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उत्तरी ग्रीस में यूक्रेन का मालवाहक विमान दुर्घटनाग्रस्त

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यूक्रेन स्थित एयर कैरियर द्वारा संचालित एक मालवाहक विमान शनिवार देर रात उत्तरी ग्रीस में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। ग्रीस के नागरिक उड्डयन अधिकारियों के मुताबिक, विमान में 8 लोग सवार थे। पायलट ने इंजन में खराबी के कारण आपात लैंडिंग का अनुरोध किया था, लेकिन विमान का सिग्नल खो गया और हादसे का शिकार हो गया।

आठ लोग थे सवार 
शनिवार देर रात उत्तरी ग्रीस के कवला शहर के पास आठ लोगों के साथ एक मालवाहक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, दमकल विभाग और राज्य टीवी ने यह जानकारी दी है। स्टेट टीवी ईआरटी ने बताया कि विमान एक यूक्रेनी कंपनी के स्वामित्व वाला एंटोनोव ए -12 था, जो सर्बिया से जॉर्डन के लिए उड़ान पर था।

ertnews.gr पर अपलोड किए गए वीडियो फुटेज में विमान को आग की लपटों में जमीन से टकराने से पहले तेजी से उतरते हुए दिखाया गया है, जो एक विस्फोट जैसा लगता है। दमकल विभाग विमान के प्रकार की पुष्टि नहीं कर सका, लेकिन कहा कि शुरुआती रिपोर्ट में आठ लोग सवार थे।

इसने एक बयान में कहा कि दुर्घटना के बाद लगी आग को बुझाने के लिए 15 दमकलकर्मियों और सात इंजनों को तैनात किया गया। और भी बचावकर्मियों को भेजा गया है। विशेष आपदा प्रतिक्रिया इकाई घटनास्थल की जांच कर रही है। दमकल विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि हम कार्गो को खतरनाक सामग्री मान रहे हैं।

रूस-यूक्रेन जंग जारी 
यह हादसा ऐसे वक्त पर हुआ है जब यूक्रेन और रूस के बीच जंग जारी है। रूस ने यूक्रेन पर हमले और तेज कर दिए हैं और रिहायशी इलाकों को भी निशाना बनाया जा रहा है। यूक्रेन भी हरसंभव अपनी ओर से रूस को जवाब दे रहा है। यूक्रेन का यह भी दावा है कि उसने रूस के 47 सैनिक मार गिराए हैं।

रूस-यूक्रेन युद्ध में शनिवार को दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया। एक तरफ जहां रूसी बमवर्षक विमानों ने यूक्रेन के दक्षिणपूर्वी शहर ‘दनिप्रो’ पर क्रूज मिसाइलें दागीं, जिससे 3 की मौत और 15 घायल हो गए। वहीं, यूक्रेनी सेना ने दक्षिणी यूक्रेन में 47 रूसी सैनिकों के साथ आठ हॉवित्जर तोप व कई सैन्य उपकरण नष्ट कर दिए।

एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ होंगे

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बीजेपी ने राज्यपाल जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति पद के लिए एनडीए का उम्मीदवार घोषित कर दिया है। भाजपा अध्यक्ष नड्डा ने इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने धनखड़ को किसान पुत्र बताया। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर लिखा कि मुझे यकीन है कि वे राज्यसभा में उत्कृष्ट अध्यक्ष होंगे। राष्ट्रीय प्रगति को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से सदन की कार्यवाही का मार्गदर्शन करेंगे। वहीं भाजपा सांसद हेमा मालिनी ने कहा कि ये एक बड़ी बात है कि पहली बार जाट समुदाय से आने वाले जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति का उम्मीदवार चुना गया है। यही नहीं राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार भी जनजातीय क्षेत्र से है। केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने कहा कि धनखड़ जी को हार्दिक बधाई। राजस्थान के किसी व्यक्ति को इस पद पर बिठाना सम्मान का विषय है।

