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मध्‍य प्रदेश के मुख्‍यमंत्री शिवराज उज्‍जैन के इस्कान मंदिर में कृष्ण भक्ति में झूमे

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जनआशीर्वाद रैली में शामिल होने आए मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान बुधवार देर शाम भरतपुरी स्थित इस्कान मंदिर पहुंचे। यहां भक्तों ने नृत्य व कीर्तन करते हुए उनकी अगवानी की। कृष्ण भक्ति में आल्हादित सीएम शिवराज खुद को रोक नहीं पाए और कीर्तन करते हुए नृत्य करने लगे। मुख्यमंत्री को भावविभोर देख अन्य लोगों ने भी उनके साथ नृत्य किया।

मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान उज्जैन आए थे, इस पर हमने उनके इस्कान मंदिर में भी दर्शन करने आने का आग्रह किया। जनआशीर्वाद रैली के बाद मुख्यमंत्री अपने निर्धारित कार्यक्रम से समय निकालकर शाम करीब 7.45 बजे इस्कान मंदिर पहुंचे। मुख्य द्वार पर भक्तों ने नृत्य व कीर्तन करते हुए उनकी अगवानी की। इसके बाद उन्हें मंदिर के भीतर ले जाया गया। जहां मुख्यमंत्री ने भगवान राधा मदन मोहन की आरती की।

इसके बाद मंदिर के ऑडिटोरियम में इस्कान प्रबंधन के प्रमुख गोपाल कृष्ण गोस्वामीजी महाराज तथा इस्कान ब्यूरो के सचिव बासु घोष प्रभुजी ने मंदिर को 14 हजार 674 वर्ग मीटर जमीन दिलवाने के लिए आभार मानते हुए स्वागत किया। इस्कान मंदिर की ओर से मुख्यमंत्री को शाल, श्रीफल के साथ इस्कान के संस्थापर्क आचार्य श्रील प्रभुपादजी की 125 वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अनावरित चांदी का सिक्का तथा रामायण आर्ट बुक भेंट की गई। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा, उच्च शिक्षा मंत्री डा.मोहन यादव, सांसद अनिल फिरोजिया, भाजपा के महापौर प्रत्याशी मुकेश टटवाल आदि मौजूद थे।

सरफराज खान के आंखों से छलके आंसू

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सरफराज खान एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी है। भारतीय टीम के पूर्व कप्तान विराट कोहली भी उनकी तारीफ कर चुके हैं। रणजी ट्रॉफी के फाइनल में गुरुवार को मध्यप्रदेश के खिलाफ बल्लेबाज ने शतकीय पारी खेली। इस पारी को खेलने के बाद वह भावुक हो गए। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस सीजन का रणजी फाइनल 41वीं बार की चैंपियन मुंबई और 22 साल बाद फाइनल में पहुंची मध्यप्रदेश टीम के बीच खेला जा रहा है। 22 जून को शुरू हुए इस मैच में मुंबई के कप्तान पृथ्वी शॉ ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनी। फाइनल की पहली पारी में सरफराज ने 134 रन बनाए। उन्होंने अपनी शतकीय पारी में 243 गेंदों का सामना किया। इसमें 13 चौके और 2 छक्के शामिल हैं। मुंबई पहली पारी में 374 रन पर आल आउट हो गई।

सरफराज हुए भावुक

इस खिलाड़ी ने सीजन का चौथा शतक जड़ा। सेंचुरी लगाने के बाद सरफराज खान इमोशनल हो गए और रोने लगे। उन्होंने दिवंगत पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला का सिग्नेचर स्टेप कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान काफी भावुक नजर आए। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

150 से ज्यादा का औसत

सरफराज फाइनल से पहले 275, 63, 48, 165, 153, 40 और 59 रन की पारी खेल चुके हैं। उन्होंने रणजी ट्रॉफी 2021-22 में 8 पारियों में 900 से ज्यादा रन बना चुके हैं। उनकौ औसत 150 से ज्यादा का है।

फिल्म को लेकर ट्रोल हो रहे हैं Akshay Kumar

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बॉलीवुड के हिट-मशीन अक्षय कुमार (Akshay Kumar) अपनी अगली फिल्म ‘रक्षा बंधन’ (Raksha Bandhan) की रिलीज के लिए पूरी तरह से तैयार हैं. कल यानी मंगलवार को ही फिल्म का ट्रेलर रिलीज किया गया था. ट्रेलर में बड़े भाई यानी अक्षय का अपनी बहनों के लिए प्यार और बलिदान दिखाया गया है. वहीं, फैंस भी ट्रेलर को काफी प्यार दे रहे हैं. हालांकि, फिल्म में खिलाड़ी कुमार के लुक की वजह से कुछ लोग उन्हें ट्रोल भी कर रहे हैं. दरअसल, लोग हर फिल्म में अक्षय के एक ही मूंछ वाले लुक को देख-देख कर परेशान हो चुके हैं. कई यूजर्स ने कहा है कि अक्षय अपने लुक के साथ एक्सपेरिमेंट्स क्यों नहीं कर रहे हैं जैसा कि वो अपनी एक्टिंग में करते हैं.

