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सूचना आयोग ने लोक सूचना अधिकारी के खिलाफ जारी किया गिरफ्तारी वारंट

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भोपाल। 38 समन और सवा लाख रुपये के जुर्माने का नोटिस जारी होने के बाद भी राज्य सूचना आयोग के समक्ष पेश न होने वाली लोक सूचना अध‍िकारी सुरभि दुबे को यह अनुशासनहीनता भारी पड़ गई। राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने उनके विरुद्ध अब गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। रीवा जोन के सहायक पुलिस महानिरीक्षक को निर्देश दिए गए हैं कि वे दुबे को गिरफ्तार करें। यदि वह 21 अप्रैल तक आयोग के समक्ष पेश होने का आश्वासन देती हैं तो उन्हें पांच हजार रुपये के मुचलके पर छोड़ा जा सकता है।

इससे पहले भी मप्र के बुरहानपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अध‍िकारी डा विक्रम सिंह के खिलाफ वांरट जारी किया गया था। सुरभि दुबे मूलत पंचायत निरीक्षक के पद पर जनपद पंचायत रीवा में पदस्थ हैं। उनके पास रायपुर कर्चुलियान जनपद पंचायत के लोक सूचना अध‍िकारी का भी प्रभार है।

दुबे को छह अपील प्रकरणों में सुनवाई के लिए राज्य सूचना आयोग ने 38 समन जारी किए पर वे उपस्थित नहीं हुईं। उन्होंने आयोग के आदेश अनुसार कोई जानकारी सूचना का अध‍िकार के तहत आवेदक को उपलब्‍ध भी नहीं कराई। आयोग ने एक प्रकरण में कुछ दस्तावेज मांगे तो वो भी नहीं दिए।

छह अपील के प्रकरणों में आयुक्त राहुल सिंह ने एक लाख 25 हजार रुपये के जुर्माने का कारण बताओ नोटिस भी जारी किया पर वे न तो आयोग के समक्ष उपस्थित हुईं और न ही कोई जवाब दिया। उन्होंने आनलाइन फोन पर सुनवाई की मांग की, जिसे स्वीकार कर लिया गया। पर जब फोन पर संपर्क किया तो उन्होंने बीमारी का बहाना बना दिया।

आयोग ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को उनके विरुद्घ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए भी लिखा लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद आयुक्त ने अब सूचना का अध‍िकार अध‍िनियम की धारा 18 में प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए रीवा के उप पुलिस महानिरीक्षक मिथिलेश कुमार शुक्ला को निर्देशित किया है कि 21 अप्रैल के पहले गिरफ्तारी वारंट तामील कराया जाए।

यह मांगी गई थी जानकारी

छह अपील प्रकरणों में अलग-अलग आवेदकों ने ग्राम पंचायत के बजट और निर्माण कार्य से जुड़ी जानकारियां मांगी थीं। किसी भी प्रकरण में जानकारी नहीं दी गई। जबकि, आयोग ने भी आदेश दिए पर क्रियान्वयन नहीं किया गया। आयुक्त ने अपने आदेश में कहा कि दुबे की कार्यप्रणाली के चलते दोनों जनपद पचांयत में सूचना का अध‍िकार अध‍िनियम के अधीन पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। किसी व्यक्ति को कोई जानकारी नहीं मिल रही है और न ही दोषी अध‍िकारी के विरुद्घ कार्रवाई हो पा रही है।