जदयू का समर्थन

बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू नेता नीतीश कुमार ने एनडीए के उप राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ के लिए अपनी पार्टी का समर्थन व्यक्त किया। वहीं बीजेपी नेता राज्यवर्धन सिंह ने कहा, यह बहुत खुशी की बात है कि पहली बार राष्ट्रपति आदिवासी समाज से आ रही हैं और उपराष्ट्रपति उम्मीदवार ओबीसी समाज से है। यह राजस्थानियों के लिए विशेष रूप से बहुत गर्व की बात है।

6 अगस्त को होगा मतदान

माना जा रहा है कि जगदीप धनखड़ सोमवार या मंगलवार को नामांकन कर सकते हैं। मंगलवार को नामांकन की अंतिम तिथि है। उपराष्ट्रपति पद के लिए 6 अगस्त को मतदान होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, राजनाथ सिंह, अमित शाह, नितिन गडकरी और शिवराज सिंह चौहान के साथ संसदीय बोर्ड की लगभग एक घंटे चली बैठक में धनखड़ के नाम पर सहमति बनी।

रविवार को विपक्षी दल उपराष्ट्रपति पद के लिए अपने उम्मीदवार के नाम पर फैसला करेंगे। दरअसल, धनखड़ एक जुझारू व्यक्तित्व वाले नेता हैं और राज्यसभा का संचालन बखूबी निभाने में सक्षम होंगे। राजनीतिक पहलू भी कम नहीं है। हरियाणा में भाजपा लगातार दूसरी बार सत्ता में है। प्रदेश में भाजपा पर जाटों की अनदेखी का आरोप लगता रहा है। राजस्थान से धनखड़ खुद आते हैं और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले जाट समुदाय की ओर से यह निराशा जताई गई थी। उन्हें सही प्रतिनिधित्व नहीं मिलता है। अब देश में दूसरा सबसे बड़ा संवैधानिक पद जाट समुदाय से आए व्यक्ति को मिलेगा।

यासीन मलिक ने किया था जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री की बेटी का अपहरण

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जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद का अपरहण करने वालों में अलगाववादी नेता यासीन मलिक भी शामिल था। रुबैया सईद ने शुक्रवार को सीबीआई की विशेष अदालत में गवाही के दौरान अपने अपहरणकर्ताओं की पहचान की। रुबैया सईद जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बहन हैं। सईद का 8 दिसंबर 1989 में अपहरण किया गया था। 13 दिसंबर को पांच आतंकवादियों को छोड़े जाने के बाद रुबैया सईद की रिहाई हुई थी।

सीबीआई ने 1990 की शुरुआत में अपहरण के इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। यह पहली बार है जब रुबैया सईद को मामले के सिलसिले में अदालत में पेश होने के लिए कहा गया था। रुबैया सईद तमिलनाडु में रहती है। सईद को अभियोजन पक्ष की ओर से बतौर गवाह के रूप में पेश किया गया था।

घटना के करीब 31 साल से अधिक समय बाद यासीन मलिक और नौ अन्य के खिलाफ अदालत ने पिछले साल जनवरी में आरोप तय किए थे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अब इस मामले की सुनवाई की अगली तारीख 23 अगस्त तय की गई है। यासीन मलिक को हाल ही में टेरर फंडिग मामले में कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है।

दो मामलों में उम्रकैद की सजा, 5 में 10 साल की कैद

यासीन मलिक को दो मामलों में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है और 5 मामलों में 10 साल की सजा दी गई है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी और अधिकतम सजा उम्रकैद की है। इस तरह ताउम्र यासीन मलिक को जेल काटनी होगी। यासीन मलिक पर आतंकी गतिविधियों में शामिल होने, टेरर फंडिंग करने, आतंकी साजिश रचने और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने जैसे आरोपों में कई मामले दर्ज हैं।

