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नीरज चोपड़ा की बायोपिक करना चाहते हैं आयुष्मान खुराना

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बॉलीवुड एक्टर आयुष्मान खुराना अलग फिल्म करने के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में उनकी मूवी ‘चंडीगढ़ करे आशिकी’ रिलीज हुई। इस फिल्म में आयुष्मान को वाणी कपूर से प्यार हो जाता है। वाणी ने फिल्म में ट्रांसजेंडर का किरदार निभाया है। आयुष्मान की हर फिल्म समाज के किसी मुद्दे पर होती है। उसमें कोई संदेश छुपा होता है। हालांकि अब एक्टर बायोपिक में काम करना चाहते हैं। खुराना ने देश के गोल्डन बॉय नीरज चोपड़ा की बायोपिक करने की इच्छा जाहिर की है।

आयुष्मान खुराना ने कहा कि मैं हमेशा से असल जिंदगी के लोगों और हीरोज से प्रेरित रहा हूं। अभी मैं नीरज चोपड़ा से प्रभावित हूं। एक्टर से पूछा गया कि बॉलीवुड में काफी बायोपिक बन रही हैं। क्या वो ऐसी किसी मूवीज में काम करना पसंद करेंगे। इसके जवाब में खुराना ने कहा, ‘अगर नीरज चोपड़ा पर फिल्म बनती है, तो वह लीड रोल निभाना चाहेंगे।’

उन्होंने कहा कि ओलंपिक में गोल्ड मोडल जीतने के लिए नीरज ने जिस तरह का जज्बा और परफॉर्म किया है। उसे सलाम करने की जरूरत है। अगर कभी उनकी लाइफ पर कोई बायोपिक बनती है। तो उसमें काम नहीं करते हैं, तो मैं लीड रोल निभाना चाहूंगा। आयुष्मान ने आगे कहा, ‘इस तरह की उपलब्धियों का सिनेमा पर्दे पर दिखाने की जरूरत है।’

राज्य नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा मुझे परिणाम चाहिए

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भोपाल । मध्य प्रदेश राज्य नीति एवं योजना आयोग के अधिकारियों से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ कहा कि अगले दो साल में जमीनी स्तर पर काम दिखाई देने चाहिए। मुझे परिणाम चाहिए। मुख्यमंत्री गुरुवार को आयोग की तीसरी बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि आयोग प्रदेशवासियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के उद्देश्य से कम समय में पूरी होने वाली योजनाए बनाए, नीति तय करे और उनका प्रभावी क्रियान्वयन कर जल्द परिणाम दे। सर्वोच्च प्राथमिकता के कुछ कार्यक्रम व योजनाएं तय कर उनके लक्ष्य तय करें। बैठक में आयोग के उपाध्यक्ष प्रो सचिन चतुर्वेदी, वित्त एवं योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी मंत्री जगदीश देवड़ा, मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) प्राप्त करने के लिए विभागों की कार्ययोजना, रणनीति, समय सीमा पेश करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सहकारिता आंदोलन, जल प्रबंधन, फसल विविधीकरण, महिला नीति, सतत पर्यटन और मत्स्य निर्यात की दिशा में प्रभावी प्रयासों से लोगों की सामाजिक, आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। इसलिए इन पर विशेष ध्यान दें। गतिविधियों में सफल होने के लिए राज्य स्तर से लेकर जनप्रतिनिधि, दीनदयाल अंत्योदय समिति, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तक की जिम्मेदारी एवं समय सीमा तय की जाए और मासिक आधार पर इनकी समीक्षा हो।

आकांक्षी विकासखंडों की जिम्मेदारी अधिकारियों को

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के प्रत्येक आकांक्षी विकासखंड की जिम्मेदारी एक-एक अधिकारी को सौंपने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे तय लक्ष्य समय सीमा में पूरा करने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने योजनाओं और अधोसंरचना विकास से संबंधित गतिविधियों का थर्ड पार्टी मूल्यांकन कराने पर विचार करने की जरूरत बताई।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा …

– आयोग को विचार करना चाहिए कि मध्य प्रदेश देश की फाइव ट्रिलियन इकोनामी और सौर ऊर्जा में राष्ट्रीय स्तर पर कितना योगदान दे सकता है।

