Home Blog Page 63

द्रौपदी मुर्मू के चुनाव जीतते ही बने ये पांच रिकॉर्ड

0

15वें राष्ट्रपति के लिए हुए चुनाव में एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू ने बड़ी जीत हासिल की है। विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार यशवंत सिन्हा ने अपनी हार स्वीकर कर ली है और उन्होंने द्रौपदी मुर्मू को बधाई दी। उन्होंने कहा, उम्मीद है कि आप बिना किसी भय और पक्षपात के संविधान की संरक्षक बनकर कार्य करेंगी। वहीं द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च पद पर पहुंचने वाली सबसे युवा आदिवासी महिला बन गई हैं। इस जीत के साथ ही उन्होंने इतिहास रच दिया है।

15वें राष्ट्रपति के लिए हुए चुनाव में एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू ने बड़ी जीत हासिल की है। विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार यशवंत सिन्हा ने अपनी हार स्वीकर कर ली है और उन्होंने द्रौपदी मुर्मू को बधाई दी। उन्होंने कहा, उम्मीद है कि आप बिना किसी भय और पक्षपात के संविधान की संरक्षक बनकर कार्य करेंगी। वहीं द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च पद पर पहुंचने वाली सबसे युवा आदिवासी महिला बन गई हैं। इस जीत के साथ ही उन्होंने इतिहास रच दिया है।

सबसे युवा राष्ट्रपति
द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को हुआ था। 25 जुलाई को उनकी उम्र 64 साल 1 महीना और 8 दिन होगी। द्रौपदी मुर्मू अब तक की सबसे युवा राष्ट्रपति होंगी। इससे पहले यह रिकॉर्ड नीलम संजीव रेड्डी के नाम था। जब वह राष्ट्रपति बने तो उनकी उम्र 64 साल दो महीने और 6 दिन थी। वह निर्विरोध राष्ट्रपति बने थे। वहीं सबसे ज्यादा उम्र में राष्ट्रपति बनने वाले में के आर नारायणन का नाम दर्ज है। वह 77 साल 5 महीने 21 दिन की उम्र में राष्ट्रपति बने थे।

ब्रिटिश पीएम रेस के फाइनल में पहुंचे ऋषि सुनक

0

ब्रिटेन के नए पीएम बनने के लिए भारतीय मूल के ऋषि सुनक ने एक और कदम आगे बढ़ाया है। कंजर्वेटिव सांसदों की ओर से की गई पांचवें दौर के मतदान में ऋषि सुनक फिर अव्वल रहे। सुनक को 137 वोट मिले। अब उनका मुकाबला आखिरी चरण के लिए लिज ट्रस से होगा। पांच दौर के मतदान में अव्वल रहे ऋषि सुनक की राह जितनी आसान दिख रही है, उतनी है नहीं। विपक्षी पार्टी और खुद बोरिस जॉनसन के करीबी सुनक को अगले पीएम के पद पर नहीं देखना चाहते हैं। 

भारतीय मूल के सांसद ऋषि सुनक और विदेश सचिव लिज ट्रस यूके के नए पीएम पद के शीर्ष दो दावेदारों के रूप में सामने आए हैं। सुनक को अंतिम चरण के मतदान में 137 मत मिले। जबकि लिज ट्रस ने बोरिस जॉनसन को ब्रिटिश प्रधान मंत्री और कंजर्वेटिव पार्टी के नए नेता की दौड़ में 113 वोट हासिल किए। पूर्व विदेश मंत्री सुनक ने कंजर्वेटिव सांसदों के बीच सभी दौर के मतदान में अव्वल रहे लेकिन, दूसरी ओर लिज ट्रस ने भी गवर्निंग पार्टी के लगभग 200,000 सदस्यों का समर्थन हासिल किया है।