फांसी की सजा की हुई थी मांग

एनआईए ने टेरर फंडिंग में दोषी ठहराए गए यासीन मलिक को फांसी की सजा दिए जाने की मांग की थी। एनआईए ने कहा कि यासीन मलिक ने जिस के जुर्मों को अंजाम दिया था, उसे देखते हुए मलिक को फांसी से कम की सजा नहीं दी जानी चाहिए। यासीन मलिक ने केस की सुनवाई के दौरान खुद भी अपना गुनाह कबूल किया था और वकील भी वापस कर दिया था।

युद्धपोत ‘दूनागिरी’ राष्ट्र को समर्पित

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज कोलकाता में जीआरएसई द्वारा निर्मित युद्धपोत ‘दूनागिरी’ राष्ट्र को समर्पित किया। इसके उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने इसे हनुमान जी और संजीवनी बूटी से जोड़ते हुए बड़ी बात कही। राजनाथ सिंह ने कहा, ‘यह युद्धपोत हमारे लिए बहुत बड़ी संपत्ति साबित होगा। भगवान लक्ष्मण के लिए ‘संजीवनी बूटी’ लाने के लिए भगवान हनुमान पूरे द्रोणागिरी पर्वत को उठा लाए थे। द्रोणागिरी या दूनागिरी भी किसी भी स्थिति में अपने काम को अंजाम देने में सक्षम है।’

इस अवसर पर बोलते हुए रक्षा मंत्री ने युद्धपोत निर्माण के संबंध में आत्मनिर्भरता के लिए नौसेना डिजाइन निदेशालय और अन्य नौसेना टीमों के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने विभिन्न चुनौतियों के बावजूद जहाज उत्पादन के क्षेत्र में जीआरएसई के निरंतर समर्थन और भारतीय नौसेना की भी सराहना की। रक्षा मंत्री ने कहा कि ‘दूनागिरी’ समुद्र, आकाश और पानी के भीतर से दुश्मनों को नष्ट करने के लिए बहुआयामी क्षमताओं वाला एक विश्व स्तरीय स्टील्थ फ्रिगेट होगा।

दुनिया के बदलते परिदृश्य में बुनियादी ढांचे और संपत्ति को बढ़ाने की आवश्यकता के बारे में बोलते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि  विभिन्न देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और व्यापारिक संबंध लगातार विकसित हो रहे हैं। हिंद महासागर क्षेत्र और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। भारत के राष्ट्रीय समुद्री हितों की रक्षा, संरक्षण और बढ़ावा देने के लिए, भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल और अन्य संगठनों को बुनियादी ढांचे को बढ़ाना होगा। और संपत्ति ताकि देश इन चुनौतियों से निपटने में सबसे आगे रहे।
दूनागिरी युद्धपोत के लांचिंग समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ नेवी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन (NWWA) की अध्यक्ष कला हरि कुमार भी मौजूद थीं। इस युद्धपोत का निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) ने किया है। यह जीआरएसई निर्मित दूसरा पी17ए युद्धपोत है।
नौसेना प्रमुख एडमिरल हरिकुमार ने कही बड़ी बात
समारोह में नौसेना प्रमुख एडमिरल आर. हरि कुमार ने कहा कि नौसेना के साजो सामान के 88 फीसदी अनुबंध भारतीय उद्यमों से किए जा रहे है। इनमें 1.75 लाख करोड़ का निवेश प्रगति पर है। इस तरह से नौसेना की खरीदी के लिए खर्च किए जाने वाले प्रत्येक 10 करोड़ रुपये में से 9 करोड़ रुपये हमारी अर्थव्यस्था में वापस आ जाते हैं।

सातों युद्धपोत के नाम पर्वतों पर
नौसेना के लिए इस श्रृंखला का चौथा युद्धपोत है।  नौसेना के लिए कुल सात शिवालिक क्लास पोत तैयार किए जा रहे हैं। चार मुंबई स्थित मझगांव डॉकयार्ड में तैयार किए जा रहे हैं। बाकी तीन जीआरएसई में।  मझगांव गोदी में पहले ही इस श्रेणी के दो युद्धपोत लांच किए जा चुके हैं। तीसरा युद्धपोत उदयगिरी लॉन्च किया गया था। सातों युद्धपोत देश की अलग-अलग पर्वत-श्रृंखला के नाम पर रखे गए हैं।