– आयोग को जन साधारण से जोड़ना जरूरी है।

– नीति निर्माण के लिए हितग्राहियों का फीडबैक, कार्यक्रमों और योजनाओं से जुड़े सभी समूहों से परामर्श लेना जरूरी।

मध्‍य प्रदेश में महिला स्व-सहायता समूह चलाएंगे उचित मूल्य की दुकानें

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भोपाल। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं, धान सहित अन्य उपज खरीदने, आक्सीजन और पोषण आहार संयंत्रों का संचालन करने के बाद अब मध्य प्रदेश में महिला स्व-सहायता समूह उचित मूल्य दुकानों (राशन दुकानों) का संचालन भी करेंगे। समूहों को सशक्त बनाने की दिशा में शिवराज सरकार ने यह एक और कदम उठाया है। इसके लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग नियमों में संशोधन कर रहा है। इसे देखते हुए सहकारिता विभाग ने सहकारी समितियों द्वारा संचालित उचित मूल्य की दुकानों के लिए 1827 कनिष्ठ संविदा विक्रेता के पद के लिए चल रही नियुक्ति प्रक्रिया रोक दी गई है।

प्रदेश में 25 हजार उचित मूल्य की दुकानों से चार करोड़ से अधिक व्यक्तियों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत खाद्यान्न् वितरित किया जाता है। अधिकांश दुकानें सहकारी समितियां संचालित करती हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महिला स्व-सहायता समूह द्वारा किए जा रहे कार्यों की सफलता को देखते हुए इन्हें दुकानों का संचालन सौंपने का निर्णय किया है।

इसके मद्देनजर खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग नियम में संशोधन करने जा रहा है। सहकारिता विभाग ने कनिष्ठ संविदा विक्रेता के 3626 पद स्वीकृत किए थे। एमपी आनलाइन के माध्यम से चयन प्रक्रिया कराई गई। इसमें 45 हजार से ज्यादा अभ्यर्थियों ने भाग लिया था।

दस्तावेजों का सत्यापन करने के बाद 1799 पदों पर नियुक्तियां दी गईं। जबकि, शेष 1827 पदों पर भर्ती के लिए नियम में संशोधन करके प्रावीण्य सूची में दूसरे स्थान पर रहे अभ्यर्थियों को मौका देने का निर्णय लिया गया। जिलों में यह प्रक्रिया अभी चल रही थी। सहकारिता विभाग ने बुधवार को नियुक्ति प्रक्रिया रोकने के निर्देश दिए हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जब समूहों द्वारा उचित मूल्य की दुकानों का संचालन किया जाएगा तो विक्रेता भी उन्हीं का होगा इसलिए भर्ती प्रक्रिया रोक दी गई है।

किसानों को मिलने चाहिए उनकी पसंद के विकल्प – पींएम मोदी

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पीएम मोदी (Narendra Modi) ने आज गुजरात के आणंद में कृषि और खाद्य प्रसंस्करण पर राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के दौरान किसानों को संबोधित किया. पीएम मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ‘कॉन्क्लेव ऑन नेचुरल फार्मिंग’ सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि ये कॉन्क्लेव गुजरात में जरूर हो रहा है लेकिन इसका दायरा, इसका प्रभाव पूरे भारत के लिए है. भारत के हर किसान के लिए है.