सुनक की राह में रोड़े
ऋषि सुनक हालांकि पीएम पद की रेस में चल रहे पांचों दौर के मतदान में सबसे आगे रहे। लेकिन, विपक्षी दल और बोरिस जॉनसन के करीबी सुनक को पसंद नहीं करते हैं। वरिष्ठ सांसद डेविड डेविस ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर सुनक के चुनाव प्रचार दल के अभियान की जांच की मांग की है। दूसरी ओर बोरिस जॉनसन के करीबियों का मानना है कि बोरिस सरकार गिराने के पीछे सुनक का हाथ है। सुनक के इस्तीफे के बाद बोरिस जॉनसन कमजोर पड़ गए और उन्हें मजबूरी में सत्ता से बाहर होना पड़ा।

सुनक के लिए नया खतरा
इससे पहले चौथे दौर के मतदान में सुनक को 118 सांसदों का समर्थन मिला था। लेकिन डेविस ने आरोप लगाया कि सुनक की टीम ने 19 जुलाई को नवीनतम दौर की वोटिंग में अपनी जीत को सुरक्षित करने के लिए विदेश सचिव और प्रतिद्वंद्वी लिज ट्रस के वोट को स्थानांतरित किया। यह आरोप इसलिए भी सुनक के विपरीत जाता है क्योंकि बुधवार को पांचवे दौर की वोटिंग में 27 सांसदों में से सिर्फ 19 ने सुनक के पक्ष में मतदान किया।

गुरुवार को ED कार्यालय में सोनिया गांधी से पूछताछ

0

गुरुवार यानी 21 जुलाई को कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को प्रवर्तन निदेशालय ने पूछताछ के लिए बुलाया है। ED ने नेशनल हेराल्ड मामले में पहले भी सोनिया गांधी को समन भेजा था, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से सोनिया गांधी ने अतिरिक्त समय मांगा। अब उनसे 21 जुलाई को पूछताछ होनी है। उधर कांग्रेस ने इस मामले में देश भर में विरोध-प्रदर्शन का फैसला किया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ एकजुटता दिखाने के लिए कल AICC कार्यालय में एकत्र होंगे। इसमें पार्टी के सांसद भी शामिल होंगे और बाद में वे सभी ED कार्यालय तक जाएंगे। पार्टी ने अन्य विपक्षी दलों से भी एकजुटता दिखाने का अनुरोध किया है। सोमवार को विपक्षी नेताओं की एक बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे और जयराम रमेश ने अन्य दलों से 21 जुलाई को विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का अनुरोध किया।

संसद में भी उठेगा मामला

अभी संसद का मानसून सत्र चल रहा है। ऐसे में पूरी संभावना है कि संसद में भी ये मामला उठेगा और विपक्ष को सरकार के खिलाफ एक और मुद्दा मिल जाएगा। कांग्रेस ने शुरु से ही इस मामले को राजनीति से प्रेरित बताया है और उनका आरोप है कि बीजेपी सरकार ED का दुरुपयोग कर रही है। सोनिया गांधी से पहले राहुल गांधी भी ईडी की पूछताछ का सामना कर चुके हैं। राहुल गांधी से ईडी ने 30 घंटे से अधिक समय तक सवाल पूछे।

आवाम ने नफ़रत की राजनीति को नकारा-ओवैसी

0

मध्य प्रदेश के निकाय चुनाव में पहली बार हिस्सा ले रही असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने प्रदेश में कदम जमाना शुरू कर दिया है। राज्य में अब ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के 7 पार्षद जीत चुके हैं। प्रदेश में मिली इस जीत को लेकर एआईएमआईएम के कार्यकर्त्ता जोश में हैं। वहीं इस जीत के बड़े मायने तलाशे जा रहे हैं। खंडवा, बुरहानपुर, जबलपुर  और खरगोन में मिली कामयाबी को लेकर ओवैसी भी बहुत खुश नजर आ रहे हैं। खासकर खरगोन में एआईएमआईएम की हिन्दू केंडिडेट की जीत एक बड़े राजनीतक दांव के रूप में देखी जा रही हैं।