दो अक्तूबर से पहले भी शुरू हो सकती है कांग्रेस की भारत जोड़ो पद यात्रादो अक्तूबर से पहले भी शुरू हो सकती है कांग्रेस की भारत जोड़ो पद यात्रा

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कांग्रेस भारत जोड़ो पद यात्रा के माध्यम से पूरे देश के लोगों को एकजुट करके मोदी सरकार की नाकामियों के साथ-साथ लोगों में एकजुटता और भाईचारे का संदेश देना चाह रही है। उदयपुर में हुए नव संकल्प शिविर के दौरान तमाम तरह की नई योजनाओं के साथ-साथ लोगों को जोड़ने के लिए भारत जोड़ो पदयात्रा अभियान को शुरू करने की तारीख घोषित की गई थी। इसे लेकर पार्टी के जिम्मेदार नेताओं ने योजनाएं भी बनाई हैं.

उदयपुर के नव संकल्प चिंतन शिविर के दौरान कांग्रेस के आलाकमान ने तय किया था कि दो अक्तूबर से भारत जोड़ो पदयात्रा शुरू की जाएगी। लेकिन अब योजना बन रही है कि तकरीबन साढ़े तीन हज़ार किलोमीटर की इस पदयात्रा को दो अक्तूबर से पहले शुरू किया जाए। हालांकि अभी इस पर आधिकारिक रूप से कोई फैसला नहीं लिया गया है लेकिन कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक संभावना दो अक्तूबर से पहले इस यात्रा के शुरू होने की बन रही है। भारत जोड़ो यात्रा को लेकर कांग्रेस के सभी प्रदेश अध्यक्ष के साथ हुई बैठक में इस बात का जिक्र भी किया गया है। इसके अलावा इस यात्रा की पूरी रूपरेखा पर चर्चा भी की गई है।

वैसे तो कांग्रेस के नेताओं ने दो अक्तूबर को होने वाली भारत जोड़ो पर यात्रा को लेकर के पूरी रूपरेखा और तैयारियां कर ली हैं। लेकिन दिल्ली में हुई कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्षों के साथ भारत जोड़ो यात्रा के अध्यक्षता वाली समिति के मुखिया दिग्विजय सिंह के साथ हुई बैठक में कई और पहलुओं पर भी चर्चा की गई है। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस ने अपने सभी राज्यों के वरिष्ठ पदाधिकारियों और प्रदेश अध्यक्षों के माध्यम से इस यात्रा को सफल बनाने के लिए पूरा ब्यौरा मांगा था। जिसको पार्टी के नेताओं ने कमेटी के समक्ष रखा है।

अक्तूबर से चुनावी माहौल बनना होगा शुरू

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस की सबसे बड़ी भारत जोड़ो पद यात्रा दो अक्तूबर से शुरू होनी है। लेकिन पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक दो अक्तूबर तक इस पद यात्रा को शुरू करने में न सिर्फ देरी हो जाएगी, बल्कि विपक्ष का दबाव भी कम पड़ सकता है। कांग्रेस पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि दरअसल कुछ राज्यों में होने वाले चुनाव में अक्तूबर से माहौल बनना शुरू हो जाएगा। ऐसे में कांग्रेस की कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर की पदयात्रा में चुनावी प्रबंधन गड़बड़ा सकता है। यही वजह है कि पार्टी के कुछ नेता इस यात्रा की तारीख में बदलाव चाहते हैं।  फिलहाल अभी भारत जोड़ो पदयात्रा में कोई बदलाव नहीं किया गया है लेकिन आलाकमान की सहमति के साथ यह संभव भी है। इस पूरे अभियान की अगुवाई करने वाले दिग्विजय सिंह कहते हैं कि जिस तरीके से मोदी सरकार और भाजपा देश में माहौल खराब कर रही है, उससे कांग्रेस पार्टी की भारत जोड़ो यात्रा को तय तिथि से पहले शुरू करने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।