अक्षय कुमार के कई फैंस ने सोशल मीडिया पर इस बात का जिक्र किया है कि ‘रक्षा बंधन’ में अक्षय का लुक उन्हें उनकी पिछली फिल्मों जैसे ‘जॉली एलएलबी’, ‘गोल्ड’ और ‘सम्राट पृथ्वीराज’ की याद दिला रहा है. क्योंकि इस फिल्म में भी खिलाड़ी कुमार मूंछों में दिखाई दे रहे हैं. ट्रेलर पर अपना रिएक्शन देते हुए एक यूजर ने लिखा- ‘बाकी सब तो ठीक है, सेम लुक क्यू है हर मूवी में. जॉली एलएलबी, टॉयलेट एक प्रेम कथा, गोल्ड, बेल बॉटम में भी यही था’. एक और यूजर ने लिखा- ‘क्या भैया, आजकल जब लोग रियलिस्टिक लुक रखते हैं, लुक्स पर बहुत ध्यान देते हैं, तुमने फिर वही खेल कर दिया. घर में पुरानी मूंछ पड़ी थी लगा ली. भैया पैसा कमाने के चक्कर में फैंस को शर्मिंदा करते हुए शर्म नहीं आती? बिना मूंछ के भी ये रोल हो सकता था.’

लोगों का रिएक्शन देखकर एक बात तो तय है कि अक्षय अपनी नई फिल्म ‘रक्षा बंधन’ में अपने लुक से लोगों को इम्प्रेस नहीं कर पाए हैं. खैर आनंद एल राय के डायरेक्शन में बनी फिल्म का ट्रेलर कल रिलीज हुआ है जिसमें अक्षय कुमार और भूमि पेडनेकर लीड रोल में हैं. जैसा कि नाम से पता चलता है, फिल्म की कहानी भाई-बहन के रिश्ते पर बेस्ड है. भाई अपनी बहनों की शादी होने तक खुद की शादी करने से इंकार कर देता है. ये फिल्म इसी साल 11 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होगी.

नाम वापसी के बाद नगरीय निकाय चुनाव की तस्वीर साफ

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नाम वापसी की समय सीमा समाप्त होने के बाद बुधवार को नगरीय निकाय चुनाव की तस्वीर साफ हो गई। भोपाल सहित अन्य नगर निगमों में कांग्रेस और भाजपा के कार्यकर्ताओं द्वारा जमा किए गए नामांकन पत्रों को पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के पक्ष में वापस ले लिया। उधर, पंचायतों की तरह सीहोर जिले की शाहगंज, सागर जिले की बरोदिया नगर परिषद के सभी पार्षद निर्विरोध निर्वाचित हुए। वहीं, कुछ निकायों में अधिकांश भाजपा प्रत्याशी निर्विरोध चुने गए। पहले चरण का नगरीय निकाय चुनाव छह जुलाई और दूसरे चरण का 13 जुलाई को होगा।

राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने बताया कि नाम वापस लेने की अवधि समाप्त होने के बाद प्रत्याशियों को प्रतीक चि- आवंटित कर दिए गए हैं। मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के प्रत्याशियों को आरक्षित चिन्ह दिया गया है। वहीं, महापौर और पार्षद पद के निर्दलीय प्रत्याशियों को मुक्त चिन्ह आवंटित किए हैं।

इस बार चुनाव में पार्षद पद के प्रत्याशी के लिए भी अधिकतम व्यय सीमा निर्धारित की गई है। पहली बार नगर निगम क्षेत्र में व्यय पर्यवेक्षक नियुक्त करने का निर्णय लिया है। ये प्रत्याशियों द्वारा किए जाने वाले व्यय पर नजर रखेंगे। वहीं, चुनाव में आचार संहिता का पालन सुनिश्चित कराने के लिए कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।