अपने प्रत्याशी की जीत को लेकर खुद ओवैसी ने भी ट्वीट कर लिखा कि अरुणा जी का हम शुक्रिया अदा करते हैं। उनकी जीत ने सही मायनों में खरगोन में सेक्युलरिज़्म और हिन्दू-मुस्लिम इत्तेहाद की मिसाल क़ायम की है। बता दें कि राम नवमी पर निकाले जाने वाले जुलुस के दौरान खरगोन में हिंसा भड़क उठी थी। उसके बाद यहां माहौल में साम्प्रदायिकता का जहर घुलने लगा था। ऐसे में एआईएमआईएम की हिन्दू केंडिडेट की जीत को सेक्युलरिज़्म से जोड़कर देखा जा रहा है।

मध्य प्रदेश में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन को मिली कामयाबी के बाद प्रदेश की सियासत में नया अध्याय जुड़ गया है। प्रदेश में पहली बार चुनाव लड़ने वाली असदुद्दीन की पार्टी ने राजनीति के नए विकल्प की राह को खोल दिया हैं।  AIMIM  की जीत के बाद माना जा रहा था की मुसलमानों को प्रदेश में नया नेतृत्व मिल गया हैं।

शिवराज जीतकर भी क्यों टेंशन में, पिछड़कर भी कांग्रेस की खुशी का राज

0

मध्य प्रदेश में शहरी निकाय चुनाव के नतीजे घोषित हो चुके हैं और अब राजनीतिक दल नफा-नुकसान के आकलन में जुट गए हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को जहां 9 शहरों नगर निगम में जीत हासिल हुई है तो कांग्रेस को 5 मेयर पद हासिल हुए हैं। वहीं आम आदमी पार्टी ने भी सिंगरौली में जीत हासिल करते हुए मजबूत दस्तक दी है। हालांकि, नगर पालिका और नगर परिषद में जरूर बीजेपी ने पहले से बेहतर प्रदर्शन किया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने भी कुछ वार्ड जीतकर अपनी मौजूदगी का अहसास कराया है।

9 शहरों में जीतकर भी क्यों टेंशन में बीजेपी
नतीजों के बाद भले ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा समेत अन्य नेता खुशी का इजहार कर रहे हैं और नगर पालिका-नगर परिषद का हवाला देते हुए इसे ऐतिहासिक जीत बता रहे हैं। लेकिन सच यह है कि पार्टी रणनीतिकारों के लिए चुनाव परिणाम ने कई मायनों में चिंता बढ़ा दी है। दरअसल, पिछले चुनाव में भाजपा ने सभी 16 नगर निगम में भगवा परचम लहराया था। इस लिहाज से पार्टी को 6 शहरों में मेयर का पद गंवाना पड़ा है। वहीं, कुछ सीटों पर मामूली अंतर से जीत मिली है। चिंता की बात यह भी है कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ ग्वालियर और केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के संसदीय क्षेत्र में भी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है।

क्या है कांग्रेस की खुशी का राज
कांग्रेस पार्टी ने ग्वालियर, जबलपुर, छिंदवाड़ा, रीवा और मुरैना में जीत हासिल की है। 5 शहरों में जीत हासिल करने के बाद कांग्रेस के नेता गदगद हैं। इसकी वजह सिर्फ यह नहीं है कि पिछली बार कांग्रेस एक भी निगम नहीं जीत पाई थी, बल्कि यह पहली बार है जब पार्टी ने 5 शहरों में मेयर का पद हासिल किया है। दरअसल, बीजेपी को शहरों की पार्टी समझा जाता है। पार्टी हमेशा से नगरीय इलाकों में मजबूत रही है और कांग्रेस पार्टी को ग्रामीण इलाकों में अधिक मजबूत माना जाता है। लेकिन इस बार बीजेपी को कई शहरों में झटका लगा है तो कांग्रेस ने उस क्षेत्रों में सेंधमारी की है, जिन्हें बीजेपी का गढ़ माना जाता है।