तीन हजार किलोमीटर की दूरी तय करेगी यात्रा

दरअसल कांग्रेस भारत जोड़ो पद यात्रा के माध्यम से पूरे देश के लोगों को एकजुट करके मोदी सरकार की नाकामियों के साथ-साथ लोगों में एकजुटता और भाईचारे का संदेश देना चाह रही है। उदयपुर में हुए नव संकल्प शिविर के दौरान तमाम तरह की नई योजनाओं के साथ-साथ लोगों को जोड़ने के लिए भारत जोड़ो पदयात्रा अभियान को शुरू करने की तारीख घोषित की गई थी। इसे लेकर पार्टी के जिम्मेदार नेताओं ने योजनाएं भी बनाई हैं और उसका प्रेजेंटेशन भी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कांग्रेस आलाकमान को सौंपा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश कहते हैं कि योजना के मुताबिक दो अक्तूबर से कांग्रेस कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत करेगी। उनका कहना है कि भारत जोड़ो यात्रा को शुरू करने से पहले की जो प्लानिंग और उसे आगे बढ़ाने के लिए जिस समिति का गठन किया गया था, उसके पास देश के सभी नेताओं की ओर से न सिर्फ सुझाव आए हैं बल्कि उसे सफल बनाने की पूरी कार्ययोजना साझा की गई है। भारत जोड़ो अभियान की अगुवाई कर रहे मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह कहते हैं कि यह यात्रा 12 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों से होते हुए साढ़े तीन हजार किलोमीटर की दूरी तय करेगी। इस पदयात्रा में कांग्रेस नेतृत्व समेत सभी कार्यकर्ता शिरकत करेंगे। दिग्विजय सिंह के मुताबिक पद यात्रा के मार्ग का पूरा ब्यौरा बहुत जल्द ही घोषित कर दिया जाएगा।

मध्‍यप्रदेश के पंचायत चुनाव में प्रत्‍याशी कहीं 1 वोट से जीत, कहीं मुकाबला रहा टाई

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मध्य प्रदेश के इंदौर चुनाव कार्यालय ने गुरुवार को पंच, सरपंच और चार जनपदों के सदस्यों के पदों के लिए हुए चुनाव के नतीजे घोषित कर दिए। बड़ियाकिमा ग्राम पंचायत में भाजपा समर्थित सरपंच उम्मीदवार कुंता बाई रावत एक वोट से जीत गईं। वहीं बघाना ग्राम पंचायत के सरपंच पद के लिए चुनावी मैदान में उतरे मुकेश परमार और संजय चौहान के बीच मुकाबला टाई रहा।

सांवर तहसीलदार तपिश पांडे ने कहा, ‘एक टाई-ब्रेकर के रूप में हमने एक बच्ची को दोनों उम्मीदवारों के नामों की पर्ची में से चुनाव करने को कहा। इसे एक वोट माना गया और बच्ची ने जो पर्ची चुनी, वह परमार के पक्ष में थी। जिसके बाद उन्हें विजेता घोषित किया गया।’ डॉ अंबेडकर नगर जनपद में भी पंच के तीन पदों पर प्रत्याशियों के बीच बराबरी का मुकाबला रहा, जिसके बाद पर्ची निकालकर विजेता की घोषणा की गई।

कई डिग्रियों वाली ममता ने भी जीता चुनाव
रंगवासा ग्राम पंचायत के सरपंच पद के लिए हुए चुनाव ने भी लोगों का ध्यान काफी आकर्षित किया। यहां बीए, एलएलबी, एमएसडब्ल्यू, पीजीडीसीए और बी.एड जैसी कई डिग्रियां हासिल कर चुकीं ममता चुनावी मैदान में थीं। वह आराम से चुनाव जीत गईं।