यूक्रेन और रूस के बीच बहुत जल्द युद्ध ख़तम हो सकता है

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रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध का आज 34वां दिन है। इस बीच तुर्की की राजधानी इस्तांबूल में यूक्रेन और रूस के प्रतिनिधियों के बीच लगभग 3 घंटों तक बातचीत हुई। वैसे तो इस बातचीत की शुरुआत में दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने हाथ तक नहीं मिलाया, लेकिन रुस ने इस बातचीत को सकारात्मक बताया है। ये बातचीत अगले हफ्ते भी जारी रहेगी। कीव ने कहा कि वह क्षेत्र या संप्रभुता से समझौता किए बिना युद्धविराम की मांग कर रहा है। इससे पहले सोमवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि वह रूस को सुरक्षा की गारंटी देने, तटस्थ रहने और खुद को न्यूक्लियर फ्री स्टेट घोषित करने के लिए तैयार हैं। लेकिन उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वे पुतिन की गैरवाजिब मांगों के आगे नहीं झुकने वाले हैं। वार्ता से पहले जेलेंस्की ने कहा कि अगर रूस असैन्यीकरण की बातें करेगा, तो हम बातचीत की मेज पर भी नहीं बैठेंगे।

विशेष परिस्थितियों में ही परमाणु हथियार का इस्तेमाल

इस बीच क्रेमलिन ने घोषणा की कि वो कुछ विशेष परिस्थितियों में ही परमाणु हथियार का इस्तेमाल करेगा। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने पीबीएस न्यूशोर के साथ एक इंटरव्यू में कहा कि रूस परमाणु हथियारों का इस्तेमाल केवल तभी करेगा जब “देश के अस्तित्व के लिए खतरा” होगा। रूस ने दावा किया है कि 28 मार्च तक उसने यूक्रेन के 123 एयरक्राफ्ट्स, 74 हेलिकॉप्टर्स को तबाह कर दिया है. इसके अलावा 309 मानव रहित विमान, 172 मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम, 1568 स्पेशल मिलिट्री ऑटोमोटिव इक्विपमेंट्स, 721 फील्ड आर्टिलरी व मोर्टार्स, 1721 टैंक और अन्य बख्तरबंद वाहन भी नेस्तनाबूद करने का दावा किया है.

जैसे-जैसे दिन बढ़ रहे हैं वैसे-वैसे रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध भी खतरनाक होता जा रहा है। रूस की तरफ से लगातार आक्रमक रुख अपनाया जा रहा है और उसकी बमबारी और एय़र स्ट्राइक से यूक्रेन के आम लोग मारे जा रहे हैं। मंगलवार को कथित तौर पर एक रूसी रॉकेट ने दक्षिणी यूक्रेन के बंदरगाह शहर मायकोलाइव में क्षेत्रीय प्रशासन की इमारत को निशाना बनाया, जिसके मलबे में 11 लोग फंस गए।

गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में 50 साल पुराने असम-मेघालय सीमा विवाद का अंत

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पिछले 50 सालों से चल रहा असम और मेघालय के बीच का सीमा विवाद अब खत्म हो गया है। राजधानी दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री ने इससे जुड़े एक समझौते पर हस्ताक्षर किया। मंगलवार को गृह मंत्रालय में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा और मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा पहुंचे और गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में सीमा विवाद से जुड़े समझौते को अंतिम रुप दिया। इस दौरान दोनों राज्यों के प्रमुख सचिव और अन्य अफसर भी मौजूद थे। समझौते के बाद गृहमंत्री अमित शाह ने बताया कि दोनों राज्यों के बीच विवाद के 12 बिन्दुओं में से 6 पर सहमति बन गई है और बाकी पर जल्द सहमति बनाई जाएगी।

असम-मेघालय के बीच कुल 884.9 किलोमीटर का बॉर्डर है जिसमें 12 विवादित क्षेत्र है। इनमें से 6 पर सहमति बन गई है, जो कुल विवादित हिस्से का 70 फीसदी है। दोनों मुख्यमंत्रियों ने सीमा विवाद को लेकर गृह मंत्री अमित शाह को जो सिफारिशें सौंपी थीं, उसके मुताबिक कुल 36.79 वर्ग किलोमीटर ज़मीन में से असम अपने पास लगभग आधी यानी 18.51 वर्ग किलोमीटर विवादित भूमि रखेगा और बाकी 18.28 वर्ग किलोमीटर ज़मीन मेघालय को देगा।