सिंधिया को गढ़ में पटखनी देने से खुश हैं कांग्रेस नेता
दो साल पहले कांग्रेस में बगावत करके मध्य प्रदेश में कमलनाथ की सरकार गिराने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ ग्वालियर में भी जीत मिलने से कांग्रेस बेहद उत्साहित है। पार्टी के कई नेता इसे सिंधिया से बदला बता रहे हैं। कांग्रेस से वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भी ट्विटर पर लिखा कि ग्वालियर में मिली जीत से ज्यादा खुशी उन्हें किसी चीज में नहीं हुई है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी इस हार के बाद सिंधिया पर जमकर निशाना साधा है। ग्वालियर में जहां कांग्रेस ने 57 साल बाद जीत हासिल की थी तो जबलपुर में करीब दो दशक बाद परचम लहराया है।

सीधी से साफ हुई भाजपा, कांग्रेस को नहीं मिला जनता का साथ

0

मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव के दूसरे चरण में सीधी नगर पालिका परिषद से 24 पार्षद सीटों के लिए बुधवार को मतगणना हुई। यहां की 24 सीटों में से 14 सीट पर कांग्रेस ने अपना कब्जा जमाते हुए शानदार वापसी की है। वहीं भारतीय जनता पार्टी सिर्फ छह सीटों पर जीत दर्ज कर पाई है। वहीं एक सीट पर आम आदमी पार्टी ने अपना कब्जा जमाया है और 3 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव जीते हैं ।

कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल की यह प्रतिष्ठा वाली सीट थी। यहां कांग्रेस ने शानदार वापसी कर नगर पालिका के अध्यक्ष पद पर अपना कब्जा जमाने के लिए एकतरफा जीत हासिल की है।

नगर पंचायत चुरहट में भी मिली जीत
नगर पंचायत चुरहट में कांग्रेस ने 15 सीटों में 10 सीटों पर सफलता हासिल की है। भारतीय जनता पार्टी सिर्फ 3 सीटों पर सिमट कर रह गई है, वहीं 2 सीटों पर निर्दलीयों ने अपना कब्जा जमाया है। आपको बता दें कि चुरहट विधानसभा क्षेत्र से पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल की प्रतिष्ठा दांव में लगी थी। वहीं दूसरी तरफ प्रदेश भाजपा के महामंत्री एवं चुरहट से विधायक शरतेंदु तिवारी भी अपनी इज्जत बचाने की कोशिश में जुटे थे।

सीधी जिले की एक नगर पालिका एवं तीन नगर पंचायत में आए चुनाव परिणाम में सीधी नगर पालिका में कांग्रेस पार्टी ने शानदार वापसी करते हुए भारतीय जनता पार्टी से यह सीट छीन ली है। जबकि चुरहट नगर पंचायत में कांग्रेस पार्टी का ही नगर पंचायत अध्यक्ष बनना तय माना जा रहा है। वहीं नगर पंचायत मझौली एवं रामपुर नैकिन में भारतीय जनता पार्टी अपना अध्यक्ष बनाने में सफल हो जाएगी। मझौली एवं रामपुर नैकिन में कांग्रेस पार्टी का नगर पंचायत अध्यक्ष था। दोनों सीट भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस से छीन ली है।

ईडी ने मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर संजय पांडेय को किया गिरफ्तार

0

फौन टैपिंग मामले में ईडी ने मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर संजय पांडेय को गिरफ्तार कर लिया है। उनपर आरोप हैं कि उन्होंने एनएसई के कर्मचारियों के अवैध रूप से फोन रेकॉर्ड किए थे। पांडेय 30 जून को रिटायर हुए हैं। उनपर आरोप है कि 2009 से 2017 के बीच उन्होंने गैरकानूनी तरीके से एनएसई के कर्मचारियों के फोन रेकॉर्ड किए। इसके लिए  iSEC Services Pvt Ltd नाम की कंपनी ने उन्हें 4.45 करोड़ रुपये दिए।  