पंचायत चुनाव के पहले चरण का चुनाव प्रचार गुरुवार को थम जाएगा

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मध्य प्रदेश में त्रिस्तरीय (ग्राम, जनपद और जिला) पंचायत के पहले चरण के चुनाव का प्रचार गुरुवार को दोपहर तीन बजे से थम जाएगा। 25 जून को सुबह सात से तीन बजे तक मतदान होगा। इसके बाद मतदान केंद्र स्तरीय मतगणना प्रारंभ होगी पर परिणामों की घोषणा नहीं की जाएगी। विकासखंड स्तर पर होने वाली मतगणना 28 जून को होगी।

पंच, सरपंच और जनपद पंचायत के सदस्य पद के परिणामों की घोषणा एक साथ 14 जुलाई को की जाएगी। जिला पंचायत के सदस्य पद के लिए मतों की गणना 15 जुलाई को जिला मुख्यालय पर होगी। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, नरसिंहपुर और हरदा जिले में पंचायत चुनाव पहले चरण में पूरा हो जाएगा।

मतदान समाप्ति से 48 घंटे पहले चुनाव प्रचार थम जाएगा। इस दौरान सार्वजनिक सभा प्रतिबंधित रहेगी। शराब की दुकानें भी निर्वाचन क्षेत्र में बंद रखी जाएंगी। पहले चरण में 115 जनपद पंचायत और आठ हजार 702 ग्राम पंचायतों के चुनाव होंगे।

एक करोड़ 49 लाख 23 हजार 165 मतदाताओं 27 हजार 49 मतदान केंद्रों पर मतदान करेंगे। इस बार जिला और जनपद पंचायत का चुनाव भी मतपत्र के माध्यम से होगा। पिछले चुनाव में यह चुनाव इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन से कराए गए थे। प्रत्येक मतदाता पंच, सरपंच, जनपद और जिला पंचायत सदस्य के लिए मतदान करेंगे।

प्रत्येक के लिए अलग-अलग रंग के मतपत्र रहेंगे। मतदान दल 24 जून को शाम तक मतदान केंद्रों पर पहुंच जाएगा। आयोग ने चुनाव को देखते हुए सुरक्षा के तगड़े प्रबंध किए हैं। संवेदनश्ाील केंद्रों पर पुलिस के साथ-साथ सशस्त्र बल के जवान भी तैनात रहेंगे।

बागी विधायक एकनाथ शिंदे का सीएम ठाकरे को जवाब, ‘गठबंधन से बाहर निकलें, तभी बचेगी शिवसेना’

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इस बार उद्धव ठाकरे सरकार पर गंभीर संकट दिख रहा है। उद्धव ठाकरे की ओर से जनता के संबोधन के बाद पार्टी के बागी विधायक एकनाथ शिंदे का बयान सामने सामने आया है। शिंदे ने कहा है कि पार्टी के अस्तित्व के लिए अप्राकृतिक गठबंधन से बाहर निकलना जरूरी है। शिंदे ने साफ शब्दों में कहा कि एमवीए सरकार में घटक दलों को फायदा पहुंचाया गया है।

एकनाथ शिंदे ने अपने गुट को असली शिवसेना करार दिया है। शिवसेना के बागी गुट एकनाथ शिंदे खेमे ने महाराष्ट्र के डिप्टी स्पीकर को 34 विधायकों के साइन वाली चिट्ठी भेजी है, जिसमें उन्होंने एकनाथ शिंदे को अपना नेता चुने जाने की बात कही है। इसमें तीस विधायक शिवसेना के हैं और चार निर्दलीय हैं। इसके साथ ही एकनाथ शिंदे ने चीफ व्हिप के तौर पर भरत गोगावले की नियुक्त की है और सीएम उद्धव ठाकरे के द्वारा नियुक्त किए गए सुनील प्रभु (Sunil Prabhu) को अवैध करार दिया है। शिंदे ने महाराष्ट्र के डिप्टी स्पीकर को भेजी चिट्ठी में कहा कि सुनील प्रभु के द्वारा जो व्हिप जारी किया गया है वह कानूनी तौर पर अवैध है। शिंदे असली शिवसेना खुद को बता रहे हैं और उनके समर्थन में 34 शिवसेना विधायकों ने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं।