PM Modi के संबोधन की बड़ी बातें

  • कृषि सेक्टर, खेती-किसानी के लिए आज का दिवस बहुत ही महत्वपूर्ण है. मैंने देशभर के किसान भाइयों से आग्रह किया था कि प्राकृतिक खेती के राष्ट्रीय सम्मेलन से जरूर जुड़ें. आज करीब-करीब 8 करोड़ किसान देश के हर कोने से टेक्नोलॉजी के माध्यम से हमारे साथ जुड़े हुए हैं.
  • आजादी के बाद के दशकों में जिस तरह देश में खेती हुई, जिस दिशा में बढ़ी, वो हम सब हम सबने बहुत बारीकी से देखा है. अब आजादी के 100वें साल तक का जो हमारा सफर है, वो नई आवश्यकताओं, नई चुनौतियों के अनुसार अपनी खेती को ढालने का है.
  • बीज से लेकर बाजार तक, किसान की आय को बढ़ाने के लिए एक के बाद एक अनेक कदम उठाए गए हैं. मिट्टी की जांच से लेकर सैकड़ों नए बीज तक, पीएम किसान सम्मान निधि से लेकर लागत का डेढ़ गुणा MSP तक, सिंचाई के सशक्त नेटवर्क से लेकर किसान रेल तक, अनेक कदम उठाए हैं.
  • खेती के साथ साथ पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मत्स्य पालन और सौर ऊर्जा, बायो फ्यूल जैसे आय के अनेक वैकल्पिक साधनों से किसानों को निरंतर जोड़ा जा रहा है. गांवों में भंडारण, कोल्ड चैन और फूड प्रोसेसिंग को बल देने के लिए लाखों करोड़ रुपये का प्रावधान किया है.
  • खेती में उपयोग होने वाले कीटनाशक और केमिकल फर्टिलाइजर हमें बड़ी मात्रा में इंपोर्ट करना पड़ता है. इस वजह से खेती की लागत बढ़ती है, खर्च बढ़ता है और गरीब की रसोई भी महंगी होती है.
  • ये सही है कि केमिकल और फर्टिलाइजर ने हरित क्रांति में अहम रोल निभाया है. लेकिन ये भी उतना ही सच है कि हमें इसके विकल्पों पर भी साथ ही साथ काम करते रहना होगा. हमें अपनी खेती को कैमिस्ट्री की लैब से निकालकर प्रकृति की प्रयोगशाला से जोड़ना ही होगा. प्रकृति की प्रयोगशाला तो पूरी तरह से विज्ञान आधारित ही है.
  • बीज से लेकर मिट्टी तक सबका इलाज आप प्राकृतिक तरीके से कर सकते हैं. प्राकृतिक खेती खेती में न तो खाद पर खर्च करना है और ना ही कीटनाशक पर. इसमें सिंचाई की आवश्यकता भी कम होती है और बाढ़-सूखे से निपटने में ये सक्षम होती है.
  • आज दुनिया जितना आधुनिक हो रही है, उतना ही ‘back to basic’ की ओर बढ़ रही है. इस Back to basic का मतलब क्या है? इसका मतलब है अपनी जड़ों से जुड़ना! इस बात को आप सब किसान साथियों से बेहतर कौन समझता है? हम जितना जड़ों को सींचते हैं, उतना ही पौधे का विकास होता है.
  • कृषि से जुड़े हमारे प्राचीन ज्ञान  को हमें न सिर्फ फिर से सीखने की जरूरत है, बल्कि उसे आधुनिक समय के हिसाब में तराशने की भी जरूरत है. इस दिशा में हमें नए सिरे से शोध करने होंगे, प्राचीन ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक फ्रेम में डालना होगा.

Ola ने S1 व S1 Pro को लॉन्च की, सिंगल चार्ज में मिलेगी 181km की रेंज

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ओला इलेक्ट्रिक ने अपने इलेक्ट्रिक स्‍कूटर्स के दो वेरियंट Ola S1 और Ola S1 Pro की डिलीवरी शुरू कर दी है। कंपनी की ओर से जानकारी दी गई है कि चेन्नई और बेंगलुरू में एक स्पेशल इवेंट के आयोजन में Ola S1 और Ola S1 Pro के शुरुआती 100 ग्राहकों को इसकी डिलीवरी की गई है। बता दें कि पिछले महीने कंपनी की ओर से खरीदारों के लिए टेस्‍ट राइड शुरू की गई थी और ऐसा कहा गया है कि इन इलेक्ट्रिक स्कूटरों की डिलीवरी अक्‍टूबर में शुरू होनी थी, लगातार हो रही देरी के कारण इसे अब डिलीवर किया जा रहा है।

ओला इलेक्ट्रिक के सीईओ भाविश अग्रवाल ने इलेक्ट्रिक स्कूटर की डिलीवरी को लेकर कहा कि देरी होने के लिए खेद है। आगे लिखते हुए उन्‍होंने कहा कि हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हम अपनी बहुत सख्त समयसीमा और उच्च गुणवत्ता मानकों को पूरा करने के लिए अपनी पूरी कोशिश करें। यह बातें उन्‍होंने ट्विटर के माध्‍यम से साझा की हैं।