31 जनवरी को दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने गृह मंत्री अमित शाह को एक समझौता पत्र विचार के लिए सौंपा था। पूर्वोत्तर के इन दोनों राज्यों ने 12 विवादित स्थानों में से छह में सीमा विवाद को सुलझाने के लिए इसी साल 29 जनवरी को एक अंतर-राज्य सीमा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। तब दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ संयुक्त बैठक की थी और तय किया गया कि 29 मार्च को होनेवाली अगली बैठक में इस सीमा विवाद समझौते को अंतिम रूप देने को लेकर फ़ैसला लिया जाएगा। उम्मीद है कि इस समझौते से इस दोनों राज्यों के बीच चली आ रही दशकों पुरानी दुश्मनी और हिंसक झड़पों का अंत हो जाएगा।

ट्रांसपेरेंट ड्रेस पहन शहनाज गिल ने कराया ऐसा फोटोशूट

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एक्ट्रेस शहनाज गिल ने एक ऐसी अदाकारा हैं, जिन्होंने अपने ट्रांसफॉर्मेशन से हर किसी को चौंका दिया है। रिसेन्टली, शहनाज गिल ने फेमस फोटोग्राफर डब्बू रतनानी से अपना हॉट फोटोशूट कराया है! शहनाज ने इस ड्रेस को फैशन लेबल Ken Ferns से पिक किया था, जो उनके समर कलेक्शन का पार्ट था। इस ट्यूल फैब्रिक से बनी ड्रेस पर हैंड एंब्रॉइडरी की गई थी, जिसमें मल्टीकलर मिरर्स और सीक्वेंस नजर आ रहे थे। शहनाज ने अपने इस बॉडीकॉन सिल्हूट के साथ कुछ एक्स्ट्रा एलिमेंट्स ऐड किए थे।

प्रमोद सावंत ने दूसरी बार ली गोवा के मुख्यमंत्री पद की शपथ

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प्रमोद सावंत ने लगातार दूसरी बार गोवा के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। उनके नेतृत्व में भाजपा ने विधानसभा चुुनाव में जीत दर्ज की है। डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्टेडियम में सुबह 11 बजे यह शपथ-ग्रहण समारोह हुआ, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। प्रमोद सावंत के साथ ही विश्वजीत राणे, माविन बुदिन्हो, रवि नाईक, नीलेश कब्रल, सुभाष शिरोडकर ने भी शपथ ली। समारोह में 10,000 से अधिक लोग शामिल हुए। यह दूसरी बार है जब गोवा के मुख्यमंत्री राजभवन परिसर के बजाय अन्य जगह पर शपथ ली है। वर्ष 2012 में मनोहर पर्रीकर ने पणजी के कैंपल मैदान में मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी।
राज्यपाल पीएस श्रीधरन पिल्लई ने 29 मार्च से नई विधानसभा का दो दिवसीय सत्र बुलाया है। इस सत्र के दौरान सावंत को विश्वास मत हासिल करना होगा। सत्र के दौरान नए विधानसभा अध्यक्ष का भी चुनाव होगा। इस बीच भाजपा के रमेश तावड़कर ने गोवा विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया। इससे पहले गोवा के कार्यवाहक मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत भी उनके साथ थे। रमेश तावड़कर गोवा के कानाकोना शहर से भाजपा विधायक हैं। कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष ने विधायक अलेक्सो सिकेरा को विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार बनाया है।
हाल ही में संपन्ना राज्य चुनावों में, भाजपा ने 20 सीटों पर जीत हासिल की, जो 40 सदस्यीय सदन में बहुमत से एक कम है। महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी) के दो विधायकों और तीन निर्दलीय विधायकों ने भाजपा को समर्थन दिया है। सावंत (48) उत्तरी गोवा के सैंकलिम से विधायक हैं। 2017 में जब मनोहर पर्रीकर के नेतृत्व में भाजपा ने अपनी सरकार बनाई तो उन्हें विधानसभा अध्यक्ष चुना गया था। पर्रीकर के निधन के बाद उन्होंने मार्च 2019 में पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