राष्‍ट्रपति पद की प्रत्‍याशी द्रौपदी मुर्मू मध्‍य प्रदेश के स्‍वागत से अभिभूत हुए

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राजग की ओर से राष्ट्रपति पद की प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू का शुक्रवार को दोपहर करीब 3:30 वह भोपाल पहुंचीं। स्टेट हैंगर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री पहलाद पटेल ,केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, ग्रह मंत्री नरोत्तम मिश्रा,और मंत्री विश्वास सारंग के साथ कार्यकर्ताओं ने किया राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार का स्वागत किया।

यहां भाजपा ने उनके भव्य स्वागत के लिए पहले से जोरदार तैयारी कर रखी थी। इस मौके पर आदिवासी लोक कलाकारों ने परंपरागत तरीके से उनका स्वागत किया। स्‍वागत से अभिभूत द्रौपदी मुर्मू ने मध्‍य प्रदेश की मुक्‍तकंठ से तारीफ की। उन्‍होंने अपनी संघर्ष यात्रा का भी उल्‍लेख किया और चुनाव में सबके सहयोग की अपेक्षा की।

मध्‍य प्रदेश में अब औद्योगिक क्षेत्र के ई-नीलामी से मिलेंगे भूखंड

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प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार अब निवेशकों को अधिक सुविधा उपलब्ध कराएगी। औद्योगिक क्षेत्र में भूखंड पहले आओ-पहले पाओ की जब अब ई-नीलामी के माध्यम से आवंटित किए जाएंगे। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और प्रतिस्पर्धा होने से सरकार को राजस्व भी अधिक प्राप्त होगा। बंद इकाइयों को भूखंड लौटाने, कुछ हिस्से के हस्तांतरण करने और भूखंड के विभाजन की सुविधा भी दी जाएगी। इसके लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में मध्य प्रदेश राज्य औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम 2019 में संशोधन प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई।

औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करके भूखंड उपलब्ध कराए जा रहे हैं। 83 औद्योगिक क्षेत्रों में 31 हजार 402 एकड़ भूमि पर विकसित किए गए हैं। आवंटन के लिए 20 हजार 536 एकड़ भूमि में से 14 हजार 887 दी जा चुकी है। शेष भूमि का आवंटन कुछ क्षेत्रों में मांग कम होने और एकमुश्त भुगतान की व्यवस्था है।

इसे देखते हुए एकमुश्त की जगह किस्तों में भुगतान की सुविधा देने का निर्णय लिया है। साथ ही पहले आओ-पहले पाओ की जगह ई-नीलामी के माध्यम से आवंटन किया जाएगा ताकि सभी को मौका मिल सके। प्रक्रिया में पारदर्शिता रहेगी और प्रतिस्पर्धा भी होगी, जिससे सरकार को राजस्व अधिक प्राप्त होने की संभावना है।

कई इकाइयां आवंटित भूखंड का पूरा उपयोग नहीं करती हैं। ऐसी इकाइयां, जो उत्पादन प्रारंभ होने के पांच वर्ष के भीतर भूमि का पूरा उपयोग नहीं करती हैं, उनका पट्टा निरस्त करके अधिपत्य लिया जा सकेगा। भूखंड के हस्तांतरण और विभाजन की सुविधा भी अब दी जाएगी। इसके लिए मूल इकाई को सभी न्यायालयीन प्रकरण वापस लेने होंगे और सभी शासकीय विभागों का बकाया चुकाना होगा। बंद हो चुकी इकाइयों को भूखंड लौटाने की सुविधा भी मिलेगी। इसमें इकाइयों को प्रब्याजी के साथ विकास शुल्क वापस किया जाएगा।