इलेक्ट्रिक स्‍कूटर्स की रेंज और फीचर्स
ओला की इलेक्ट्रिक स्‍कूटर्स के फीचर्स की बात करें तो इसमें लिथियम आयन बैट्री दी जा रही है। जो फुल चार्ज करने पर चार से पांच घंटे का समय लेती है। Ola S1 वेरियंट फुल सिंगल चार्ज पर 121 किलोमीटर का रेंज देता है। वहीं, इसका S1 Pro वेरियंट सिंगल चार्ज पर 181 किलोमीटर तक चलता है। S1 वैरिएंट महज 3.6 सेकंड्स में 0-40 किलोमीटर प्रति घंटे की स्‍पीड देता है तो वहीं, इसका S1 Pro वेरियंट 3 सेकंड्स में 0-40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार देता है।

मार्नस लाबुशेन ने रचा इतिहास, ब्रायन लारा, वीरेंद्र सहवाग और विव रिचर्ड्स जैसे दिग्गजों को छोड़ा पीछे

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ऑस्ट्रेलिया बल्लेबाज मार्नस लाबुशेन ने एक बार फिर अपनी बल्लेबाजी से टीम को मुश्किल परिस्थिति से निकाला। एशेज सीरीज के दूसरे टेस्ट मैच में मार्नस पहले दिन 95 रन बनाकर नॉटआउट लौटे। इस पारी के दौरान उन्होंने एक खास मुकाम हासिल कर लिया और ब्रायन लारा, विव रिचर्ड्स, वीरेंद्र सहवाग और राहुल द्रविड़ जैसे बल्लेबाजों को पीछे छोड़ दिया। टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज 2000 रन पूरा करने के मामले में लाबुशेन अब टॉप-5 बल्लेबाजों में शामिल हो गए हैं। लाबुशेन ने अपने करियर की 34वीं पारी में ऐसा किया। इस मामले में उनसे आगे चार ही बल्लेबाज हैं। सर डॉन ब्रैडमैन ने यह कारनामा 22 पारियों में, जॉर्ज हेडली ने 32 पारियों में, हर्बर्ट सटक्लिफ 33 पारियों में और माइक हस्सी ने 33 पारियों में यह उपलब्धि हासिल की थी।

डग वाल्टर्स और ब्रायन लारा ने यह कारनामा 35-35 पारियों में किया था। भारत की ओर से सबसे तेज 2000 टेस्ट पूरा करने का रिकॉर्ड राहुल द्रविड़ के नाम दर्ज है। द्रविड़ ने 40 पारियों में ऐसा किया था, उनके अलावा वीरेंद्र सहवाग ने भी इतनी ही पारियों में यह आंकड़ा छुआ था। लाबुशेन जबर्दस्त फॉर्म में हैं और उन्होंने अपने करियर की शुरुआत से ही काफी प्रभावित किया है।

लाबुशेन अभी तक 20 टेस्ट मैचों की 34 पारियों में 64.18 के औसत से 2054 रन बना चुके हैं। मैच की बात करें तो एडिलेड में खेले जा रहे इस डे-नाइट टेस्ट मैच के पहले दिन ऑस्ट्रेलिया ने दो विकेट पर 221 रन बना लिए हैं। लाबुशेन के साथ क्रीज पर कप्तान स्टीव स्मिथ मौजूद हैं, जो 18 रन बनाकर खेल रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया ने अपना पहला विकेट चार रन पर ही गंवा दिया था। स्टुअर्ट ब्रॉड की गेंद पर मार्कस हैरिस तीन रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद डेविड वॉर्नर और लाबुशेन ने मिलकर दूसरे विकेट के लिए 172 रनों की साझेदारी निभाई। वॉर्नर अनलकी रहे और 95 रन बनाकर बेन स्टोक्स की गेंद पर स्टुअर्ट ब्रॉड को कैच थमा बैठे।

UNESCO ने दुर्गा पूजा को दिया हेरिटेज का दर्जा, अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की मिली मान्यता