 

तीन लोगों से पूछताछ के आधार पर केंद्रीय एजेंसी ने दिल्ली कोर्ट में सोमवार को दावा किया था कि 1997 से ही एनएसई के कर्मचारियों की फोन टैपिंग हो रही थी और इससे जुड़े सबूत और दस्तावेज भी बरामद किए जा चुके हैं। इससे पहले सीबीआई ने पांडेय और दूसरे पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह से 100 करोड़ की वसूली मामले में भी पूछताछ की थी। महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख इस मामले में आरोपी हैं।

एनएसई में वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर छानबीन करते वक्त ईडी को सेक्रेट फोन सर्विलांस मिले थे। इसके बाद ईडी ने इस बात की जानकारी केंद्रीय गृह मंत्रालय को दी थी। इसके बाद सीबीआई से इन आरोपों की जांच करने को कहा गया था। सीबीआई और ईडी दोनों ने ही संजय पांडेय के खिलाफ फोन टैपिंग मामले में केस दर्ज किया है। ईडी ने इस महीन को-लॉकेशन मामले में भी उनसे पूछताछ की थी।

सीबीआई और ईडी ने दिल्ली की कंपनी आईएसईसी सर्विसेज प्रैइवेट लिमिटेड समेत एनएसई के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ के खिलफ भी मामला दर्ज किया है। सीबीआई का आरोप है कि नारायण और रामकृष्ण ने फोन टैपिंग की साजिश रची थी। यह कंपनी पूर्व आईपीएस अधिकारी संजय पांडेय ने ही खोली थी।

खुशी कपूर के डेब्यू को लेकर बेहद एक्साइटेड हैं जान्हवी,

0

बॉलीवुड की खूबसूरत एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर की अपकमिंग फिल्म ‘गुड लक जेरी’ जल्द ही रिलीज होने वाली है। वहीं उन्होंने अपनी छोटी बहन खुशी के डेब्यू को लेकर बातें की। इसमें उन्होंने ट्रोलर्स को एक खास मैसेज दिया है। उन्होंने हंसते हुए कहा कि ‘अगर ट्रोलर्स उनकी बहन को ट्रोल करते हैं तो वे उन्हें नहीं छोड़ेंगी।’ हाल ही में हुए एक इंटरव्यू में जाह्नवी कपूर ने अपनी बहन की आने वाली पहली फिल्म ‘द आर्चीज’ को लेकर अपनी एक्साइटमेंट जाहिर की है। वे काफी खुश हैं कि खुशी जल्द ही अपना डेब्यू करने वाली है। खुशी कपूर जाह्नवी की छोटी बहन है। वे बोनी कपूर और दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी की बेटी हैं। खुशी जल्दी ही जोया अख्तर की फिल्म ‘द आर्चीज’ के साथ अपनी शुरुआत करने जा रही हैं। खुशी की यह फिल्म 2023 में रिलीज होगी। खुशी के अलावा इस फिल्म में सुहाना खान और अगस्त्य नंदा भी हैं।

अपनी बहन के लिए काफी एक्साइटेड हैं जाह्नवी

हाल ही में एक बातचीत में जाह्नवी कपूर से ये सवाल किया गया कि ‘उन्हें अपनी बहन की आने वाली पहली फिल्म के बारे में कैसा लगा।’ इसके जवाब में उन्होंने कहा कि ‘मैं बहुत खुश और एक्साइटेड हूं। मैं एक बार उनके आउटडोर शूट में भी गई थी। उनकी एनर्जी इतनी पॉजिटिव थी कि मुझे लगता है कि वे ऐसा कुछ बना रहे हैं जो कि दिल से है। और वह कुछ ऐसा है कि लोग उसे काफी प्यार देने वाले हैं। ये किड्स काफी टैलेंटेड और मेहनती हैं। मैंने अपनी बहन को काफी मेहनत करते हुए देखा है। उसने सच में कड़ी मेहनत की है। उसने इसके लिए ऑडिशन भी दिया है। खुशी को ये चाहिए ही था। मैं उसके लिए बहुत खुश हूं और उम्मीद करती हूं कि यह अच्छा हो।’