इसके अलावा हमारी पार्टी के कैडर को राजनीतिक और व्यक्तिगत आधार पर विपक्षी वैचारिक दलों से जबरदस्त उत्पीड़न और संकट का सामना करना पड़ा, जो अब सरकार का हिस्सा हैं। शिवसेना ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ सरकार बनाने के लिए, जो वैचारिक रूप से शिवसेना के विरोध में हैं। पिछले ढाई साल से हमारी पार्टी और उनके नेतृत्व ने महाराष्ट्र राज्य में सत्ता हासिल करने के लिए विपरीत विचारधाराओं के साथ तालमेल बिठाकर पार्टी सिद्धांतों से समझौता किया है। और इसे लेकर हमारे शिवसेना कैडर और पार्टी के कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष है।

उद्धव ठाकरे और शरद पवार की मीटिंग

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महाराष्ट्र में सियासी घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। शिवसेना के दिग्गज नेता एकनाथ शिंदे ने बड़ी बगावत कर दी है, जिसके कारण उद्धव ठाकरे सरकार पर संकट मंडरा रहा है। शिवसेना के बागी विधायकों को बुधवार सुबह असम की राजधानी गुवाहाटी लाया गया। बकौल एकनाथ शिंदे, उनके साथ शिवसेना के 40 विधायक मौजूद हैं। इस बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने फेसबुक लाइव के जरिए जनता से बातचीत की और शिवसैनिकों से गद्दारी ना करने की अपील की।

Maharashtra Crisis LIVE: Latest Updates

महाराष्ट्र सरकार पर संकट के बीच उद्धव ठाकरे ने फेसबुक लाइव पर जनता को संबोधित करते हुए शिवसैनिकों से भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि अगर कोई मुझे मुख्यमंत्री पद पर नहीं देखना चाहता, तो सामने आकर ये बात कहे। मैंने इस्तीफा तैयार रखा है। लेकिन किसी भी मुश्किल परिस्थिति में मैं हार नहीं मानूंगा। उन्होंने एकनाथ शिंदे गुट पर तंज कसते हुए कहा कि पेड़ को जिस कुल्हाड़ी से काटा जाता है, उसमें उसी की लकड़ी लगी होती है। वही स्थिति आज पैदा हुई है। फिलहाल सीएम ठाकरे शरद पवार से मिलकर सरकार बचाने के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।

बागी विधायकों ने एकनाथ शिंदे को अपना नेता चुन लिया है। शिवसेना विधायक दल का प्रस्ताव पारित हुआ, जिसमें 34 विधायकों के हस्ताक्षर हैं। एकनाथ शिंदे के शिवसेना विधायक दल के नेता के रूप में बने रहने को लेकर 34 विधायकों के हस्ताक्षर वाले शिवसेना विधायक दल के प्रस्ताव को राज्यपाल के पास भेजा गया है। एकनाथ शिंदे 2019 में सर्वसम्मति से शिवसेना विधायक दल के नेता के रूप में चुने गए थे और अब भी वे शिवसेना विधायक दल के नेता बने रहेंगे। भारत गोगावाले को मुख्य सचेतक नियुक्त किया गया है। उधर, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष 4 विधायकों को लेकर सूरत पहुंच गये हैं। यहां से वो गुवाहाटी जाएंगे।

कैबिनेट बैठक में नहीं शिवसेना का कोई मंत्री: सियासी संकट के बीच उद्धव ठाकरे ने कैबिनेट बैठक बुलाई थी। बैठक में एनसीपी और कांग्रेस कोटे के मंत्री जरूर पहुंचे, लेकिन शिवसेना का कोई मंत्री नहीं आया। खुद उद्धव ठाकरे भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जरिए जुटे, क्योंकि उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।

शिंदे कैंप में फूट: शिंदे कैंप के विधायक नितिन देशमुख ने बड़ा बयान दिया है। नितिन देशमुख के मुताबिक, उन्हें धमका कर ले जाया गया था। मैं उद्धव ठाकरे और शिवसेना के साथ हूं। सूरत में मुझे जबरदस्ती रखा गया। मुझे हार्ट अटैक नहीं आया था। वहां डॉक्टर मेरे शरीर पर कुछ करना चाहते थे। मुझे मारने की साजिश थी। 100 से अधिक पुलिस वाले मेरे पीछे थे। मुझे जाने नहीं दिया गया। अब मैं मुंबई जा रहा हूं। बता दें, नितिन देशमुख की पत्नी ने उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाई थी। नितिन देशमुख के सामने आने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि एकनाथ शिंदे इन विधायकों को कहीं उनकी मर्जी के खिलाफ तो साथ नहीं ले गए हैं? क्या और भी विधायक इसी तरह सामने आएंगे?