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पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। संयुक्त राष्ट्र संघ की सांस्कृतिक ईकाई UNESCO ने कोलकाता की दुर्गा पूजा (Kolkata Durga Puja) को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल कर लिया है। यूनेस्को की पेरिस में आयोजित अंतर सरकारी समिति के 16 वें सत्र के दौरान कोलकाता में दुर्गा पूजा को यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची ( UNESCO’s Representative List of Intangible Cultural Heritage of Humanity) में शामिल किया गया है। बता दें कि बंगाल में दुर्गा पूजा बहुत ही धूमधाम से मनाई जाती है और ये बंगाल की संस्कृति के साथ जुड़ा हुआ है। बंगाल सरकार ने यूनेस्को से दुर्गा पूजा को विरासत का दर्जा देने की अपील की थी, जिसे यूनेस्को ने मंजूरी दे दी है।

पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। संयुक्त राष्ट्र संघ की सांस्कृतिक ईकाई UNESCO ने कोलकाता की दुर्गा पूजा (Kolkata Durga Puja) को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल कर लिया है। यूनेस्को की पेरिस में आयोजित अंतर सरकारी समिति के 16 वें सत्र के दौरान कोलकाता में दुर्गा पूजा को यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची ( UNESCO’s Representative List of Intangible Cultural Heritage of Humanity) में शामिल किया गया है। बता दें कि बंगाल में दुर्गा पूजा बहुत ही धूमधाम से मनाई जाती है और ये बंगाल की संस्कृति के साथ जुड़ा हुआ है। बंगाल सरकार ने यूनेस्को से दुर्गा पूजा को विरासत का दर्जा देने की अपील की थी, जिसे यूनेस्को ने मंजूरी दे दी है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी सेमीकंडक्टर चिप्स निर्माण योजना को मंजूरी

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नई दिल्ली  : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत में सेमीकंडक्टर चिप्स के डिजाइन, निर्माण की योजना को मंजूरी दी। इसके अलावा कैबिनेट ने 93,068 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ 2021-26 के लिए प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना के कार्यान्वयन को मंजूरी दी। इससे ढाई लाख एससी और 2 लाख एसटी किसानों समेत करीब 22 लाख किसानों को फायदा होगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सिलिकॉन सेमीकंडक्टर फैब, डिस्प्ले फैब, कंपाउंड सेमीकंडक्टरों/सिलिकॉन फोटोनिक्स/सेंसर (एमईएमएस सहित) फैब, सेमीकंडक्टर पैकेजिंग (एटीएमपी/ओएसएटी), सेमीकंडक्टर डिजाइन के काम में लगी हुई कंपनियों/संघों को आकर्षक प्रोत्साहन सहायता प्रदान करना हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने और भारत को इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन एवं विनिर्माण के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से, देश में सेमीकंडक्टरों और डिस्प्ले इकोसिस्टम के विकास के लिए व्यापक कार्यक्रम को मंजूरी दी है।

यह कार्यक्रम सेमीकंडक्टरों और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ डिजाइन के क्षेत्र में कंपनियों को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी प्रोत्साहन पैकेज प्रदान करके इलेक्ट्रॉनिक सामग्रियों के निर्माण में एक नए युग की शुरुआत करेगा। यह सामरिक महत्व तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता के इन क्षेत्रों में भारत के प्रौद्योगिकीय नेतृत्व के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा।

जानिये क्‍या है सेमीकंडक्टर

सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स की नींव हैं, जो उद्योग 4.0 के तहत डिजिटल परिवर्तन के अगले चरण की ओर आगे बढ़ा रहे हैं। सेमीकंडक्टरों और डिस्प्ले प्रणालियों का उत्पादन बहुत जटिल तथा प्रौद्योगिकी की अधिकता वाला क्षेत्र है, जिसमें भारी पूंजी निवेश, उच्च जोखिम, लंबी अवधि और पेबैक अवधि तथा प्रौद्योगिकी में तेजी से बदलाव शामिल हैं और इसके लिए अत्यधिक एवं निरंतर निवेश की आवश्यकता होती है। यह कार्यक्रम पूंजी सहायता और प्रौद्योगिकीय सहयोग की सुविधा प्रदान करके सेमीकंडक्टरों और डिस्प्ले प्रणाली के उत्पादन को बढ़ावा देगा। भारत में सेमीकंडक्टरों और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के विकास के लिए निम्नलिखित व्यापक प्रोत्साहनों को मंजूरी दी गई है:

सेमीकंडक्टर फैब और डिस्प्ले फैब: भारत में सेमीकंडक्टर फैब तथा डिस्प्ले फैब की स्थापना की योजना उन आवेदकों को परियोजना लागत के 50 प्रतिशत तक की वित्तीय सहायता प्रदान करेगी जो पात्र पाए गए हैं और जिनके पास प्रौद्योगिकी के साथ-साथ इस प्रकार की अत्यधिक पूंजी वाली तथा संसाधन केंन्द्रित परियोजनाओं के निष्पादन की क्षमता है। भारत सरकार देश में कम से कम दो ग्रीनफील्ड सेमीकंडक्टर फैब तथा दो डिस्प्ले फैब स्थापित करने के लिए आवेदनों को मंजूरी देने हेतु भूमि, सेमीकंडक्टर ग्रेड जल, उच्च गुणवत्ता वाली बिजली, लॉजिस्टिक्स तथा अनुसंधान प्रणाली के रूप में आवश्यक बुनियादी ढांचे वाले हाई-टेक क्लस्टर स्थापित करने के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करेगी।

सेमी-कंडक्टर प्रयोगशाला (एससीएल) : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने यह भी मंजूरी दे दी है कि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय सेमी-कंडक्टर प्रयोगशाला (एससीएल) के आधुनिकीकरण तथा व्यवसायीकरण के लिए आवश्यक कदम उठाएगा। यह मंत्रालय ब्राउनफील्ड फैब संयंत्र के आधुनिकीकरण के लिए एक वाणिज्यिक फैब पार्टनर के साथ एससीएल के संयुक्त उद्यम की संभावना तलाशेगा।

कंपाउंड सेमीकंडक्टर/सिलिकॉन फोटोनिक्स/सेंसर (एमईएमएस सहित) फैब तथा सेमीकंडक्टर एटीएमपी/ओएसएटी इकाइयां: भारत में कंपाउंड सेमीकंडक्टर/सिलिकॉन फोटोनिक्स/सेंसर (एमईएमएस सहित) फैब्स और सेमीकंडक्टर एटीएमपी/ओएसएटी संयंत्रों की स्थापना हेतु योजना के तहत स्वीकृत इकाइयों को पूंजीगत व्यय की 30 प्रतिशत वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। इस योजना के तहत सरकार के सहयोग से कंपाउंड सेमीकंडक्टरों और सेमीकंडक्टर पैकेजिंग की कम से कम 15 ऐसी इकाइयां स्थापित किए जाने की संभावना है।

सेमीकंडक्टर डिजाइन कंपनियां: डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई) योजना के तहत पांच साल के लिए शुद्ध बिक्री पर 6 प्रतिशत– 4 प्रतिशत के पात्र व्यय एवं प्रोडक्ट डिप्लॉयमेंट लिंक्ड इंसेंटिव के 50 प्रतिशत तक उत्पाद डिजाइन से जुड़े प्रोत्साहन दिए जाएंगे । इंटीग्रेटेड सर्किट (आईसी), चिपसेट, सिस्टम ऑन चिप्स (एसओसी), सिस्टम एवं आईपी कोर तथा सेमीकंडक्टर लिंक्ड डिज़ाइन के लिए 100 घरेलू कंपनियों को सहायता प्रदान की जाएगी और आने वाले पांच वर्षों में 1500 करोड़ रुपये से अधिक टर्नओवर हासिल करने वाली कम से कम 20 ऐसी कंपनियों को विकास की सुविधा प्रदान की जाएगी।

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन: सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले के उत्पादन की एक सतत प्रणाली विकसित करने के लिए दीर्घकालिक रणनीतियों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से एक विशेष और स्वतंत्र “इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम)” स्थापित किया जाएगा। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन का नेतृत्व सेमीकंडक्टर एवं डिस्प्ले उद्योग के क्षेत्र से जुड़े वैश्विक विशेषज्ञ करेंगे। यह सेमीकंडक्टरों एवं डिस्प्ले प्रणाली पर आधारित योजनाओं के कुशल तथा सुचारू कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा।