जाह्नवी ने दिया ट्रोलर्स को खास मैसेज

जाह्नवी ने आगे कहा कि ‘अगर ट्रोलर्स उनकी बहन खुशी को टारगेट करेंगे तो उन्हें बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगेगा।’ उन्होंने कहा कि ‘अगर कोई खुशी के बारे में कुछ भी बुरा कहता है तो ये सभी ट्रोलर्स, मैं उनको छोड़ूंगी नहीं। मैं कसम खाती हूं। मुझे नफरत है इन सब से।’ वहीं आगे जाह्नवी से पूछा कि ‘क्या उन्होंने अपनी छोटी बहन को कोई सलाह या टिप्स शेयर किया है।’ इसका जवाब देते हुए एक्ट्रेस ने कहा कि ‘उसे टिप्स की जरूरत नहीं है। वह काफी समझदार है।’ बता दें कि जाह्नवी की अगली फिल्म ‘गुड लक जेरी’ 29 जुलाई को रिलीज होने वाली है। यह 2018 में आई तमिल फिल्म ‘कोलामावु कोकिला’ की रीमेक है। इस फिल्म में नयनतारा और योगी बाबू ने एक्टिंग की थी। कुछ हफ्तों पहले ही जाह्नवी की इस फिल्म का ट्रेलर रिलीज हुआ था।

13 सितंबर से होगा विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र

0

मध्य प्रदेश विधानसभा का 25 जुलाई से प्रस्तावित पांच दिवसीय सत्र अब 13 सितंबर से होगा। राज्यपाल मंगु भाई पटेल ने सरकार के सत्र की तारीख में परिवर्तन के प्रस्ताव को अनुमति दे दी है। विधानसभा के प्रमुख सचिव अवधेश प्रताप सिंह ने पुनरीक्षित अधिसूचना मंगलवार को जारी कर दी। सत्र पांच दिवसीय ही रहेगा। इस बार शनिवार को भी सदन की कार्यवाही होगी।

विधानसभा के प्रमुख सचिव ने बताया कि सरकार के प्रस्ताव पर राज्यपाल ने मानसून सत्र की तारीख पुनरीक्षित करने करने की अनुमति दी है। अब सत्र 13 से 17 सितंबर तक होगा। इस दौरान सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए प्रथम अनुपूरक अनुमान (बजट) प्रस्तुत किया जाएगा। इसके लिए वित्त विभाग सभी विभागों से प्रस्ताव मांग चुका है। इसके अलावा नगर पालिक विधि द्वितीय संशोधन, भू-राजस्व संहिता में संशोधन सहित अन्य विधेयक प्रस्तुत किए जाएंगे।

सत्र की तारीख में परिवर्तन पर सभी थे सहमत

विधानसभा के मानसून सत्र की तारीख में परिवर्तन भाजपा और कांग्रेस विधायक दल की सहमति के बाद किया गया है। दरअसल, इस बार नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली यानी पार्षदों के माध्यम से किया जाना है। इसके लिए कलेक्टर निर्वाचित पार्षदों का सम्मेलन बुलाएंगे। इसी तरह जिला और जनपद पंचायत के अध्यक्ष का चुनाव होना है। इस प्रक्रिया में विधायकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। वहीं, विधानसभा के अध्यक्ष गिरीश गौतम और प्रमुख सचिव 22 अगस्त से कनाडा में होने वाले राष्ट्रमंडल संसदीय संघ के सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इसके लिए वे 20 अगस्त को जाएंगे और सितंबर के प्रथम सप्ताह में लौटेंगे। इसे देखते हुए सत्र सितंबर में प्रस्तावित किया गया है।