भाजपा पर कांग्रेस विधायक उमंग सिंघार ने लगाया वोट के बदले रुपये देने का आरोप

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राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव 18 जुलाई को होना है। विपक्षी दलों के प्रत्याशी यशवंत सिन्हा गुरुवार को भोपाल में कांग्रेस विधायक दल की बैठक में शामिल हुए। इसमें गंधवानी विधानसभा क्षेत्र से विधायक उमंग सिंघार ने कहा कि उन्हें भाजपा की प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने के लिए 50 लाख रुपये की पेशकश की गई है। धरमपुरी विधानसभा क्षेत्र से विधायक पांचीलाल मेड़ा ने भी कहा कि उन्हें मंत्री पद का प्रस्ताव दिया गया है। सिन्हा ने इसे दुखी करने वाली घटना बताते हुए कहा कि जब भाजपा मुझे हारा हुआ प्रत्याशी बता चुकी है तो फिर इस तरह के हथकंडे क्यों अपनाए जा रहे हैं। रिटर्निंग आफिसर और भारत निर्वाचन आयोग को इसकी जांच करनी चाहिए। उन्होंने प्रजातंत्र की रक्षा के लिए सभी विपक्षी दलों से आगे आने की अपील की।

भोपाल के एक होटल में आयोजित कांग्रेस विधायक दल की बैठक के बाद हुई पत्रकारवार्ता में यशवंत सिन्हा ने कहा कि आज मैं बहुत दुखी हूं। विधायक ने बैठक में कहा कि उनको फोन आ रहे हैं। प्रलोभन दिया जा रहा है कि इतने पैसे ले लो और वोट हमारे प्रत्याशी के पक्ष में दे दो। मैंने अभी तक सुना था कि विधायकों को प्रलोभन दिया जा रहा है पर भोपाल में इसका प्रमाण मिल गया। कभी कल्पना भी नहीं की थी कि मैं चुनाव में खड़ा हो जाऊंगा तो यह हाल जाएगा। भाजपा डर गई है इसलिए विधायकों की खरीद फरोख्त का रास्ता अपनाया है। मध्य प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र में चुनी हुई सरकार को अपदस्थ किया गया। गोवा में कांग्रेस के विधायकों को तोड़ने का प्रयास हुआ। लोकतंत्र में इससे बड़ा अपराध नहीं हो सकता है। शिवसेना द्वारा राष्ट्रपति पद के लिए द्रौपदी मुर्मू का समर्थन किए जाने पर कहा कि शिवसेना को तोड़कर सरकार गिराने के बाद अब दबाव बनाया जा रहा है कि हमारे प्रत्याशी का समर्थन करें। आज की भाजपा और पुरानी भाजपा में जमीन आसमान का अंतर है। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार एक वोट से गिर गई थी। आज की भाजपा में इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है।

सिंघार ने नवदुनिया से चर्चा में कहा कि वोट के बदले भाजपा नेताओं द्वारा 50 लाख रुपये का प्रलोभन दिया गया है। हमारे दल के कुछ अन्य विधायकों से भी संपर्क किया गया है। उधर, पांचीलाल मेड़ा ने भी मीडिया से चर्चा में कहा कि मुझे मंत्री पद देने का प्रस्ताव दिया गया है। पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने दावा किया कि कांग्रेस के सभी विधायक एकजुट हैं और पार्टी लाइन पर ही मतदान करेंगे।

देश के भविष्य का है चुनाव

सिन्हा ने राष्ट्रपति चुनाव को देश के भविष्य का चुनाव बताते हुए कहा कि प्रजातंत्र को बचाने की लड़ाई हमें लड़नी है। मुझे खुशी है कि मैं इस लड़ाई का प्रतीक बन गया हूं। भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वे उन्हें प्रधानमंत्री नियुक्त करे, तभी तो वे काम करके दिखा पाएंगी। राष्ट्रपति के पद में कुछ नहीं रखा है।