जैविक खेती और उत्पादों के निर्यात में मध्य प्रदेश देश में अव्वल

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भोपाल। मध्य प्रदेश जैविक खेती और इससे जुड़े उत्पादों के निर्यात में देश में अव्वल है। प्रदेश में लगातार जैविक खेती का क्षेत्र बढ़ रहा है। वर्ष 2017-18 में 11 लाख 56 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती हो रही थी। जबकि, वर्ष 2020-21 में यह क्षेत्र बढ़कर 16 लाख 37 हजार हेक्टेयर से अधिक हो गया है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) की वर्ष 2020-21 की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश से पांच लाख टन जैविक उत्पाद का निर्यात हुआ, जो ढाई हजार करोड़ रुपये से अधिक का था।

जैविक खेती करने वाले पंजीकृत किसानों की संख्या एक लाख से अधिक है। सोयाबीन, चना, मसूर, तुअर और उड़द के उत्पादन में मध्य प्रदेश देश में नंबर एक पर है। वहीं, रामतिल और मूंग में दूसरा और गेहूं और बाजरा के उत्पादन में तीसरा स्थान है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्यों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। शिवराज सरकार भी इस दिशा में काम कर रही है। इसके लिए 2011 में जैविक कृषि नीति बनाई गई और 2014 में मंडला में निवेशक सम्मेलन भी किया। दरअसल, प्रदेश में जैविक खेती का रकबा (क्षेत्र) तो बढ़ रहा है पर उत्पाद की मार्केटिंग और ब्रांडिंग न होने से उत्पादकों को फायदा नहीं मिल पाता है।

इसे देखते हुए कृषि विभाग अब किसान और व्यापारियों को एक मंच पर लाने की दिशा में काम कर रहा है। अपर मुख्य सचिव कृषि एवं सहकारिता अजीत केसरी का कहना है कि कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) की वर्ष 2020-21 की रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश जैविक खेती के मामले में देश में अव्वल है।

प्राकृतिक तौर पर मध्य प्रदेश में जैविक खेती का क्षेत्र सर्वाधिक है। वहीं, किसान भी लगातार प्रेरित हो रहे हैं। वर्ष 2020-21 में उत्पादन 13 लाख 92 हजार 95 टन रहा है, जो देश में सर्वाधिक है। इसके बाद महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान और उत्तर प्रदेश का नंबर आता है। जैविक उत्पाद के निर्यात की दृष्टि से देखें तो देश-दुनिया में इसकी मांग बढ़ रही है। मध्य प्रदेश से वर्ष 2020-21 में पांच लाख 636 टन जैविक उत्पाद निर्यात किए गए। इसका मूल्य दो हजार 836 करोड़ रुपये होता है।

चावल सर्वाधिक होता है निर्यात

संचालक कृषि प्रीति मैथिल नायक ने बताया कि जैविक उत्पाद में प्रदेश से सर्वाधिक चावल निर्यात होता है। देश से होने वाले निर्यातय में मध्य प्रदेश का हिस्सा एक तिहाई से अधिक है। प्रदेश उड़द, सोयाबीन, तुअर, मसूर और चना के उत्पादन में नंबर एक पर है। वहीं, रामतिल और मूंग के उत्पादन में नंबर दो पर है। गेहूं और बाजरा के उत्पादन में मध्य प्रदेश तीसरे स्थान पर है। जैविक प्रमाणीकरण संस्था द्वारा जो किसान जैविक खेती के लिए पंजीयन कराते हैं, उनका क्षेत्र प्रमाणित करती है। संस्था के अधिकारियों द्वारा निरीक्षण भी किया जाता है। निर्यात करनेे वाली कंपनियों द्वारा प्रमाण्ाीकरण का कार्य करवाया जाता है।

इन जिलों में अधिक होती है जैविक खेती

मंडला, डिंडोरी, बालाघाट, छिंदवाड़ा, बैतूल, कटनी, उमरिया, अनूपपुर, उमरिया, दमोह, सागर, आलीराजपुर, झाबुआ, खंडवा, सीहोर, श्योपुर और भोपाल ।