ओबीसी मामले की आगामी सुनवाई जबलपुर हाई कोर्ट ने 27 अप्रैल को निर्धारित की

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जबलपुर। हाई कोर्ट ने अन्य पिछड़ा वर्ग, ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण को चुनौती के मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को निर्धारित कर दी है। ओबीसी आरक्षण विरोध में 23 याचिकाएं व ओबीसी के आरक्षण के समर्थन में 35 सहित कुल 58 याचिकाओं की एक साथ सुनवाई हुई। प्रशासनिक न्यायमूर्ति शील नागू व एमएस भट्टी की युगलपीठ में पक्ष रखा गया।

इसलिए निरस्‍त कर दिया था आवेदन : सर्व प्रथम अखिल भारतीय ओबीसी महासभा की ओर से उदय कुमार आधिवक्ता द्वारा दाखिल आवेदन पर सुनवाई की गई। उक्त आवेदन प्रकरणों के ओआइसी द्वारा जून 2021 में दाखिल शपथ पत्र में कुछ असत्य जानकारी कोर्ट में दाखिल करने के सम्बन्ध में था। ओआइसी के विरूद्ध दाण्डिक कार्रवाई करने हेतु दाखिल आवेदन को कोर्ट ने यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि अखिल भारतीय ओबीसी महासभा प्रकरण में इन्टरवींनर नहीं है। इसलिए उक्त आवेदन पर कोर्ट विचार नहीं कर सकता।

राज्य सरकार को निर्देशित किया कि मेडिकल में ओबीसी के 27% आरक्षण के मान से दिए गए प्रवेश में 13% याचिका के निर्णयाधीन रहेगा : इसके बाद कोर्ट ने विशेष अनुमति याचिका में पारित आदेश का अवलोकन किया व राज्य सरकार को निर्देशित किया कि मेडिकल में ओबीसी के 27% आरक्षण के मान से दिए गए प्रवेश में 13% याचिका के निर्णयाधीन रहेगा। शासन की ओर से महाधिवक्ता द्वारा कोर्ट को बताया कि शासन द्वारा प्रकरणों में समुचित आवेदन दाखिल किया जाना है इसलिए कोर्ट ने उक्त प्रकरणों को 27 अप्रैल 2022 फाइनल सुनवाई नियत की है। बिसेन आयोग द्वारा कलेक्ट किए डाटा न्यायालय में प्रस्तुत किए जा सकते हैं। शासन की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह व विशेष अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह के पक्ष रखा तथा इन्टरवीनर्स की ओर से उदय कुमार, परमानंद साहू, आरजी वर्मा व त्रिलोकी नाथ सोनकर ने पक्ष रखा। प्रकरणों की आगामी सुनवाई 27 अप्रैल को होगी।

अमरनाथ यात्रा 30 जून से शुरू होगी, 11 अप्रैल से होंगे ऑनलाइन रजिस्‍ट्रेशन

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जम्मू-कश्मीर में वार्षिक अमरनाथ यात्रा दो साल के अंतराल के बाद अब 30 जून से फिर शुरू होने जा रही है। इस दौरान यात्रा में कोरोना महामारी को लेकर सभी प्रकार के प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा। यात्रा परंपरा के अनुसार रक्षा बंधन के दिन – 11 अगस्त को समाप्त होगी। 43 दिवसीय इस तीर्थयात्रा के लिए ऑनलाइन रजिस्‍ट्रेशन 11 अप्रैल से शुरू होने वाले हैं। रविवार को उप राज्यपाल मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में हुई बोर्ड की बैठक में यह फैसला लिया गया। दक्षिण कश्मीर में 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हिमालय के अमरनाथ मंदिर की तीर्थयात्रा अनंतनाग जिले के पहलगाम ट्रैक और गांदरबल जिले के बालटाल ट्रैक दोनों से एक साथ शुरू होगी।