57 साल बाद भी नहीं टूटा मिथक, सिंधिया परविार नहीं बना सका अपनी मर्जी का मेयर

0

नगर निगम ग्वालियर न केवल प्रदेश बल्कि देश भर में बीजेपी के कार्यकर्ताओं को अपनी पार्टी की ताकत दिखाने का पांच दशक तक उदाहरण देने का काम करता था। 57 वर्ष पूर्व जब इस निगम में जनसंघ काबिज हुई थी तब देश मे यह चौंकाने वाली बात थी क्योंकि तब तक देश मे कांग्रेस इकलौती सियासी ब्राण्ड थी और जनसंघ बमुश्किल दो-चार पार्षदों को ही जिता पाती थी। लेकिन एक बार जनसंघ जीती इसके बाद फिर कांग्रेस इस पर काबिज नहीं हो पाई। मिथक बन गया कि जिस दल की कमान सिंधिया परिवार के पास रहती है, नगर निगम में उसका मेयर नहीं बन पाता।

इस बार इस मिथक के टूटने की संभावना थी क्योंकि इस नगर निगम पर बीजेपी का साढ़े पांच दशक से भी ज्यादा पुराना कब्जा था और कांग्रेस उसे हराना तो दूर उसे कभी चुनौती भी नही दे पाती थी। लेकिन इस बार कांग्रेस सिंधिया मुक्त हुई तो उसने चमत्कार करते हुए नगर निगम ग्वालियर को बीजेपी मुक्त कर दिया लेकिन सिंधिया परिवार से जुड़ा मिथक नहीं टूटा।

ग्वालियर के ऐतिहासिक नगर निगम की सत्ता पर पूरे सत्तावन साल से भाजपा कब्जा जमाये हुए बैठी थी। लेकिन इस बार का चुनाव ख़ास था। इसकी बजह है सिंधिया परिवार। सत्तर के दशक से अंचल की सियासत पर सिंधिया परिवार का कब्ज़ा रहा है। ख़ास बात ये कि सिंधिया परिवार कांग्रेस में टिकट बांटता रहा है लेकिन अभी तक कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि सिंधिया परिवार अपनी पार्टी के प्रत्याशियों के समर्थन में वोट मांगने सड़क पर उतरा हो।

लेकिन इस बार सब कुछ उलट – पुलट हुआ। सिंधिया इस बार कांग्रेस में नहीं बल्कि उसी बीजेपी में हैं जिसके खिलाफ वे लगातार अपने प्रत्याशी लड़ाते थे। सिंधिया परिवार ने पहली बार अपनी परंपरा को तोड़ते हुए नगर निगम मेयर और पार्षद प्रत्याशियों के लिए प्रचार किया,रोड शो किया और वोट मांगे। बावजूद यहां से पहली दफा कांग्रेस प्रत्याशी श्रीमती शोभा सिकरवार ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर ली।

महारानी ने ली थी कांग्रेस की सदस्यता

स्वतंत्रता  के बाद से ही सिंधिया परिवार का कांग्रेस में प्रवेश हो गया था। 1947 में देश आज़ाद हुआ और ग्वालियर रियासत का भारत सरकार में विलय हो गया। तत्कालीन महाराज जियाजी राव सिंधिया को भारत सरकार ने ब्रिटिश परम्परा की तरह उनको नव गठित मध्यभारत प्रान्त का राज्य प्रमुख बनाया था और उन्होंने ही राज्य के पहले मुख्यमंत्री सहित मंत्रिमंडल को शपथ दिलाई थी। राजतन्त्र समाप्त होने के बाद तत्कालीन महाराजा सिंधिया ने तो राजनीति में नहीं जाने का फैसला किया था लेकिन उनकी पत्नी महारानी विजयाराजे सिंधिया ने उप प्रधानमंत्री बल्लभ भाई पटेल के समक्ष कांग्रेस की सदस्यता ली थी।