जैविक खेती का क्षेत्र

वर्ष- क्षेत्र

2017-18 – 11,56,881

2018-19- 09,18,303

2019-20- 11,61,015

2020-21- 16,37,730

38 साल बाद भी नहीं हो सका भोपाल गैस पीड़ितों के हितों का फैसला

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भोपाल। विश्व की बड़ी औद्योगिक दुर्घटनाओं में शामिल भोपाल गैस त्रासदी हो या फिर दतिया जिले की सिंध नदी के पुल पर भगदड़ और झाबुआ के पेटलावद में विस्फोट से 90 से ज्यादा लोगों की मौत। आयोग गठित हुए, जांच हुई, रिपोर्ट विधानसभा पटल पर रखी और सरकार कार्रवाई करना भूल गई। ऐसे एक दर्जन से ज्यादा मामले हैं। जिनमें पीड़ितों को अब भी न्याय का इंतजार है और विभिन्न् आयोग की फाइलें अलमारियों में कैद होकर रह गई हैं।

भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से 38 साल पहले जहरीली गैस रिसी थी, जिससे हजारों लोगों की मौत हुई थी। मामले की जांच के लिए अगस्त 2010 में न्यायमूर्ति एसएल कोचर की अध्यक्षता में आयोग गठित हुआ। जांच शुरू हुई। फरवरी 2015 को आयोग ने यह रिपोर्ट शासन को सौंप दी।

तब से अब तक गैस राहत विभाग इस रिपोर्ट पर मंथन कर रहा है। मामले में आयोग की रिपोर्ट तक पूरी तरह से सामने नहीं आई। यह इकलौता मामला नहीं है। एक दर्जन से ज्यादा गंभीर घटनाओं में सरकार की कार्रवाई ऐसी ही चल रही है। इन सभी मामलों में संबंधित आयोग अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप चुके हैं। कई मामलों की रिपोर्ट विधानसभा पटल पर रखी जा चुकी है पर कार्रवाई का इंतजार अब भी है।

मामले उछलते और ठंडे पड़ जाते हैं

इनमें से कुछ मामले राजनीतिक जरूरत का विषय हैं। इसलिए मौके-मौके पर उठते रहते हैं। विपक्ष जब मामला उठाता है, कुछ दिन चर्चा चलती हैं। अलमारी खुलती है, कैद फाइलों को रोशनी देखने को मिलती है और चंद दिनों में मामला ठंडा पड़ जाता है। आखिर फाइलें आमतौर पर जहां रहती हैं, वहीं पहुंच जाती हैं।

जांच और प्रतिवेदन तक पहुंचे मामले

– वर्ष 2006 में दतिया जिले के रतनगढ़ देवी मंदिर जाते हुए सिंध नदी के पुल पर भगदड़ से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी। जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुशील पाण्डेय की अध्यक्षता में अक्टूबर 2006 में आयोग गठित हुआ। जिसने मार्च 2007 में रिपोर्ट सौंप दी। दूसरी घटना अक्टूबर 2013 में हुई थी। इसकी अलग जांच कराई। जुलाई और दिसंबर 2014 में दोनों जांच प्रतिवेदन विधानसभा पटल पर रखे गए।

– सामाजिक सुरक्षा पेंशन, राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन में अनियमित्ताओं की जांच के लिए फरवरी 2008 में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति एनके जैन की अध्यक्षता में आयोग गठित हुआ। आयोग ने सितंबर 2012 को रिपोर्ट सौंप दी। सामाजिक न्याय विभाग इस पर अब भी मंथन कर रहा है।

– झाबुआ जिले के पेटलावद में सितंबर 2015 में चाय की गुमठी में गैस सिलेंडर फटने से 90 लोगों की मौत हुई थी। घटना के तीन दिन बाद सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति आर्येन्द्र कुमार सक्सेना को जांच सौंपी गई। उन्होंने दिसंबर 2015 में रिपोर्ट सौंप दी, जो अप्रैल 2016 से गृह विभाग में है।

– भोपाल केंद्रीय जेल से आठ कैदियों के भागने की जांच नवंबर 2016 में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति एसके पाण्डे को सौंपी गई। उन्होंने अगस्त 2017 में रिपोर्ट सौंप दी। जून 2018 में प्रतिवेदन विधानसभा पटल पर रखा जा चुका है।

– मंदसौर के पिपल्यामंडी में किसान आंदोलन के दौरान जून 2017 में पुलिस की गोली से पांच किसानों की मौत के मामले की जांच सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति जेके जैन को सौंपी थी। उन्होंने जून 2018 में रिपोर्ट सौंप दी। जिसे तुरंत कार्रवाई के लिए गृह विभाग को भेज दी गई। तब से वहीं पड़ी है।