बोर्ड ने हेलीकॉप्टर से यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों को छोड़कर, 10,000 की दैनिक मार्ग-वार तीर्थयात्रियों की सीमा निर्धारित करने का भी निर्णय लिया है। इसने यात्रियों के लिए 2.75 किलोमीटर लंबी बालटाल से डोमेल तक मुफ्त बैटरी कार सेवा का विस्तार करने का भी निर्णय लिया। बैठक के दौरान सिंह ने यह भी निर्देश दिया कि साधुओं और संत समाज की सुविधा के लिए अखाड़ा परिषदों, आचार्य परिषदों को विशेष निमंत्रण भेजा जाए।

राज्‍यपाल के ट्वीटर हैंडल से ट्वीट भी किया गया है कि आज श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड की बोर्ड बैठक की अध्यक्षता की। 43-दिवसीय पवित्र तीर्थयात्रा 30 जून को सभी कोविड प्रोटोकॉल के साथ शुरू होगी और रक्षा बंधन के दिन परंपरा के अनुसार समाप्त होगी। हमने आगामी यात्रा पर भी विभिन्न मुद्दों पर गहन चर्चा की।

श्रद्धालुओं के लिए ये होंगे इंतज़ाम

इस बार श्रद्धालुओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए भी सभी प्रयास किए जाएंगे। यात्रियों के लिए संचार सुविधाएं भी बेहतर होंगी। विभिन्न सरकारी विभागों और एजेंसियों में तालमेल के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। बैठक में श्राइन बोर्ड के सीईओ नितेश्वर कुमार ने यात्रा मार्ग और भवन में श्राइन बोर्ड द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी दी।

कई नई पहल के साथ तैयारियां

इस वर्ष की यात्रा को लेकर अहम तैयारियां की ली गई हैं। अवास की क्षमता में वृद्धि के साथ, नए यात्री निवास भवन, स्वास्थ्य सुविधाएं, बेहतर ट्रैक, दूरसंचार सुविधाएं, हेलीकाप्टर सेवाएं, श्राइन बोर्ड की ऐप, घोड़े वालों के लिए साल भर का वीमा, यात्रियों और सेवा प्रदाताओं के लाभ के लिए कई पहल की गई हैं।

MP में बसे कश्मीरी पंडित वापस कश्मीर जाना चाहते हैं तो सरकार करेगी मदद

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भोपाल। मध्य प्रदेश के गृहमंत्री डा नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि मध्य प्रदेश में रह रहे कश्मीरी पंडित भाई-बहन अगर वापस कश्मीर जाना चाहते हैं, तो वे गृह विभाग को सूचित करें। सरकार‌ उनकी वापसी सुनिश्चित कराने के साथ-साथ भेजने की व्यवस्था भी करेगी। उन्होंने कहा कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म नहीं देखने की बात कहने वाले कांग्रेस ‌सांसद विवेक तन्खा से निवेदन है कि वह मध्य प्रदेश में रह रहें, उन कश्मीरी पंडितों की सूची उपलब्ध करा दें जो वापस जाना चाहते हैं।

दिग्विजय सिंह पर साधा निशाना

गृहमंत्री मिश्रा ने कहा कि कोर्ट से सजा होने के बाद दिग्विजय सिंह खुद को फंसाने की बात कहकर संघ और भाजपा का नाम ले रहे हैं। अगर उनका नाम बाद में जोड़ा गया‌ तो पहले क्यों नहीं कहा? दिग्विजय सिंह ऐसे अविश्वसनीय व्यक्ति है, जिन्हें सजा होने के बाद न्यायपालिका पर, चुनाव हारने पर चुनाव आयोग पर भरोसा नहीं रहता। लोकतंत्र की इससे बड़ी विडंबना क्या होगी कि मध्यप्रदेश का बंटाधार करने वाले दिग्विजय सिंह बिजली समस्या पर जनता की राय मांग रहे हैं। फर्क इतना ही है कि दिग्विजय सरकार के समय बिजली कभी-कभी ही आती थी और भाजपा सरकार के समय बिजली कभी-कभी ही जाती है।