इसके बाद वे सांसद और विधायक रहीं लेकिन 1967 में तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारिका प्रसाद मिश्रा से उनका विवाद हो गया और उन्होंने अपने समर्थक विधायकों के साथ कांग्रेस छोड़ दी और जनसंघ में शामिल हो गईं। इस तरह राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले और इंदिरा गांधी के सलाहकार पंडित डीपी मिश्र की सरकार का पतन हो गया। राजमाता के विधायकों के सहयोग से जनसंघ ने संभवत: देश की पहली गैर कांग्रेसी सरकार का गठन किया। जिसे इतिहास में संबिद सरकार के नाम से जाना जाता है। इस घटनाक्रम के समय राजमाता के इकलौते पुत्र माधव राव सिंधिया लन्दन में रहकर पढ़ाई कर रहे थे।

वे 1970 में  लौटे और कुछ महीनो बाद 25 वीं वर्षगांठ मनाई गई। राजमाता ने उन्हें अपनी परम्परागत गुना संसदीय सीट गिफ्ट की और उन्हें वहां से जनसंघ के टिकट पर चुनाव लड़ाया और जीत हासिल की। लेकिन युवा माधवराव को जनसंघ के विचार और तौर-तरीके पसंद नहीं आये और राजमाता से भी अलगाव होने लगा।  इस बीच तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी लगा दी। राजमाता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया और उनके पुत्र माधव राव नेपाल चले गए जहां उनकी बड़ी बहन उषा राजे भी रहती थी और स्वयं माधव राव का वहां ससुराल भी था।

इसी दौरान माधव राव और इंदिरा गांधी के बीच नजदीकी बढ़ी। इमरजेंसी हटने के बाद आम चुनाव हुए तो माधव राव ने जनसंघ से चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया। वे निर्दलीय मैदान में उतरे और कांग्रेस ने इनके खिलाफ अपना कोई प्रत्याशी नहीं उतारा। देश भर में चल रही कांग्रेस विरोधी लहर में पूरे उत्तर भारत से कांग्रेस साफ़ हो गई। स्वयं पीएम इंदिरा गांधी भी चुनाव नहीं जीत सकीं। मध्यप्रदेश में भी कांग्रेस का बुरा हाल हो गया। हालांकि फिर भी यहां दो लोकसभा सीटें जीती थी। एक छिंदबाड़ा और दूसरी गुना। छिंदवाड़ा  से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गार्गी शंकर मिश्रा जीत गए और गुना से माधवराव जीते।

मेयर के टिकट का फैसला सिंधिया करते लेकिन जनता हरा देती

इस जीत के साथ ही देश भर की निगाहें इस युवा सांसद पर गईं। जीत के कुछ साल बाद ही वे कांग्रेस में औपचारिक तौर पर शामिल हो गए। तब से वे अंतिम साँस तक कांग्रेस में रहे। हालाँकि हवाला मामले में नाम आने के बाद उन्होंने कुछ समय के लिए कांग्रेस छोड़ी और तमाम दलों से ऑफर मिलने के बावजूद वे किसी दल में शामिल नहीं हुए और ग्वालियर सीट से अपनी मप्र विकास कांग्रेस से चुनाव लड़े और शानदार जीत हासिल की। अपने अंतिम समय तक ग्वालियर नगर निगम में मेयर से लेकर पार्षद तक के टिकट का फैसला वे ही करते थे लेकिन वे कभी किसी मेयर या पार्षद प्रत्याशी का प्रचार करने नहीं गए।

उनके असामयिक निधन के बाद उनके युवा बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने परिवार की राजनीतिक विरासत संभाली। कांग्रेस के सभी निर्णय सूत्र पिता की तरह उनके हाथ में ही रहे लेकिन उन्होंने भी अपने आप को समर्थकों को सिर्फ टिकट देने तक सीमित रखा। प्रचार करके जिताने वे कभी सड़कों पर नहीं आये। यह भी सच है कि कांग्रेस में रहते कभी भी यहां काँग्रेस का मेयर नहीं बन सका।