ पुलिस के तरीके पर आपत्ति है. इंटरस्टेट प्रोटोकॉल का उल्लंघन कांग्रेस की छत्तीसगढ़ सरकार को नहीं करना था. संघीय मर्यादा इसकी बिल्कुल भी इजाजत नहीं देती है. छत्तीसगढ़ सरकार चाहती तो उनको नोटिस देकर भी बुला सकती थी. मध्य प्रदेश के डीजीपी को निर्देश दिए हैं कि छत्तीसगढ़ के डीजीपी से बातचीत करें. गिरफ्तारी के तरीके को लेकर बातचीत कर स्पष्टीकरण लें.
उन्होंने आगे कहा कि संघीय मर्यादा का उल्लंघन 100 फ़ीसदी हुआ है. कल को रात को पुलिस का नाम लेकर कोई भी घुस जाएगा. खाकी के नाम पर घुसने की कोशिश करेगा. आखिर जनता की सुरक्षा भी है, जनता की सुरक्षा का सवाल भी है. आश्रम में जाने पर पुलिस को खबर कर देते. पुलिस को खबर नहीं कर पाए तो गिरफ्तारी के बाद खबर कर देते. मैं मानता हूं कि यह पूरा तरीका ही आपत्तिजनक है. मैंने डीजीपी को कहा है कि वह छत्तीसगढ़ डीजीपी को अपना विरोध दर्ज कराएं. जमानती धाराएं हैं. वह चाहते तो जमानत करा लेते. अगर जमानत नहीं करा पाते तो छत्तीसगढ़ बुला लेते. यह तो तरीका है पूरी तरह से गलत है.
इधर, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस विवाद पर पलटवार करते हुए ट्विटर पर लिखा कि न्याय में इतना विलम्ब नहीं होना चाहिए कि वो अन्याय लगने लगे. बघेल ने अपने एक अन्य ट्वीट में कार्रवाई की जानकारी देते हुए कहा, ‘छत्तीसगढ़ पुलिस ने कालीचरण महाराज के परिवार और वकील को उनकी गिरफ्तारी की सूचना दे दी है.’
यह था पूरा मामला
दरअसल रायपुर की धर्म संसद में जब महंत कालीचरण अपना वक्तव्य दे रहे थे, उसी दौरान उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी पर विवादित बयान दिया था. महात्मा गांधी पर सुखदेव, राजगुरु, भगत सिंह की फांसी ना रुकवाने का भी आरोप लगाया था.
कथित वीडियो वायरल हुआ तो उसमें महंत कालीचरण कहते हुए दिखाई दे रहे हैं, “कोई राष्ट्र का पिता नहीं हो सकता, राष्ट्रपिता बनाना है तो महाराणा प्रताप, शिवाजी, वलभ भाई पटेल को बनाया जाए. इन लोगों ने राष्ट्र के लिए काम किया है. गांधी ने तो सिर्फ बंटवारा किया है. उन्होंने कहा था 1947 में हमने अपनी आंखों से देखा कि कैसे पाकिस्तान और बांग्लादेश पर कब्जा किया गया. मोहनदास करमचंद गांधी ने उस वक्त देश का सत्यानाश किया. नमस्कार है नाथूराम गोडसे को, जिन्होंने उन्हें मार दिया.”
इस बयान के बाद उन पर एफआईआर दर्ज कर ली गई थी, लेकिन वो फरार हो चुके थे. News 18 वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता.
भोपाल पुलिस आयुक्त मकरंद देऊस्कर एडीजी पद पर होंगे पदोन्नत
भोपाल । भोपाल के पहले पुलिस आयुक्त मकरंद देऊस्कर को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) पद पर पदोन्नत करने का रास्ता साफ हो गया है। गृह विभाग ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पदोन्नति के पदों के संबंध में जो प्रस्ताव भेजा था, उसे देर शाम अनुमति मिल गई। अब देऊस्कर के साथ डी. श्रीनिवास वर्मा और उमेश जोगा भी अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक हो जाएंगे। सोलोमन यश कुमार विज केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं। वहीं, भोपाल देहात जोन के प्रभारी पुलिस महानिरीक्षक इरशाद वली भी पदोन्नति के बाद पुलिस महानिरीक्षक हो जाएंगे। गृह विभाग पदोन्नति के आदेश शुक्रवार को जारी करेगा।
गुरुवार को आइपीएस अधिकारियों की पदोन्नति के लिए मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस की अध्यक्षता में विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक हुई। इसमें मकरंद देऊस्कर सहित अन्य अधिकारियों को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पद पर पदोन्नत करने के योग्य पाया गया, लेकिन पद उपलब्ध नहीं होने की वजह से पदोन्नति अटकने के आसार थे।
जब तक अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पद पर पदोन्नति के लिए पद उपलब्ध नहीं हो जाते, तब तक पदोन्नति नहीं दी जा सकती है। इसके मद्देनजर केंद्रीय गृह मंत्रालय को पदोन्नति के संबंध में प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे मंजूरी मिल गई। इसके बाद अब तय हो गया है कि अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पद पर पदोन्नति के लिए अधिकारियों को इंतजार नहीं करना पड़ेगा। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि सेवा रिकार्ड के अनुसार उप पुलिस महानिरीक्षक निरंजन वायंगणकर के साथ पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी अनीता मालवीय और साकेत पांडे को पदोन्नति के योग्य नहीं पाया गया है।
ये भी हो जाएंगे पदोन्नत
भोपाल देहात जोन के प्रभारी पुलिस महानिरीक्षक इरशाद वली डीआइजी से पुलिस महानिरीक्षक पद पर पदोन्नत हो जाएंगे। इनके साथ 2004 बैच के अधिकारी गौरव राजपूत, संजय कुमार, आरण्य डेहरिया और संजय तिवारी भी पदोन्नत होंगे। 2008 बैच के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को उप पुलिस महानिरीक्षक और नौ अधिकारियों को प्रवर श्रेणी वेतनमान में पदोन्नति मिलेगी। बैठक में पुलिस महानिदेशक विवेक जौहरी के साथ अपर मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान और डा. राजेश राजौरा उपस्थित थे।





