हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूजनीय देवता माना गया है। सावन मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को दूर्वा गणपति चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस दिन गणेश जी की पूजा में दूर्वा अर्पित करने का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक पूजा करने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और भक्तों के जीवन से विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं।
16 अगस्त को मनाई जाएगी दूर्वा गणपति चतुर्थी
साल 2026 में दूर्वा गणपति चतुर्थी का व्रत 16 अगस्त, रविवार को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि 15 अगस्त की शाम 5:28 बजे शुरू होकर 16 अगस्त की शाम 4:52 बजे समाप्त होगी।
पूजा का शुभ मुहूर्त
दूर्वा गणपति चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा के लिए मध्याह्न का समय विशेष शुभ माना जाता है। अलग-अलग शहरों में मुहूर्त में कुछ अंतर हो सकता है। उदाहरण के लिए मुंबई में पूजा का समय सुबह 11:26 बजे से दोपहर 1:59 बजे तक बताया गया है।
पूजा में दूर्वा का महत्व
गणेश जी को दूर्वा अत्यंत प्रिय मानी जाती है। इस दिन भगवान गणेश को दूर्वा की गांठें, फूल, फल और मोदक अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद धूप-दीप जलाकर गणेश मंत्रों का जाप और आरती की जाती है। मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा करने से सुख-समृद्धि और बुद्धि की प्राप्ति होती है।
कैसे करें पूजा?
सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को साफ करें। इसके बाद गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर उन्हें जल, दूर्वा, फूल, सिंदूर और मोदक अर्पित करें। भगवान गणेश का ध्यान करते हुए मंत्र जाप करें और अंत में आरती कर प्रसाद वितरित करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने से गणेश जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।