उद्धव ठाकरे को हुआ कोरोना: महाराष्ट्र में जहां सियासी उथल-पुथल मची है, वहीं उद्धव ठाकरे की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव हुई हैं। इसके बाद ही उनके सारे कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं। वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कैबिनेट बैठक में जुटेंगे। कांग्रेस नेता कमलनाथ ने उद्धव के कोरोना पॉजिटिव होने की जानकारी दी।

मध्‍य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 25 जुलाई से, प्रथम अनुपूरक बजट होगा प्रस्तुत

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 मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 25 जुलाई से प्रारंभ होगा। 29 जुलाई तक चलने वाले इस सत्र में सरकार वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए प्रथम अनुपूरक अनुमान (बजट) प्रस्तुत करेगी। इसके अलावा अध्यादेश के स्थान पर मध्य प्रदेश नगर पालिक विधि और भू-राजस्व संहिता में संशोधन के लिए विधेयक प्रस्तुत किए जाएंगे। विधानसभा सचिवालय ने राज्यपाल मंगुभाई पटेल की अनुमति मिलने के बाद बुधवार को सत्र की अधिसूचना जारी कर दी। वहीं, सत्र की कम अवधि को लेकर नेता प्रतिपक्ष डा.गोविन्द सिंह ने आपत्ति जताई है।

विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह ने बताया कि पांच दिवसीय इस सत्र में शासकीय के अलावा अशासकीय कार्य भी संपादित किए जाएंगे। शुक्रवार को अशासकीय संकल्प पर चर्चा होगी। सत्र के दौरान बैठकें प्रतिदिन सुबह 11 बजे से प्रारंभ होंगे। प्रश्नकाल, शून्यकाल और ध्यानाकर्षण सूचनाओं पर चर्चा कराने के बाद अन्य कार्य संपादित किए जाएंगे। सुरक्षा की दृष्टि से सत्र के दौरान विधानसभा परिसर में प्रवेश पत्र के बिना किसी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि महापौर का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली यानी जनता के माध्यम से कराया जा रहा है।

इसके लिए अध्यादेश के माध्यम से नगर पालिक विधि में संशोधन किया गया है। अब अध्यादेश के स्थान पर संशोधन विधेयक प्रस्तुत किया जाएगा। इसी तरह राजस्व विभाग ने भू-राजस्व संहिता में संश्ाोधन करके राजस्व मंडल में खंडपीठ गठित करने का प्रविधान किया है। इसके लिए भी संशोधन विधेयक प्रस्तुत किया जाएगा। वहीं, वित्त विभाग अधोसंरचना विकास के कार्यों के लिए निर्माण विभागों को अनुपूरक बजट के माध्यम से अतिरिक्ति राशि आवंटित करने का प्रविधान करेगा।

सत्र की कम अवधि को लेकर नेता प्रतिपक्ष डा.गोविन्द सिंह ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से कम से कम बीस दिन का सत्र बुलाने का अनुरोध किया था लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया। सत्र की अवधि लगातार कम होती जा रही है। ऐसे में जनहित के मुद्दों पर सदन में चर्चा भी नहीं हो पा रही है। उन्होंने सरकार से सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग की है।

मध्‍य प्रदेश ने चार लाख टन मूंग समर्थन मूल्य पर खरीदने की केंद्र सरकार से मांगी अनुमति

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मध्य प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग का उत्पादन 16 लाख टन से अधिक होने की संभावना है। उत्पादन अधिक होने के कारण मूंग का प्रचलित बाजार भाव न्यूनतम समर्थन से कम हो गया है। उत्पादन में वृद्धि और किसानों के हित को देखते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल से कृषि भवन, नई दिल्ली स्थित कार्यालय में मुलाकात कर मूल्य स्थिरीकरण मद से चार लाख टन मूंग के उपार्जन की अनुमति मांगी। वहीं, उर्पाजन के लंबित लगभग छह हजार करोड़ रुपये का भुगतान करने की मांग भी की।

मध्य प्रदेश में इस बार 12 लाख हेक्टेयर में ग्रीष्मकालीन मूंग की बोवनी की गई थी। कृषि विभाग को अनुमान है कि 16 लाख टन से ज्यादा उत्पादन हुआ है। उत्पादन अधिक होने के कारण समर्थन मूल्य प्रति क्विंटल सात हजार 275 रुपये से कम बाजार भाव है। इसे देखते हुए किसान हित में 16 लाख टन उतपादन का 25 प्रतिशत यानी चार लाख टन मूंग मूल्य स्थिरीकरण मद से करने की अनुमति दी जाए। अभी केंद्र सरकार ने दो लाख 25 हजार टन मूंग खरीदने की अनुमति प्रदेश को दी है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से विगत वर्षों से लंबित लगभग छह हजार करोड़ रुपये की राशि भी शीघ्र जारी करने का अनुरोध किया। इस पर उन्होंने हरसंीाव सहयोग का भरोसा दिलाया।