इमरान खान की पार्टी पर नया संकट

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पाकिस्तान में सियासी सरगर्मियां बढ़ गई हैं। विपक्ष ने इमरान खान सरकार के खिलाफ आंदोलन छेड़ा है। तमाम विपक्षी दल इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आए हैं। इस बीच, पंजाब प्रांत में भी इमरान खान की पार्टी की सरकार खतरे में पड़ती नजर आ रही है। यहां भी विपक्षी दलों ने पाकिस्तान तहरिक-ए-इंसाफ के अगुवाई वाली सरकार के मुख्यमंत्री उस्मान बुजदार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया है।

इमरान खान ने इस्तीफा दिया, तो कौन बनेगा प्रधानमंत्री

कुछ उम्मीदवार ऐसे हैं जो पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री के रूप में इमरान खान की जगह ले सकते हैं। खान की जगह लेने वाले पहले उम्मीदवार पीएमएल-एन के अध्यक्ष शाहबाज शरीफ हैं, जो पाकिस्तान के पूर्व प्रधान मंत्री नवाज शरीफ के भाई हैं। सिंध के कृषि मंत्री और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेता मंजूर वासन भविष्यवाणी कर चुके हैं कि शाहबाज शरीफ देश के अगले प्रधानमंत्री होंगे।

एक और नाम जो प्रधानमंत्री पद के संभावित उम्मीदवार के रूप में सामने आता है, वह है पीपीपी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी। वह पाकिस्तान की पूर्व प्रधान मंत्री बेनज़ीर भुट्टो के बेटे हैं। उन्होंने हाल ही में दावा किया था कि इमरान खान सरकार जाने वाली है।

BJP-TMC विधायक बीरभूम हिंसा मुद्दे पर आपस में भिड़े, सुवेंदू अधिकारी समेत 5 सस्पेंड

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बीरभूम हिंसा के मुद्दा पर सोमवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में भारी हंगामा हुआ। भाजपा विधायकों ने हिंसा के बहाने प्रदेश के हालात पर टिप्पणियां की और राष्ट्रपति शासन की मांग तो टीएमसी के विधायक भड़क गए। सदन में ही दोनों पक्षों में हाथापाई हो गई। बाद में विधानसभा अध्यक्ष ने कार्रवाई करते हुए सुवेंदू अधिकारी समेत 5 भाजपा विधायकों को सस्पेंड कर दिया। भाजपा विधायक बीरभूम हिंसा पर चर्चा की मांग कर रहे थे। तभी हंगामा शुरू हो गया और भाजपा विधायक मनोज तिग्गा के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। टीएमसी विधायक असित मजूमदार ने भी दावा किया कि अराजकता में उन्हें चोटें आईं।

इस बीच, भाजपा नेता अमित मालवीय द्वारा ट्विटर पर साझा किए गए एक वीडियो में विधायकों के एक समूह को एक-दूसरे को धक्का देते और चिल्लाते हुए दिखाया गया है। वहीं एक अन्य वीडियो में एक विधायक अन्य विधायकों पर उन्हें धक्का देने और उनकी शर्ट फाड़ने का आरोप लगाते हुए दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा, ‘उन्होंने मुझे धक्का दिया…मेरी कमीज फाड़ दी।’

भाजपा के ये पांच विधायक सस्पेंड

1. सुवेंदू अधिकारी

2. मनोज तिग्गा

3. नरहरि महतो

4. शंकर घोष

5. दीपक बर्मन

बंगाल के बीरभूम में 22 मार्च को घरों में आग लगने से आठ लोगों की मौत हो गई थी। अज्ञात हमलावरों ने मंगलवार तड़के बोगटुई गांव में पेट्रोल बम फेंके और कुछ 10 घरों में आग लगा दी थी। यह घटना स्थानीय पंचायत के एक सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उप प्रमुख की कथित हत्या के बाद हुई।