सागर में पर्ची डालकर आया परिणाम

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मध्य प्रदेश में तीन चरणों में कराए गए ग्राम, जनपद और जिला पंचायत के चुनाव के गुरुवार को पंच, सरपंच और जनपद सदस्य के परिणाम घोषित कर दिए। विकासखंड मुख्यालयों पर रिटर्निंग आफिसर ने परिणामों की घोषणा करके निर्वाचन प्रमाण पत्र जारी किए। जिला पंचायत सदस्य पद के लिए विकासखंड स्तर पर मतगणना हो चुकी है।

इसके परिणाम शुक्रवार को घोषित किए जाएंगे। सरपंच, जनपद और जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में कई नेताओं के रिश्तेदार जीते तो कुछ को हार का भी सामना करना पड़ा। शमशाबाद से विधायक राजश्री सिंह की बेटी जिला पंचायत का चुनाव हार गई हैं तो धार से सांसद छतरसिंह दरबार की पत्नी और बहू चुनाव जीत गई हैं। वहीं, सागर में ग्राम पंचायत सिंगारचोरी के सरपंच पद का निर्णय पर्ची निकालकर किया गया।

तीन चरणों में दो लाख 33 हजार 620 पंच, 712 सरपंच और 157 जनपद सदस्य निर्विरोध चुने गए थे। 97 सरपंच और 58 हजार 288 पंच पदों के लिए नामांकन पत्र ही दाखिल नहीं हुए। 71 हजार 445 पंच, 22 हजार 115 सरपंच, छह हजार 614 जनपद सदस्य पद के लिए चुनाव कराए गए थे। इनके परिणाम देर शाम तक विकासखंड मुख्यालय पर घोषित कर दिए गए।

सागर में ग्राम पंचायत सिंगारचोरी में सरपंच पद के लिए अजय लंबरदार और बलवान सिंह राजपूत को 416-416 मत मिले थे। इसके बाद पर्ची निकालकर निर्णय हुआ। इसमें बलवान सिंह राजपूत विजयी घोषित हुए। उधर, राजगढ़ में कांग्रेस के पूर्व विधायक कृष्णमोहन मालवीय की पत्नी चुनाव हार गईं।

पूर्व विधायक डा.रामप्रसाद दांगी की पुत्रवधू शीतल दांगी वार्ड चार से चुनाव जीतीं। छिंदवाड़ा में पूर्व विधायक दीपक सक्सेना के बेटे जय सक्सेना रोहना से सरपंच निर्वाचित हुए। पूर्व विधायक चंद्रभान सिंह की बहू कविता चौधरी मालनवाड़ा से सरपंच चुनी गईं।

पूर्व गृह राज्यमंत्री जगदीश मुवेल के पुत्र अजय राज जनपद पंचायत का चुनाव हार गए। खंडवा के खालवा क्षेत्र क्रमांक 14 से वन मंत्री विजय शाह के पुत्र दिव्यादित्य शाह 29 हजार मतों से चुनाव जीते हैं। पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने दावा किया है कि कई जिला पंचायत में पार्टी समर्थक प्रत्याशी सदस्य का चुनाव जीते हैं।

भोपाल, जबलपुर, रीवा, छिंदवाड़ा सहित अन्य जिलों में कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी अधिक जीते हैं। जबकि नर्मदापुरम, गुना, सागर, रतलाम, इंदौर, ग्वालियर सहित अन्य जिलों में भाजपा समर्थित प्रत्याशी अधिक जीते हैं। यहां जिला पंचायत अध्यक्ष भाजपा का बनना तय है।

जनपद और जिला पंचायत अध्यक्ष पद की जोड़ तोड़ शुरू

पंचायत चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भाजपा और कांग्रेस के नेता जनपद और जिला पंचायत अध्यक्ष पद की जोड़-तोड़ में लग गए हैं। गैर दलीय आधार पर होने वाले इस चुनाव में राजनीतिक दलों का पूरी दखल रहता है। भाजपा ने मंत्री, सांसद और विधायकों को पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के निर्वाचन की जिम्मेदारी सौंपी है। वहीं, कांग्रेस ने विधायक और जिला प्रभारियों को अध्यक्ष के चुनाव का दायित्व सौंपा है।