उधर, मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी मुलाकात की और बताया कि मध्यप्रदेश पहला ऐसा राज्य है, जिसने सार्वजनिक परिसंपत्तियों के प्रबंधन के लिए पब्लिक एसेट मैनेजमेंट कंपनी बनाई है। इसके लिए केंद्र शासन ने एक हजार 55 करोड़ रूपये की प्रोत्साहन राशि भी जारी की है। उन्होंने बताया कि यदि परिसंपत्ति का प्रबंधन शासकीय विभाग करता है तो उसे पूंजी लाभ कर नहीं लगता है। राज्य शासन की नीति में सार्वजनिक परिसंपत्तियों के प्रबंधन के लिए बनाई गई कंपनियों को भी पूंजी लाभ कर की छूट दी जाए।

ईपीएफओ ​​ने अप्रैल में जोड़े 17.08 लाख नए सदस्‍य

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ईपीएफओ का दायरा बढ़ता जा रहा है। इसका मतलब यह हुआ कि नौकरियों की भी संख्‍या बढ़ी है एवं वेतनभोगी वर्ग में भी इज़ाफा हुआ है जिनका कि पीएफ अंशदान कटता है। हाल ही में केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय ने ईपीएफओ का अस्थायी पेरोल डेटा जारी किया है। ईपीएफओ ने अप्रैल, 2022 के महीने में 17.08 लाख शुद्ध ग्राहक जोड़े हैं। पेरोल डेटा की साल-दर-साल तुलना अप्रैल, 2021 में शुद्ध सदस्यता की तुलना में अप्रैल, 2022 में 4.32 लाख शुद्ध ग्राहकों की वृद्धि दर्शाती है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, हरियाणा, गुजरात और दिल्ली राज्यों में शामिल प्रतिष्ठान महीने के दौरान लगभग 11.60 लाख शुद्ध ग्राहकों को जोड़कर अग्रणी बने हुए हैं, जो कुल शुद्ध का 67.91% है। यह पेरोल डेटा इंटरिम है क्‍योंकि डेटा निर्माण एक रेग्‍युलर प्रक्रिया है, क्योंकि कर्मचारी रिकॉर्ड की एक अपडेटेड प्रोसेस है। पिछला डेटा इसलिए हर महीने अपडेट किया जाता है। अप्रैल-2018 के महीने से, ईपीएफओ सितंबर, 2017 की अवधि को कवर करते हुए पेरोल डेटा जारी कर रहा है।

9.23 लाख नए सदस्य पहली बार ईपीएफ सामाजिक सुरक्षा कवर के तहत

महीने के दौरान जोड़े गए कुल 17.08 लाख ग्राहकों में से, लगभग 9.23 लाख नए सदस्य पहली बार ईपीएफ और एमपी अधिनियम, 1952 के सामाजिक सुरक्षा कवर के तहत आए हैं। लगभग 7.85 लाख सदस्‍य ईपीएफओ के अंतर्गत आने वाले प्रतिष्ठानों के भीतर अपनी नौकरी बदलकर ईपीएफओ के तहत शामिल प्रतिष्ठानों से बाहर निकले और फिर से जुड़ गए। उन्‍होंने अपने पीएफ निकासी की बजाय योजना के तहत सदस्यता बनाए रखने का विकल्प चुना।

पेरोल डेटा की आयु-वार तुलना

पेरोल डेटा की आयु-वार तुलना इंगित करती है कि 22-25 वर्ष के आयु-समूह ने अप्रैल, 2022 के दौरान 4.30 लाख अतिरिक्त के साथ सबसे अधिक शुद्ध नामांकन दर्ज किया है। इसके बाद 29-35 वर्ष के आयु-समूह के साथ एक माह के दौरान 3.74 लाख शुद्ध जोड़ियां स्वस्थ रूप से जोड़ी गईं। इन दो आयु समूहों में महीने के दौरान लगभग 47.07% शुद्ध ग्राहक जोड़े गए। 29-35 वर्ष के आयु समूह को अनुभवी कर्मचारी माना जा सकता है जिन्होंने करियर ग्रोथ के लिए नौकरी बदली है और ईपीएफओ के साथ रहने का विकल्प चुना है।